CTET संस्कृत प्रैक्टिस सेट 2022 | ctet Sanskrit Pedagogy Practice Set

Ctet & Tet Sanskrit Practice Set | Ctet Sanskrit important questions and answers | ctet sanskrit model paper 2022

CTET की परीक्षा में पूछें गये महत्वपूर्ण प्रश्न, पढ़ें 

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ctet sanskrit pedagogy practice set

1. ‘सतत-व्यापक-मूल्याङ्कनम्’ इत्यनेन सम्बद्धा ‘व्यापक’ इति सङ्कल्पना छात्रस्य वृद्धिविकासान्तर्गते …….पक्षं विवृणोति।

1. सह-शैक्षणिकस्य

2. शैक्षणिक-सहशैक्षणिकयोः

3. सम्पूर्णशैक्षिकस्य

4. शैक्षणिकस्य

उत्तर:- (2) ‘सतत-व्यापक-मूल्याङ्कन’ इससे सम्बद्ध पद ‘व्यापक’ इस संकल्पना से छात्र के वृद्धि एवं विकास के अन्तर्गत शैक्षणिक तथा सहशैक्षणिक दोनों पक्षों का होना आवश्यक है। 2. उपचारात्मकं शिक्षणं मन्यते?

1. निदानम् अधिगमनात्मक-रिक्ति-संज्ञानम् च

2. मेधाविछात्रान् उद्दिश्य शिक्षणम्

 3. प्रदत्तपाठ्यक्रमोत्तर-शिक्षणम्

 4. अतिरिक्त-शिक्षणम्

उत्तर:- (1) निदान और अधिगमनात्मक-रिक्ति-संज्ञान उपचारात्मक शिक्षण माने जाते है।

3. कस्यापि जनस्य विशिष्ट-क्षमतानां कौशलानां, यथा, सङ्गीत-विज्ञान-औषध-इत्यादीनां, रचनात्मकताम् (Potential) अन्वेष्टुं मापयितुं कृता परीक्षा किं कथ्यते?

 1. अभिवृत्ति-परीक्षा (Aptitude Test)

 2. प्रवृत्ति-परीक्षा (Attitude Test)

 3. उपलब्धि-परीक्षा (Achievement Test)

4. नैपुण्य-परीक्षा (Proficiency Test)

उत्तर:- (1) किसी भी प्रकार के लोगों की विशिष्ट क्षमताओं, कौशलों जैसे -संगीत – विज्ञान – औषध इत्यादि रचनात्मकता के खोज के लिए, मापन के लिए इस प्रकार की परीक्षा (परीक्षण) को अभिवृत्ति – परीक्षा (Aptitude Test) कहते हैं।

 4. समाविष्ट-कक्षाम् (Inclusive Classroom) आश्रित्य निम्नलिखित-युक्तिषु असमीचीना अस्ति

1. सङ्गणक-आधारित-उपचारात्मककार्येण सह सम्प्रेषणात्मक प्रविधीनाम् अतिरिक्त साहाय्यम्।

2. सर्वे छात्राः सुयोग्याः भवेयुः इत्यर्थं विविध-संसाधनानाम् उपयोगः

3. छात्राः स्वगत्यनुगुणम् अधिगच्छेयुःइत्यर्थं विभिन्न-अनुदेशन मूल्याङ्कन-प्रणालीनाम् उपयोगः

4. विभिन्नविषयाणां सन्दर्भे अनुकूलित-संशोधित-विकल्पात्मक

उत्तर:- (4) समाविष्ट कक्षा में विभिन्न विषयों के सन्दर्भ में अनुकूलित संशोधित विकल्पात्मक गतिविधियाँ असमीचीन है।

 5. निम्नलिखितेषु किं समाविष्ट-कक्षया सम्बद्धं न?

 1. समानुभूतिः (empathy)

2. सहयोगः (Co-operation)

 3. सहकार्यता (Collaboration)

 4. सहानुभूतिः (Sympathy)

उत्तर:- (4) समानुभूति, सहयोग एवं सहकार्यता कक्षा से सम्बद्ध होती है। सहानुभूति का कक्षा से कोई सम्बन्ध नहीं होता। सहानुभूति का सम्बन्ध प्राणिमात्र के बीच भाव जगत में होती है।

6. एकः शिक्षकःचित्रेण सह गृहस्य दृश्यस्य वर्णने संलग्नः। चित्रे पिता पाकशालायां पाकक्रियायां संलग्नः, माता सङ्गणकस्य साहाय्येन कार्ये संलग्ना, पुत्रः च सीवनप्रक्रियायां लग्नः। अध्यापकः चित्रद्वारा किं स्पष्टीकर्तुम् इच्छति?

 1. कार्यस्य महत्त्वम्

 2. कार्यविभाजनम्

3. लिङ्ग-सम्बद्ध-पूर्वधारणानाम् उन्मूलनम्

4. कार्यम् एव पूजा

उत्तर:- (3) एक शिक्षक चित्र के साथ घर (गृह) के दृश्य का वर्णन करता है। चित्र में पिता पाकशाला (रसोई) में पाक क्रिया कर रहा है; माता सङ्गणक के साथ कार्य में लगी हुई है और पुत्र सीवन(सिलाई) प्रक्रिया में लगा हुआ है। यहाँ पर अध्यापक चित्र द्वारा लिङ्ग सम्बन्ध पूर्व धारणा के उन्मूलन को स्पष्ट करता है ।

 7. विभिन्नविषयाणं ज्ञानस्य कृते विद्यार्थिनः मातृभाषायाः उपयोग:

1. ज्ञानप्राप्तौ साहाय्यं करिष्यति

 2. इतरभाषणां विषयाणं व अधिगमे बाधकः भविष्यति

3. अन्यासां भाषाणां ज्ञानार्थं विघ्नं जनयिष्यति

 4. संस्कृतभाषायाः कक्षायां अनुमोदितः न स्यात्

उत्तर:- (1) विभिन्न विषयों का ज्ञान प्राप्त कर विद्यार्थी मातृभाषा का उपयोग ज्ञान प्राप्ति में सहायता करता है। क्योंकि मातृभाषा का ज्ञान अधिक उपयोगी होता है। इससे समझ विकसित होती है।

 8. शिक्षिका कक्षायां स्थितानां वस्तूनांक नामानि कर्गदपट्टिकायां लिखित्वा वस्तूनाम् उपरि आरोपयति। एवं सा ……..

1. छात्राणं शुद्धवर्तनीज्ञानं कारयति

 2. कक्षा व्यवस्थितां करोति

 3. कक्षायां वातावरणं मुद्रितपठनसामग्रीमयं करोति

 4. पर्यावरणविज्ञानस्य (EVS) पाठनं करोति

 उत्तर:- (3) शिक्षिका कक्षा में स्थित वस्तुओं के नाम को कर्गेद की पट्टिका पर लिखकर वस्तुओं को आरोपित करता है। इस प्रकार वह कक्षा का वातावरण मुद्रित पठन सामग्रीमय करती है।

9. उत्पादकशब्दावली (Productive vocabulary) सन्निवेशयति

 1. श्रवणसमये अभिज्ञातान् शब्दान्

 2. लेखनसमये प्रयुक्तान् शब्दान्

3. सम्भाषणसमये लेखनसमये च प्रयुक्तान् शब्दान्

 4. सम्भाषणसमये प्रयुक्तान् शब्दान्।

उत्तर:- (3) सम्भाषण और लेखन के समय प्रयोग किये गये शब्द या शब्द युक्त शब्दावली उत्पादक शब्दावली कहलाती है।

10. लेखनस्य प्रक्रियास्वरूपानुसारं (Process writing) शिक्षिका विमर्शण (Brainstorming) सह प्रारम्भं करोति। अत्र विमर्शः (Brainstorming) इत्यस्य आशयः

 1. उपस्थितविषयोपरि विचाराणां सङ्ग्रहः उपस्थापनं च

2. स्वस्थबुद्धेः कृते यौगिकव्यायामः

 3. उपस्थितविषयस्य बोधार्थं बुद्धौ बलाधातः

4. बुद्धौ ज्ञानस्य चक्रवातकरणम्

 उत्तर:- (1) लेखन की प्रक्रिया के अनुसार कोई एक शिक्षिका परस्पर विमर्श के साथ पाठ का यदि प्रारम्भ करती है। तब शिक्षिका का यह विमर्श उस समय उपस्थित विषय के ऊपर विचारों से सग्रहण की स्थापना को सिद्ध करता है।

 11. केचन छात्राः सूचि-लिखित-उत्तरेभ्यः शीर्षकसहितं समुचितम् उत्तरम् अन्वेष्टं निर्दिष्टाः। पूर्वम् एव ते सामग्रयाः स्वरूपविषये किञ्चित् प्रष्टुम इच्छन्ति। इदं किम्? छात्राः

1. सूचनान्तरालं पूरयन्तः सन्ति

2. सक्रियरूपेण सामग्रयाः सन्दर्भे पूर्वानुमानप्रक्रियायां संलग्नाः

3. तथ्यानां निरीक्षणे संलग्नाः

4. प्रश्नोत्तरसन्दर्भ ऊहां (Guess) कुर्वन्ति

उत्तर:- (2) यदि किसी छात्र को सूची लिखित उत्तर शीर्षक सहित उत्तर देने के लिए निर्दिष्ट किया गया है तो इसका अर्थ है छात्रों से पूर्वनमान प्रक्रिया के आधार पर संलग्न क्रिया के लिए कहा गया है। 40

 12. अध्यापकः/अध्यापिका उदाहरणैः व्याकरणात्मकसंरचना पाठयितं दृश्य-श्रव्य उपकरणानां प्रयोगं करोति। छात्राः प्रभावि-सम्प्रेषणार्थं, लेखनेन भाषणेन वा, एतेषां पाठित-तत्त्वानां सम्यक् उपयोगं कुर्वन्ति। एषा प्रक्रिया अस्ति

 1. रचनात्मकी

 2. पुनरात्मकी

 3. आगमनात्मकी

4. निगमनात्मकी

उत्तर:- (3) अध्यापक/अध्यापिका उदाहरण के लिए व्याकरणात्मक संरचना को स्पष्ट करने हेतु दृश्य-श्रव्य उपकरणों का प्रयोग करते हैं। छात्रों के प्रभावी सम्प्रेषण, लेखन एवं भाषण इन पठित-तत्वों का सम्यक उपयोग करते हैं। यह प्रक्रिया आगमनात्मक प्रक्रिया कहलाती है।

13. अधिगन्तारः प्रायः ज्ञान-निर्मातारःअपि भवन्ति। भाषा-कक्ष्यया इदं साधयितुं कः समीचीनः उपायः?

 1. लक्ष्यभाषया सम्बद्ध-पाठ्यवस्तुनः अधिकाधिकं पठनम्

 2. पूर्वनिर्धारित-प्रायोजनात्मकं कार्य प्रतिष्टिः च

3. विभिन्नगतिविधीनां द्वारा नुतनसन्दर्भेष भाषा-प्रयोगार्थम् अधिकाधिक-अवसरणां प्रदानम् 4. छात्राणाम् अधिगम-क्षमता-विकासार्थम् अधिगम-सामग्रयाः उपलब्धिः

उत्तर:- (3) विभिन्न गतिविधियों द्वारा नूतन संदर्भ से भाषा प्रयोग के अर्थ में अधिकाधिक अवसर प्रदान करना भाषा कक्षा को साधित करने का यह समीचीन उपाय है।

 14. विचारमन्थनं (Brain storming) सप्रयोजनं भवति

1. यदा सुविचारेभ्यो बहिर्गन्तुमिष्यते

2. यदा चिन्तनविधानानि स्थापितानि

 3. यदा मूलभूतविचारः प्रचारयितुम् इष्यते

 4. यदा विषयाभिवीक्षणे सर्जनात्मकविधानानां संवर्धनमपेक्षितम्

 उत्तर:- (4) सर्जनात्मक विधान के संवद्धन में विचार मंथन की अपेक्षा होती है। विचार मंथन के परिणाम स्वरूप ही नई विधा का प्रतिपादन होता है।

15. भाषाबोधकानाम् आद्य कर्तव्यम्

1. छात्राणां संवहनकौशलाभिवर्धने साहाय्यम्

2. छात्राणं भाषादोषशोधनम्

 3. सविवरणं सम्पूर्णपाठबोधनम्

4. व्याकरणपरिकल्पनानां विवरणं रूपनिष्पत्तौ अभ्यासवर्गप्रदानं

 उत्तर:- (1) छात्रों में कौशल अभिवर्धन में सहायता हेतु भाषा बोध की पहली आवश्यकता है। भाषा की पूर्ण जानकारी होना कौशल छात्रों की विषयगत कुशलता का सही मानदण्ड प्रतिस्थापित करती है।

16. गृहकार्यस्य मुख्योद्देश्यः अस्ति

 1. छात्राः गृहे नवीनपाठान् पठितुं रुचिं प्रदर्शयेयुः

 2. अभिभावकाः जीनीयुः यत् छात्राः विद्यालये किं किं पठन्ति

 3. पाठितपाठान् अधिकृत्य अभ्यासं कुर्युः

 4. पठने छात्ररुचि-वर्धनम्

उत्तर:- (3) गृहकार्य का मुख्य उद्देश्य पढ़े हुए पाठ का अधिक से अधिक अभ्यास करना।

 17. श्रवणकौशलविकासार्थं कः उत्तमः मार्गः?

1. विद्यालयस्य विभिन्नकार्यक्रमेषु भाषाश्रवणस्य अवसराः

 2. कथितवाक्यानां पुनरावृत्तिः

 3. छात्रकथनानां सावधानं श्रवणम्

 4. ‘ध्यानेन शृण्वन्तु’ इति छात्रेभ्य पुनः पुनः निर्देशदानम्

 उत्तर:- (1) श्रवण कौशल के विकास के लिए विद्यालय में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों में प्रयोग किए जा रहे भाषाओं का श्रवण करना ही उत्तम (सर्वश्रेष्ठ) मार्ग है।

 18. विस्तृतपदानां प्रतीपक्रमः?

 1. मन्त्रः (संस्कृतम्)- मन्त्रः (हिन्दी)

 2. चोरः  चुरति

 3. भारत + युरोपीय  भारोपीय

 4. प्रयोजकः – अप्रयोजकः

उत्तर:- (4) विस्तृतपदानां प्रतीपक्रमः का प्रयोग प्रयोजक तथा अप्रयोजक के लिए किया गया है। प्रयोजक उसे कहते हैं जो आयोजनकर्ता होता है। किसी प्रयोजन की पूर्ति के लिए जो कार्य करता है उसे प्रयोजक कहते हैं।

 19. शीर्षकस्य मुख्यसम्बन्धः भवति

1. मुख्यपात्रस्य कथनेन

2. पाठस्य मुख्यांशेन

3. पाठस्य मुख्यसूक्त्या

 4. सम्पूर्णपाठेन

 उत्तर:- (4) शीर्षक का मुख्य सम्बन्ध सम्पूर्ण पाठ से होता है। सम्पूर्ण पाठ के पढ़ लेने के बाद जो भाव ग्रहण होता है वही उसका शीर्षक होता है।

20. बालानां निःशुल्क-आवश्यक-शिक्षा अधिकार अधिनियमानुसारं (2009) शिक्षास्वरूपं कीहक् भवेत्?

 1. मासिकपरीक्षणद्वारा शिक्षास्तरवर्धनम्

2. छात्रानुकूल-गतिविधि-अनुसन्धान-प्रदर्शनद्वारा शिक्षणम्।

 3. विद्यालयकालान्तरम् अभिभावकैः अतिरिक्तशिक्षणम् ।

 4. प्रारम्भिकस्तरे शैक्षिकविषयाणां शिक्षणम् एव आवश्यकम्।

 उत्तर:- (2) छात्रों के अनुकूल गतिविधियाँ एवं अनुसन्धान प्रदर्शन द्वारा शिक्षा प्रदान करना बाल निःशुल्क आवश्यक शिक्षा अधिकार अधिनियम (2009) का स्वरूप है। इसके द्वारा 6 से 14 वर्ष के बालकों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया।

 21. कीदृशाः प्रश्नाः छात्रचिन्तनकौशलं न उन्नयन्ति?

1. तार्किकाः प्रश्नाः।

 2. व्याख्यात्मकाः प्रश्नाः।

3. व्यक्तिगत-चिन्तनात्मकाः प्रश्नाः।

4. केवलं पाठ्यवस्तु-पठनाधारिताः प्रश्नाः।

उत्तर:- (4) ऐसा प्रश्न जो छात्र चिन्तन की उन्नति करता है, वह है तार्किक प्रश्न, व्याख्यात्मक प्रश्न और व्यक्तिगत चिन्तन से युक्त प्रश्न, न कि केवल पाठ्यवस्तु पठन पर आधारित प्रश्न।

 22. अनुदेशनकाले अधिगमन-प्रगति-प्रक्रियायाः निर्देशनं शिक्षार्थिभ्यःच निरन्तरं प्रतिपुष्टिपोषणं किं कथ्यते?

1. रचनात्मकं मूल्याङ्कनम् (Formative assessment)

2. मानक-परीक्षणम् (Standardised test)

3. मानक-सन्दर्भित-परीक्षणम् (Norm-referenced test)

4. निकष-सन्दर्भित-मूल्याङ्कनम् (Criterion-refernced assessment)

उत्तर:- (1) अनुदेशन काल में अधिगमन प्रगति-प्रक्रिया का निर्देशन और शिक्षार्थियों द्वारा निरन्तर प्रति पुष्टिपोषण रचनात्मक मूल्यांकन कहलाता है।

 23. भाषायाः कक्षायां कथाकथनम् एकपद्धतिरूपेण प्रयोक्तुं न शक्यते

1. केवलं नैतिकशिक्षणस्य कृते

2. लेखनस्य अध्यापनकृते

 3. श्रवण-भाषण-बोधनस्य कृते

4. पठनकौशलस्य अध्यापनकृते

 उत्तर:- (3) भाषा की कक्षा में कथाकथन की एक पद्धति श्रवणभाषण एवं बोधन का प्रयोग नहीं किया जा सकता। जबकि नैतिक शिक्षण, लेखन अध्यापन तथा पठन कौशल का अध्यापन होता है।

24. कवितापाठनं क्रियते

 1. विचारणां बोधार्थम् आनन्दानुभूत्यर्थं च ।

 3. वर्तन्याः व्याकरणस्य च ज्ञानार्थम्

 2. नवीनशब्दाज्ञानार्थम्

4. छन्दोबद्धरचनायाः ज्ञानार्थम्

 उत्तर:- (1) कविता पाठन विचारों के बोधनार्थ और आनन्द अनुभूति के लिए किया जाता है तथा यह रुचि बढ़ाने में भी उपयोगी है। 10

25. सुन्दरी एकस्य अभ्यासकार्यस्य नियोजनं कृतवती यस्मिन् सा प्रत्येक पञ्चमशब्दस्य लोपं कृतवती। एतद् अभ्यासकार्यम् अस्ति

 1. व्याकरणपरीक्षा

2. लेखनपरीक्षा

3. रिक्तस्थानपूर्तिपरीक्षा

 4. अनुमानकार्यम्

उत्तर:- (3) सुन्दरी नाम की एक बालिका अपने अभ्यास कार्य को सम्पन्न करती है। जिसमें प्रत्येक पाँचवें शब्द का लोप वह बालिका करती है। ऐसा अभ्यास कार्य बालिका द्वारा रिक्तस्थान पूर्ति की परीक्षा से सम्बन्धित है।

26. दोषपूर्णपठनाभ्यासस्य कारणेषु अन्यतमं कारणं भवति

 1. कक्ष्यायां बहुविद्यार्थिनां सम्मर्दः (Over crowded class)

 2. अमुलीदर्शनम् (Finger pointing) अथवा पठने चक्षुरक्षर-संयोगार्थम् अङ्गुली-दर्शनम्

 3. बहुभाषाज्ञानम् (Multilingualism)

 4. द्विभाषाज्ञानम् (Bilingualism)

उत्तर:- (2) दोषपूर्ण पठन अभ्यास के कारणों में अन्य कारण अंगुली दर्शन अथवा पढ़ने में चक्षुरक्षर संयोगार्थ अंगुली दर्शन में होता है।

 27. विद्यार्थिषु उच्च प्राथमिकस्तरे उच्च माध्यमिकस्तरे भाषायां रुचिसंवर्धनार्थम् अपेक्षितं किं नाम?

1. विद्यार्थिभ्यः अधिकं श्रुतलेखनं (Dictation) देयम्

 2. विद्यार्थिनां व्याकरणज्ञानस्य वर्धनं कार्यम्

 3. विद्यार्थिनः पुस्तकानि पठितुं सूचिताः भवेयुः

4. विद्यार्थिभ्यः मौखिकरूपेण अधिकाधिकविवरणं देयम् ।

 उत्तर:- (4) विद्यार्थियों में उच्च प्राथमिक स्तर तथा उच्च माध्यमिकस्तर में भाषाओं की रुचिसंवर्धनार्थ अपेक्षित है क्योंकि विद्यार्थियों के लिए मौखिक रूप से अधिक से अधिक विवरण देना चाहिए।

28. सहजरूपेण भाषा-अधिगमन-सन्दर्भ महत्त्वपूर्णम् अस्ति

 1. अधिगत-शब्द-अधिकृत्य वाक्यनिर्माणम्

2. लेखनम्

3. कथनशैल्याः अपेक्षया अर्थस्पष्टीकरणम्

 4. अभिभावकानां वाक्यानां श्रवणम्

 उत्तर:- (3) सहज रूप से भाषा अधिगमन सन्दर्भ में कथन शैली की अपेक्षा अर्थ स्पष्टीकरण अति महत्वपूर्ण है।

29. भाषा-शिक्षण-अधिगम-प्रक्रिया-सन्दर्भ समस्यानां समाधानां प्राप्तुम् अधिगमशैली महत्त्वपूर्णा। भाषाशिक्षणोपागमार्थम् अपि अस्याः विशिष्टं स्थानम्। एतादृशी एका भाषा शिक्षण-अधिगमशैली अस्ति

1. मुद्रणोन्मुखी शैली

 2. केन्द्रीकृता शैली

3. उच्चस्तरीया शैली

4. शान्तिपूर्णा शैली

उत्तर:- (1) भाषा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के सन्दर्भ में समस्या के समाधान प्राप्त करने में अधिगम शैली महत्वपूर्ण है। भाषा शिक्षण में भी इसका विशिष्ट स्थान है, इस तरह की एक भाषा शिक्षण अधिगम शैली मृदणोन्मुखी शैली है।

30. शिक्षणस्य आरम्भबिन्दु प्रवर्तयितुं छात्राणां अवबोधनदौर्बल्यगवेषणाय क्रियमाणं मौल्याङ्कनं भवति

1. सर्जनात्मकम्

 2. सत्रान्तकृतम्

 3. निदानात्मकम्

4. सङ्कलनात्मकम्

उत्तर:- (3) शिक्षण के प्रारम्भिक अवस्था के प्रवर्तन हेतु छात्रों के अवबोधन की दुर्बलता के मूल्याङ्कन में निदानात्मक प्रक्रिया सहायक होती है। निदानात्मक प्रक्रिया शिक्षण में समग्र रूप से सहायक होती है।

31. व्याकरणस्य लक्षणम्

 1. भाषाप्रवाहः

2. भाषायाः प्रस्तुतिः

3. भाषादर्शनम्

 4. भाषासिद्धान्तः

 उत्तर:- (4) व्याकरण का लक्षण भाषा सिद्धान्त है। व्याकरण भाषा को वैज्ञानिक परिस्थिति से जोड़ती है। जो क्रमबद्ध भाषा प्रवाह का प्रतिपादन करती है।

 32. वाक्कौशलम् इति अस्य साहाय्येन सम्यग् वर्धते

1. स्थानापत्तिसारणिः

2. लिखित-संभाषणाभ्यासः

 3. अभिनयो गोष्ठीचिन्तना च

 4. समृद्धवाचनसामग्री

उत्तर:- (3) अभिनव एवं गोष्ठी से वाणी की कुशलता में वृद्धि होती है। इससे बोलने की प्रवृत्ति के साथ-साथ शब्द ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इससे व्यक्तिगत विकास होता है।

 33. छात्राणां ‘बहुविध-ज्ञान-कौशल-विकासार्थं शिक्षकाणां कृते कः मार्गः उत्तमः?

 1. पठन-निर्देशनार्थं छात्रेभ्यः केचन प्रश्नाः दातव्याः

2. पाठ-अवबोधनार्थं छात्राः नूतनशब्दानाम् अर्थान् स्मरेयुः

3. छात्राः पाठ्यांशम् अधिकृत्य स्वयं नूतन-चिन्तनशील प्रश्नानां निर्माणार्थं प्रेरियतव्याः

4. छात्राणां कृते अवबोधनात्मक-कार्यार्थम् अवसराः दातव्याः

उत्तर:- (3) छात्रों के बहुविध-ज्ञान-कौशल के विकास के लिए शिक्षक का कौन सा मार्ग उत्तम है – छात्र पाठ्यांश का अध्ययन कर नये चिंतनशील प्रश्नों का निर्माण करने के लिए प्रेरित करना।

34. वाचन-सन्दर्भ ‘सञ्चय-कौशलेन’ (Gathering Skil) अभिप्रायः अस्ति

1. टिप्पणी-स्वीकरणम् (note taking)

2. विश्लेषणम्

 3. व्याख्यानम्

 4. टिप्पण-निर्माणम् (note making)

 उत्तर:- (4) वाचन सन्दर्भ में अर्थात् बोलने के सन्दर्भ में सञ्चय कौशल का अभिप्राय है – टिप्पणियों का निर्माण करना। इससे छात्र विषय ज्ञान को पूर्णरूप से समझने के लिए योग्य होगा और इसके आधार पर वह अपने ज्ञान को और विस्तृत रूप देने में सक्षम होगा।

35. सूचना-सम्बद्ध-विभिन्न-पक्षेषु श्रुत-ध्वनि-शब्द-पद दृष्ट्या परस्परं विभेदीकरणस्य गतिविधिः केन कौशलेन सम्बद्धः?

1. पठनेन

2. लेखनेन

 3. श्रवणेन

4. भाषणेन

 उत्तर:- (3) सूचना सम्बन्धी विभिन्न प्रकार के पक्ष जैसे-श्रुत, ध्वनि, शब्द, पद की दृष्टि से परस्पर एक दूसरे में विभेद के कारण श्रवण कौशल गतिविधि अत्यन्त महत्वपूर्ण है, जिससे छात्रों की मानसिक व बौद्धिक योग्यताओं, क्षमताओं आदि में वृद्धि होती है।

 36. लेखनसमये संलग्नशीलक्रममेकम्

1. उपसर्गः

 2. उक्तिः

 3. उपवृत्तम्

4. विशेषणम्

 उत्तर:- (4) लेखन के समय संलग्नशील क्रम में एक विशेषण होता है संस्कृत में विशेष्य के लिङ्ग, वचन और विभक्ति के अनुसार विशेषण का रूप बदलता है। जिस लिंग, जिस वचन और जिस विभक्ति का विशेष्य होता है, उसी लिंग उसी वचन और उसी विभक्ति का विशेषण भी होता है।

37. संस्थासु अन्तःशैक्षणिक-संपन्मूलविनिमयकरणं संवहन तन्त्रज्ञानम् (Communicative Technology)

1. एरनेट (ERNET)

2. अन्तर्जालम् (INTERNET)

 3. इन्ट्रानेट (INTRANET)

 4. डेल्नेट (DELNET)

 उत्तर:- (2) अन्तः शैक्षणिक संस्थानों में भाषा के आदान-प्रदान का मूल कारण एक ऐसा तन्त्र या जाल है जिसके माध्यम से सभी भाषायी कार्य सम्पन्न होते हैं उसे ही हम अन्तर्जाल या इन्टरनेट कहते हैं।

38. कक्षायाः मिश्रित-योग्यता-समूहः स एव यत्र 

1. विभिन्न-राष्ट्र-सम्बद्धाः छात्राः मिलित्वा पठन्ति।।

 2. समाजस्य विभिन्न-स्तरसम्बद्धाः छात्राः मिलित्वा पठन्ति।

 3. मन्दगतिशिक्षार्थिनः (slow learners) उच्च-उपलब्धि-प्राप्ताः च मिलित्वा पठन्ति।

4. बालकाः बालिकाः च मिलित्वा पठन्ति।

उत्तर:- (3) कक्षाओं में मिश्रित योग्यता – समूह वहीं होता है जहाँ मन्द या कम बुद्धि वाले छात्र उच्च बुदधि वाले छात्रों के साथ मिलकर पढ़ते हैं। अर्थात् मन्द बुद्धि और तीव्र या कुशाग्र बुद्धि वाले छात्र एक साथ मिलकर पढ़ाई करें।

39. अनुमानम् (Prediction) एकम् उपकौशलम् अस्ति

 1. टिप्पणीकरणस्य (Note making)

2. पठनस्य (Reading)

 3. समूहकरणस्य (Chunking)

4. सारांशकरणस्य (Summarising)

उत्तर:- (2) अनुमानम् भी एक कौशल है। अनुमान का एक उपकौशल है वह है- पठन का कौशल।

40. प्रत्येकं शिक्षार्थी विशिष्ट-अधिगमशैल्या पठति। केचन पाठ्यपुस्तकं पठित्वा अवगच्छन्ति, केचन अध्यापकं सावधानं शृण्वन्ति अन्ये च गतिविधिषु संलग्नाः भूत्वा अनुभवैःशिक्षा प्राप्नुवन्ति। इदम् अधिकृत्य अध्यापकेन किं कर्तव्यम्?

1. उपयुक्त-निष्पत्त्यर्थं निरन्तरं छात्रपरीक्षणम्।

2. वैयक्तिकक्षपताविकासाय छात्राः कला-नृत्य-सङ्गीत गतिविधिषु प्रतिभागित्वं स्वीकुर्युः इत्यर्थं परामर्शदानम्।

 3. छात्राणां वैविध्यम् अधिकृत्य विविधशिक्षणविधिभिः विभिन्नपद्धतिद्वारा च शिक्षणम्।

 4. प्रत्येकं पाठस्य सम्पूर्णपाठनं पठितपाठानां च सम्यक् पुनरावृत्तिः।

 उत्तर:- (2) प्रत्येक शिक्षार्थी विशिष्ट अधिगम शैली का पठन करता है। कुछ पाठ्यपुस्तकों का पठन करते हैं, कुछ शिक्षकों को सावधानी से श्रवण करते हैं और अन्य कतिपय ऐसे होते हैं जो अन्य गतिविधियों के अनुभव से शिक्षा प्राप्त करते हैं। इन बातों पर ध्यान देकर अध्यापकों का कर्तव्य होता है कि वे छात्रों के वैयक्तिक क्षमता के विकास के लिए छात्रों को कला, नृत्य एवं संगीत गतिविधियों में प्रतिभागी बनाने हेतु परामर्श दे।

41. ‘छात्राः भाषायां सम्प्रेषणात्मक-कौशलं सहजतया प्राप्तुं समर्था:भवेयुः’ इत्यर्थम् प्रभावपूर्णमार्गः अस्ति

1. छात्रैः विस्तृत-निबन्धन-लेखनम् तेषां च पूर्णरूपेण संशोधनम्।

 2. छात्रैः मानकभाषाश्रवणं तदनुगुणम् च अनुकरणम्।

 3. ‘भाषा-व्यवहार-द्वारा भाषाकौशलानां समुचितः विकासः भवेत्’ इत्यर्थम् अवसराणां प्रदानम्।

4. व्याकरणज्ञाननैपुण्यार्थं भाषाकौशलानाम् अधिकाधिक अभ्यासः।

 उत्तर:- (3) भाषा व्यवहार द्वारा भाषा कौशल का समुचित विकास होता है। अतः भाषा कौशल में सम्प्रेषण का विशेष महत्व है। इससे भाषा कौशल का विकास अधिक होता है।

 42. परीक्षणं महत्त्वपूर्णं भवति

1. प्रतिपुष्टिम् अधिकृत्य उपचारात्मककार्यार्थम्

3. भयद्वारा छात्रान् प्रेरयितुम् ___

 2. अग्रिमकक्षार्थं छात्रोन्नत्यर्थम्

 4. कक्षायां श्रेष्ठछात्रं संज्ञातुम्

 उत्तर:- (1) प्रतिपुष्टि को अधिकृत्यकर उपचारात्मक कार्य हेतु परीक्षण महत्वपूर्ण होता है।

 43. भाषा मुख्यरूपेण भवति

1. मौखिकी

 2. लेखाचित्रात्मिका

 3. लिखिता

4. दृश्या

उत्तर:- (1) भाषा दूसरे के विचारों का साधन है। क्योंकि बिना अर्थ जाने समझ विकसित नहीं होती है। भाषा मुख्य रूप से मौखिक होती है।

 44. भाषायाः अधिगमः प्रभावशाली भवति यदा विद्यार्थी

 1. क्रमबद्धरीत्या व्याकरणगतनियमान् जानाति

 2. रूपज्ञानात् प्रयोगं प्रति गच्छति

 3. नियमात् प्रयोगं प्रति गच्छति

 44. अर्थग्रहणात् रूपं प्रति गच्छति

 उत्तर:- (4) भाषा का अधिगम प्रभावशाली होता है। यदि छात्र कही गई बात का अर्थ ग्रहण करने में समर्थ हों।

45. पठनस्य शिखरपादक्रमपद्धतौ (Top-down model) अध्यदेता

 1. पूर्णात् अवयवान् प्रति गच्छति

2. लम्बमानं (Vertucally) गच्छति

 3. प्रस्यमानं (Horizontally) गच्छति

 4. अवयवेभ्यः पूर्ण प्रति गच्छति

 उत्तर:- (1) शिखरपादक्रम पद्धति वह पद्धति कहलाती है जिसमें रूचिकर्ता या अध्यनकर्ता शब्दशः पूर्ण अवयवों को प्राप्त करता है।

 46. उच्चस्तरीय-पठन-अवबोधन-सन्दर्भ कानि तत्त्वानि प्रमुखानि?

 1. छात्रभाषया पुनर्लेखनं, रिक्तस्थानपूर्तिः पाठ्यवस्तु-सम्बद्ध विभिन्नर्थाः

 2. छात्रभाषया पुनर्लेखनं, पूर्णवाक्यैः पाठ्यवस्तुसम्बद्ध भावस्पष्टीकरणं, प्रमुखशब्दानां च विभिन्नेषु सन्दर्भेषु प्रयोगः

3. बिन्दुलेखनं, पाठ्यवस्तु-सम्बद्ध-प्रमुखशब्द-चयनम् पाठ्यवस्तुनिहिताः विभिन्नार्थाः ।

 4. पाठ्यवस्तु-सम्बद्ध-प्रमुखशब्दानां छात्रभाषया पुनर्लेखनम्

उत्तर:- (2) उच्च स्तरीय पठन-अवबोधन सन्दर्भ में छात्र भाषा का पुनर्लेखन, पूर्ण वाक्य में पाठ्य वस्तु सम्बन्धी भाव स्पष्टीकरण और प्रमुख शब्दों का विभिन्न सन्दर्भो में प्रयोग प्रमुख तत्व है।

47. मौखिकी प्रश्नोतरी कस्य कौशलस्य अभ्यासस्य कृते समीचीना?

1. पठनस्य

 2. शब्दज्ञानस्य

 3. भाषणस्य

4. लेखनस्य

उत्तर:- (3) मौखिकी प्रश्नोत्तरी भाषण कौशल के अभ्यास के लिए समीचीन (उचित) है।

 48. तथ्यात्मक-गद्य-पाठस्य काव्यात्मकपाठस्य च मध्ये भेदः मन्यते। काव्यपाठः मुख्यतः सम्बद्धः अस्ति

1. प्रदत्त-सूचनासन्दर्भे वैयक्तिक-व्याख्यया

2. कवेः सन्देशस्य मूल्याङ्कनेन

 3. बौद्धिक-व्याख्यानेन

 4. काव्यस्य मुख्यकथ्य-सन्दर्भे भावाभिव्यक्त्या बौद्धिकाभिव्यक्त्या च

उत्तर:- (4) तथ्यात्मक गद्य पाठ और काव्यात्मक पाठ के बीच भेद माना जाता है। काव्यपाठ मुख्य रूप से कवि के सन्देश मूल्यांकन से सम्बद्ध है।

49. ‘अन्तर्वैयक्तिक-प्रज्ञा’-विकासार्थम् अतीव महत्वपूर्णम् अस्ति

1. काव्यशास्त्रपठनम् ।

2. अन्यभाषासु लिखितसाहित्यस्य पठनम्

 3. परस्परं विचार-विमर्शः

4. नूतनविषयान् अधिकृत्य निबन्धलेखनम्

उत्तर:- (3) आन्तरिक विशिष्ट ज्ञान का विकास तभी सम्भव है जब एक छात्र दूसरे छात्र से परस्पर विचार-विमर्श करता रहे।

 50. सूर्यग्रहणं कदा भविष्यति? अयं प्रश्न:

1. अनुवर्तनशीलवर्तमानकालीयः

2. भूतकालीयः

 3. वर्तमानकालीयः

4. भविष्यत्कालीयः

उत्तर:- (4) सूर्यग्रहणं कदा भविष्यति? यह प्रश्न भविष्य काल का है। इसका तात्पर्य है कि सूर्य ग्रहण कब होगा।

51. निम्नलिखितेषु किं कथनम् असमीचीनम् ?

1. सम्प्रेषणात्मकं शिक्षणं मूलतः उत्पादककौशलयोः, यथा भाषणस्य लेखनस्य च समृद्ध्या सम्बद्धम्।

2. सम्प्रेषणात्मकं शिक्षणं मूलतः व्याख्यान-अभिव्यक्ति द्वारा अर्थस्पष्टीकरणेन सम्बद्धम्।

3. सम्प्रेषणात्मकं शिक्षणं व्यावहारिकजीवने भाषा-प्रयोगं लक्ष्यीकरोति।

 4. सम्प्रेषणात्मकं शिक्षणं मूलतः वर्तन्याः भाषायाः च नियमानां द्वारा शब्दावल्याः व्याकरणनियमानां च शिक्षणेन सम्बद्धम्।

उत्तर:- (4) निम्नलिखित में असमीचीन कथन या असंगत कथन यह है कि सम्प्रेषणात्मक शिक्षक मूलरूप से वर्तनी, भाषा एवं नियमों द्वारा शब्दावली व्याकरण के नियमों एवं शिक्षण से सम्बद्ध है।

52. शब्दजालस्य उपयोगः क्रियते

 1. वैश्विक-अन्तर्जालस्य (WorldaWide-Web) प्रयोगज्ञानार्थम्

 2. सम्यक् पठनज्ञानार्थम्

3. प्रभाविरीत्या शब्दावलीज्ञानार्थम्

4. सम्यक्तया लेखनस्य ज्ञानार्थम्

 उत्तर:- (3) शब्द जाल के उपयोग शब्दावली के ज्ञान के लिए किया जाता है। शब्दावली का ज्ञान बढ़ने पर भाषा समझ का विकास होता है।

 53. उच्चप्राथमिकस्तरे विद्यार्थिषु सम्भाषणकौशलविकासार्थम् अधोलिखितेषु कतमः सर्वाधिकप्रभावकारी उपायः भवेत्?

 1. उत्तमवक्तुः श्रवणम्

 2. नाटकानां पठनम्

 3. कक्षायां चरिताभिनयस्य आयोजनम्

4. सम्पाठस्य अभ्यासः

उत्तर:- (3) उच्च प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों में सम्भाषण कौशल के विकास के लिए कक्षा में चरित अभिनय का आयोजन सर्वाधिक प्रभावकारी होता है।

54. कक्षायां भाषामयवातावरणनिर्माणार्थं शिक्षकः

1. कक्षायां स्वस्वानुभूतिप्रकटनार्थं छात्रान् अवसरं दद्यात्

2. तेषां सम्भाषणकालं प्रदीर्घ कुर्यात्

 3. अपत्यानां सम्यक् पालनार्थम् अभिभावकान् निर्दिशेत्

4. प्रत्येकं छात्रस्य कृते समानं लक्ष्यं स्थापयेत्

 उत्तर:- (1) कक्षा में भाषा से युक्त वातावरण निर्माण हेतु शिक्षक कक्षा में छात्रों के स्वयं के अपने-अपने अनुभव प्रकटन हेतु प्रवीण शिक्षक अवसर प्रदान करता है।

 55. यदा छात्रा:व्याकरणाध्ययनस्य भाषास्वरूपस्य च मध्ये सम्बन्धं प्रदर्शयन्ति तदा ते किं दर्शयन्ति?

1. सम्प्रेषणोद्देश्य विकासप्रक्रियां च

2. व्याकरणाध्ययनम् अत्यधिकं महत्त्वपूर्णम्

 3. सम्प्रेषणार्थं व्याकरणज्ञानम् अनिवार्यम्

4. लेखन-शैली व्याकरणज्ञानेन प्रभाविता भवति

 उत्तर:- (1) जब छात्र व्याकरण अध्ययन के और भाषा स्वरूप के मध्य सम्बन्ध प्रदर्शित करता है तब वे सम्प्रेषण उद्देश्य एवं विकास प्रक्रिया को प्रदर्शित करते हैं।

 56. भाषा-शिक्षण-अधिगम-सन्दर्भ प्रौद्योगिक-उपकरणानाम् एकं विशिष्टं स्थानं दृश्यते। उच्चारण-शिक्षण-प्रक्रियासन्दर्भे किं समीचीनम् उदाहरणं न?

 1. भूमिका निर्वहणम् उच्चारण-प्रदर्शनञ्च

 2. ध्वनि-मुद्रिका-उपयोगः

 3. श्रव्य-दृश्य-प्रस्तुति-द्वारा वर्णनम्

4. श्वेत-फलकस्य प्रयोगः

 उत्तर:- (4) भाषा शिक्षण अधिगम के सन्दर्भ में प्रौद्योगिक उपकरण एक विशिष्ट स्थान रखता है। उच्चारण शिक्षण प्रक्रिया के सन्दर्भ में श्वेत फलक का प्रयोग समीचीन होता है।

57. व्याकरणबोधनस्य श्रेष्ठं विधानम्

1. शब्दरूपसारिणीनां मुखतः उपयोगेन रचनानाम् अभ्यासः

2. उदाहरणद्वारा व्याकरणनियमानां वैयक्तिकीकरणम्

 3. सूत्राणां कण्ठस्थीकरणाय छात्राणां प्रेरणम्

4. दत्तनियमानुसारेण अभ्यासः

उत्तर:- (2) उदाहरण द्वारा व्याकरण नियमों को व्यक्त करना व्याकरण बोध का श्रेष्ठ विधान है। उदाहरण के रूप में कोई बात स्पष्ट करने में सहज बोधता का प्रतिपादन होता है।

 58. ‘शीर्षक-वाक्येन’ अभिप्रायः अस्ति

1. निबन्धस्य मुख्यभावः

 2. काव्यस्य निबन्धस्य वा शीर्षकम्

3. अनुच्छेदस्य प्रमुखः विचार

4. कस्यापि निबन्धस्य प्रलेखस्य वा उपशीर्षकम्

उत्तर:- (3) शीर्षक वाक्य को तभी समझा जा सकता है जब अनुच्छेद के विषय में ज्ञान हो, इसलिए सर्वप्रथम अनुच्छेद के विषय पर विचार किया जाता है, जिसके माध्यम से शीर्षक के विषय में ज्ञात होता है।

59. पठनसमये विसंज्ञायाः (Decoding) अर्थ:?

1. विदेशभाषामवगन्तुम्

 2. IC.T.मध्ये प्रयुक्तक्रियाः।

 3. क्लिष्टसमस्यासमाधानं कर्तुम्

 4. विश्लेषणं कर्तुं अवगन्तुं च

 उत्तर:- (4) पठनसमये (पढ़ने के समय) विसंज्ञाया (Decoding) का अर्थ विश्लेषण करना अर्थात् प्रत्येक शब्द का अलग-अलग ज्ञान प्राप्त करना अर्थात् विश्लेषण करके आगमन विधि द्वारा निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना होता है।

60. पठनसन्दर्भे भावग्रहणं परीक्ष्यते

1. अवरोधनार्थकप्रक्रियाद्वारा सम्भाषणवाक्यानि

 3. टिप्पणिनिर्माणद्वारा

 2. टिप्पणिलेखनद्वारा

 4. सारांशेन

 उत्तर:- (4) पठन के सन्दर्भ में भाव को ग्रहण करने में जो परीक्षण होता है वह सारांश का ही परीक्षण होता है सम्पूर्ण तथ्य को पढ़ने के बाद जो भाव मूल रूप में ग्रहण होता है उसे सारांश कहा जाता है।

61. एकं प्राधिकृत-पाठ्यवस्तु तत् एव

1. यत् कस्मिंश्चित् पाठ्यपुस्तके समावेष्टं शैल्या असमीचीनम्।

 2. यत् व्यावहारिकजीवनस्य प्रकाशनेभ्यः यथा विज्ञापन-सूचना-लेख-इत्यादिभ्यः स्वीक्रियते।

 3. यत् ज्ञानस्य विशिष्टक्षेत्रेभ्यः यथा नृविज्ञान-खगोलशास्त्र इत्यादिभ्यः प्राप्यते।

 4. यत् विविध-नवीन-शब्दावल्या परिपूर्णम् अत्यधिकम् आह्वानिकम्।

उत्तर:- (2) एक प्राधिकृत – पाठ्यवस्तु वही होती है जो व्यावहारिक जीवन का प्रकाशन करे यानि जो व्यावहारिक जीवन के लिए उपयोगी हो जैसे -विज्ञापन – सूचना – लेख इत्यादि को स्वीकार करे वही प्राधिकृत – पाठ्यवस्तु होती है।

 62. निम्नलिखितेषु किं कथनम् असत्यम्? स्वायत्त-शिक्षार्थिनः ते एव ये

 1. स्व-अधिगमनाय स्व-उत्तरदायित्वं स्वीकुर्वन्ति।

 2. अधिगमनार्थ गतिविधीनाम् आयोजनं क्रियान्वयनं च कर्तुम् उद्यताः भवन्ति।

3. अधिगमनस्य एतस्य च प्रभावितायाः च निरन्तरं समीक्षा कुर्वन्ति।

 4. केवलम् अनुमोदित-पुस्तकानि एव स्रोतोरूपेण स्वीकृत्य तेषु प्रदत्त-प्रश्नानाम् उत्तराणि अधिगच्छन्ति पूर्णतया च अभ्यासान् कुर्वन्ति।

उत्तर:- (1) जो छात्र स्वयं से सीखते हैं तथा किसी की सहायता नहीं लेते हैं वे स्वायत्त छात्र होते हैं वे अपने अधिगमन के लिए स्वयं को उत्तरदायी मानते हैं।

 63. काव्य-कक्षायाम् एका अध्यापिका छात्रान् एकं गीतं श्रावयति। तत्पश्चात् ते गीतम् उच्चैः पठन्ति। एतत्पश्चात्, समूहे केचन छात्राः गीतानुसारं नृत्यन्ति, केचन गीतं गायन्ति। अध्यापिका अपि तत् गीतम् अधिकृत्य भावानुसारं चित्राणि रचयितुं प्रेरयति। अध्यापिका एतादृशी पद्धतिं किमर्थम् अनुसरति? ।

 1. प्रत्येकं छात्रः विशिष्टशैल्या पठति। अतः अध्यापिका एतैः विधिभिः अधिगमने छात्रसाहाय्यं करोति।

 2. विभिन्नविधिभिः छात्राः प्रतियोगितार्थं प्रेरिताः भवन्ति। परीक्षायां च तेषां श्रेणी उन्नता भवति।

 3. यदा छात्राः गतिविधिषु व्यस्ताः भवन्ति अध्यापिका अपि विश्रामार्थम् अवकाशं प्राप्नोति।

 4. छात्राः पठनं न इच्छन्ति अतः गतिविधिद्वारा छात्रान् व्यस्तीकर्तुं अध्यापिका साहाय्यं प्राप्नोति।

उत्तर:- (1) काव्य कक्षा में एक अध्यापिका छात्रों से एक गीत सुनती| है। अन्त में वे उच्च स्वर में गीत पढ़ते हैं। तत्पश्चात् समूह में कुछ छात्र गीत की लय के अनुसार नाचते हैं, कुछ गीत को गाते हैं। अध्यापिका उस गीत को अधिकृत्यकर भाव के अनुसार चित्र बनाने को प्रेरित करती हैं अध्यापिका इस प्रकार की पद्धति का अनुसरण इसलिए करती है कि प्रत्येक छात्र विशिष्ट शैली में पढ़ता है। अतः अध्यापिका इस विधि के अधिगमन में छात्र की सहायता करती है।

64. कस्य अधिगमस्य कृते सहविन्यासः (Collocation) एकः उपायः?

1. पठनस्य

 2. लेखनस्य

3. वर्तन्याः

4. शब्दावल्याः

उत्तर:- (4) शब्दावल्य अधिगम करने में सहविन्यास एक उपाय है जिससे समझ विकसित होती है।

 65. उत्तमलेखने एतत् न आगच्छति

1. योग्यपदानां चयनम्

2. केवलम् उत्कृष्टहस्तलेखः

3. व्याकरणगतशुद्धता

 4. विचाराः उपस्थापनञ्च

उत्तर:- (2) उत्तम लेखन में केवल उत्कृष्ट हस्तलेख नहीं आता है जबकि योग्य पदों का लेखन, व्याकरणगत शुद्धता और विचारों का उपस्थापन आता है।

 66. भारतस्य भाषाशिक्षानीतिः ज्ञायते

 1. त्रिभाषासूत्ररूपेण

 2. मातृभाषाशिक्षणरूपेण

3. शिक्षायाः अधिकाररूपेण

4. बहुभाषिकतावादरूपेण

उत्तर:- (1) भारत की भाषा शिक्षा नीति त्रिभाषा सूत्र के रूप में जानी जाती है। त्रिभाषा के अन्तर्गत हिन्दी अंग्रेजी और स्थानीय भाषा सम्मिलित है।

67. अधस्तनेषु कतमः भाषापरिवारः भारते न विराजते? 1. द्रविडः (Dravidian)

2. तिब्बत-बर्मन (Tibeto-Burman)

3. अल्ताईक (Altaic)

 4. इंडो-आर्यन (Indo-Aryan)

 उत्तर:- (3) भारत में दृढ़ एवं परिपक्व भाषा परिवार का विश्लेषण मिलता है जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान की खोज द्वारा सिद्ध किया है। जिसमें से द्रविडः भाषा परिवार मुख्य हैं। प्रश्नानुसार द्रविड, तिब्बत, वर्मन, इंडो-आर्यन ये सभी भारतीय भाषा परिवार के अन्तर्गत आते है। जबकि अल्ताईक भारत के भाषा परिवार के अन्तर्गत नहीं है।

 68. प्रक्रियालेखने (Process writing) बहुविधिस्थितीनां क्रमः

 1. विमर्शः टिप्पणं प्रारूपलेखनं सम्पादनम् अन्तिमलेखनं च (Brainstorming jotting, drafting, editing and finalising)

 2. टिप्पणं सम्पादनं प्रारूपलेखनम् अन्तिमलेखनं च (jotting, editing, drafting and finalising)

3. विमर्शः टिप्पणं सम्पादनं प्रारूपलेखनम् अन्तिमलेखनं च (Brainstorming, jotting, editing, drafting and finalising)

4. टिप्पणं प्रारूपलेखनं सम्पादनम् अन्तिमलेखनं च (jotting, drafting, editing and finalising)

उत्तर:- (1) अनेक प्रकार की स्थितियों में जब प्रक्रिया लेखन का प्रयोग होता है, तब उस समय विमर्श, टिप्पणी, प्रारूप लेखन और अन्तिम लेखन का सम्पादन मुख्य भूमिका निभाता है।

 69. अनेकेभ्यः छात्रेभ्यः लेखनकार्यम् अत्यन्तं जटिलकार्यम्। अतः अस्मिन् सन्दर्भ अध्यापकैः/अध्यापिकाभिः प्रथम कुत्र अवधानं दातव्यम्?

1. रुचि-वर्धनार्थं सरलकार्य प्रति

2. स्पष्ट सम्प्रेषण-क्षमता-विकास-सन्दर्भे आवश्यक-व्याकरण तत्व-अभ्यासं प्रति

3. व्याकरण-सम्बद्ध-अभ्यासान् प्रति

4. आत्मविश्वासम् उत्पादयितुं लक्ष्यभाषा मातृभाषा-प्रयोगं प्रति

उत्तर:- (2) अनेक छात्रों के लिए लेखनकार्य अत्यन्त जटिल होता है। अतः इस सन्दर्भ में अध्यापक को चाहिए कि वह छात्रों को स्पष्ट सम्प्रेक्षण क्षमता के विकास के सन्दर्भ में आवश्यक व्याकरण तत्व का अभ्यास कराये।

 70. कस्यापि लेखस्य मूल्याङ्कनसन्दर्भे लेखस्य कः सः भागः यत्र सम्पूर्णस्य लेखस्य सारांशः पुनरावृत्तिं विना प्राप्यते यत्र च सम्पूर्णमहत्त्वपूर्णाः सूचनाः अपि दृश्यन्ते? 1. मध्यभागः

2. भूमिका

3. निष्कर्षः

4. द्वितीयः अनुच्छेदः

 उत्तर:- (3) किसी लेख के मूल्यांकन के सन्दर्भ में लेख का निष्कर्ष वाला भाग होता है जहां सम्पूर्ण लेख का सारांश एवं सम्पूर्ण महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त होती है।

71. लयः बलाघातः स्वरश्च कस्य गुणाः?

1. शब्देतरभाषायाः

 2. सम्भाषणभाषायाः

 3. लिखितभाषायाः

4. सङ्गीतस्वराणाम्

उत्तर:- (4) स्वर का लय, बलाघात इत्यादि संगीत स्वरों में है।। सम्भाषण भाषा में लय, बलाघात इत्यादि पर ध्यान दिया जाता है।

72. संस्कृतपाठ्यक्रमे संवादलेखस्य मूलोद्देशः अस्ति?

 1. सृजनात्मकक्षमता

 2. गतिलेखनम्

 3. व्याकरणपरिशुद्धता

 4. सम्प्रेषणकौशलानि

 उत्तर:- (1) संस्कृत पाठ्यक्रम में संवाद लेख का जो मूल उद्देश्य होता है वह यह होता है कि इससे सृजनात्मक क्षमता का विकास होता है।

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