CTET संस्कृत Pedagogy GK Question Answer 2022 in Hindi

CTET Sanskrit Pedagogy Important Questions Answer 2022

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ctet संस्कृत शिक्षण शास्त्र प्रैक्टिस सेट 2022

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ctet Sanskrit Pedagogy MCQ gk

CTET Sanskrit Previous Years Question Papers (Hindi)

1. निवेशः (input) ग्रायः भवितुम् अर्हति –

1. यदि सक्रियनिष्यन्दकः अल्पप्रभावी अस्ति तथा प्रवृत्तिः स्वीकारकः अस्ति , तथा प्रेरणा सुदृढ़ा अस्ति ।

2. यदि निषेधात्मकनिष्यन्दकः अल्पप्रभावी अस्ति एवं प्रवृत्तिः स्वीकारकः अस्ति तथा प्रेरणा सुदृढ़ा अस्ति ।

3. यदि छात्रः पठने तथा श्रवणे रुचिं गृह्णाति ।

4. यदि छात्रः शब्दरूम् अवगच्छति तथा तस्य अर्थ ग्रहितुं प्रयतते ।

उत्तर:- (1) निवेश ग्रहण हो सकता है, यदि व्यक्ति सीखने के लिए सक्रिय है, किन्तु कम प्रभावी है तथा यह प्रवृत्ति स्वीकार्य है और प्रेरणा को सुदृढ़ करती है। अर्थात् उसकी सक्रियता उसके कम प्रभावी होते हुए भी उसको सीखने के प्रति प्रेरित करती है और यह प्रवृत्ति स्वीकार्य है। भाषा के अधिग्रहण के लिए निवेश (input) महत्त्वपूर्ण और आवश्यक घटक है।

2. उपभाषा (Dialect) विषये किं कथनं सत्यं नास्ति ?

1. उपभाषा कस्यापि क्षेत्रस्य भाषा-विशेषता अस्ति ।

2. उपभाषा कस्यापि सामाजिकस्य, व्यावसायिकस्य वा समूहस्य भाषा विशेषता अस्ति ।

3. उपभाषा मुख्यभाषायाः एव भागः अस्ति, नवीना भाषा नास्ति ।

4. उपभाषा तस्याः एव भाषापरिवारस्य नवीना भाषा अस्ति ।

उत्तर:- (4) उपभाषा उसी भाषा परिवार की एक नई भाषा है। यह कथन असत्य है। जबकि उपभाषा किसी क्षेत्र की भाषाई विशेषता है। उपभाषा किसी भी सामाजिक, व्यावसायिक या समूह की भाषाई विशेषता है। यह मुख्य भाषा का हिस्सा है और यह कोई नई भाषा नहीं है। ये कथन सही है। किसी क्षेत्र की भाषा के प्रकारों को ‘उपभाषा’ कहा जाता है। जैसे – ब्रजभाषा, हरियाणवी, मारवाड़ी आदि।

3. सप्तमीकक्षायाः अध्यापिका छात्रान् भाषां अध्यापयितुं निम्नलिखितं कार्यं करोति – ‘पेटिकां स्वफलकात् गृहीत्वा माम देहि’। ‘शीघ्र भित्तिं प्रति धावित्वा एनां स्पृश’ | भाषा-अध्यापनस्य अयं विधिः किं कथ्यते ?

1. पूर्ण शारीरिकप्रतिक्रिया

2. परामर्शक (Suggesto paedia)

3. सम्प्रेषणात्मकपद्धतिः

4. निर्माणात्मकता (Constructivism)

उत्तर:- (1) सातवीं कक्षा की अध्यापिका छात्रों को भाषा सिखाने के लिए “पेटी से फल लाकर देने की क्रिया” तथा “जल्दी से दीवार की तरफ दौड़ो और उसे छुओ”| का कार्य करवाती है। भाषा शिक्षण में इस प्रकार की विधि पूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया विधि कहलाती है।

4. काचिद् अध्यापिका स्वकक्षायां निम्नलिखितं पाठं पठति | सा छात्रान् कथयति यत् ते पाठं सावधानतया शृणुयुः, तदा तम् यथानिकटमनुलिखन्तु, न शब्दशः । इयं पद्धतिः किं कथ्यते ? “मानवानां विकासः लक्षाधिकवर्षावधौ सञ्जातः। शरीररचना कीदृशी एव स्यात् परन्तु अयं सामान्य – उत्पादः नास्ति । अयं कठोरवायुमण्डलीय परिस्थितीन् तीतर्वा आगतोऽस्ति । तथा च शुभाशुभकालविशिष्टं पर्यावरणमपि आसीत् । अतः हर्षस्य विषयोऽयं यत् वयं तस्मिन् काले जीवामः यस्मिन् अधिकानि सुखानि सौविध्यानि च उपलब्धानि च सन्ति ” |

1. परिच्छेद-श्रुतलेखः

2. आधार-श्रुतलेखः

3. ऊर्ध्व-अधः प्रक्रिया

4. अधः-ऊर्ध्व प्रक्रिया

 उत्तर:- (3) काचिद् अध्यापिका स्वकक्षायां उपरिलिखितं पाठं पठति। सा छात्रान् कथयति यत् ते पाठं सावधानतया शृणुयुः, तदा तम् यथा निकटमनुलिखन्तु, न शब्दशः। इयं पद्धतिः ‘ऊर्ध्व-अधः प्रक्रिया’ कथ्यते। अर्थात् – कोई अध्यापिका अपनी कक्षा में उपर्युक्त पाठ को पढ़ती हुई छात्रों से कहती हैं कि यदि आप सभी सम्पूर्ण पाठ को सावधान मन से सुनते हैं, तो आप सभी निकट वाची शब्द (समानार्थी) का ज्ञान कर सकेंगे। यह प्रक्रिया ऊर्ध्व-अधः प्रक्रिया के अन्तर्गत आती है। मानव के विकास में एक लाख से अधिक वर्ष व्यतीत हो गए हैं। शरीर रचना किस प्रकार है, यह सामान्य उत्पाद नहीं है। आप कठोर वायुमण्डल में समाहित है। तथा शुभ एवं अशुभ के समय विशिष्ट पर्यावरण में भी स्थिति है। अतः यह खुशी की बात है कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब अधिक आराम और सुविधाएं उपलब्ध हैं

 5. द्वयोः मित्रयोर्मध्ये वार्तालापं पठत तथा वार्तालापस्य उद्देश्यं जानत | राहुलः – हा! त्वं कीदृशोऽसि ? अहं राहुलोऽस्मि । शीला – हा! अहं समीचीना अस्मि । त्वं कीदृशोऽसि । राहुलः – अहमपि सुष्ठु अस्मि । अहं स्वविद्यालये तव स्वागतं करोमि । शीला – अहं प्रसन्ना अस्मि तथा अत्रागत्य प्रोत्साहिता अस्मि |

 1. व्यक्तिगतम् संभाषणम्

 2. सूचनात्मकं उद्देश्यम्

3. व्यवहारीयं उद्देश्यम्

 4. परस्परं सम्पर्कीयम् उद्देश्यम्

उत्तर:- (4) दो मित्रों के बीच की बातचीत को पढ़ें और बातचीत के उद्देश्य का पता लगाएं। राहुल:- हा! (प्रसन्नता का सूचक शब्द) तुम कैसी हो? मैं राहल हूँ। शीला- हा! मैं ठीक हूँ। तुम कैसे हो? राहुल:- मैं भी ठीक हूँ। मैं अपने विद्यालय में तुम्हारा स्वागत करता हूँ। शीला- मैं प्रसन्न हूँ, और यहाँ आकर उत्साहित हूँ। इस वार्तालाप का उद्देश्य समाज में परस्पर सम्पर्क कायम करना है। इस वार्तालाप का उद्देश्य समाज में परस्पर सम्पर्क कायम करना है।

 6. “व्याकरणरूपाणां ज्ञानम्, तेषां प्रकरणेषु प्रयोगः” कथ्यते 

 1. व्याकरणस्य व्याख्यानात्मकं ज्ञानम्

 2. व्याकरणस्य प्रक्रियात्मकं ज्ञानम्

 3. प्रकरणे प्रयुक्तं व्याकरणम्

 4. व्याकरणस्य विषयज्ञानम्

उत्तर:- (2) व्याकरण के अन्तर्गत रूपों का ज्ञान तथा उनका प्रयोग करना व्याकरण प्रक्रियात्मक ज्ञान कहलाता है। इस क्रिया में छात्रों को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि किसी क्रिया को सही तरीके से कैसे किया जाए या किस कौशल का प्रयोग किया जाए ? यह प्रक्रियात्मक ज्ञान व्याकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 7. अष्टमीकक्षायाः अध्यापकः रॉयकुमारः वाच्यानि, लकारान्, च अध्यापयितुं व्याकरणपाठस्य योजना निर्माति । स सर्वप्रथमं छात्रान् कथा /पाठं पठितुं प्रेरयति यत्र कर्तृवाच्यस्य कर्मवाच्यस्य च रूपाणि बहुलतया प्रयुज्यन्ते । स अन्यैः उदाहरणैः सह एकस्मिन् वाक्ये तेषां विषये विमर्श करोति । तदा स तेषाम् प्रयोगान् प्रति छात्राणां ध्यान आकर्षयति । इयं पद्धतिः का कथ्यते? .

 1. वर्तमान-अभ्यास-उत्पादः

 2. कर्तृवाच्यम् तथा कर्मवाच्यम्

3. चेतना-उत्तेजनम् ___

4. परीक्षामाध्यमेन व्याकरणम्

 उत्तर:- (3) आठवीं कक्षा में अध्यापक राय कुमार वाच्यों और लकारों को पढ़ाने के लिए योजना का निर्माण करते हैं। वे सर्वप्रथम छात्रों को कहानी/पाठ को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए, जहाँ पर कर्तृवाच्य और शब्द रूपों का प्रयोग अधिक हो। उन उदाहरणों की सहायता से उस विषय पर विचार-विमर्श करते हुए एवं उसका प्रयोग के प्रति छात्रों का ध्यान आकर्षित करते हैं। ये पद्धति (चेतनाउत्तेजना) कही जाती है।

8. निम्नलिखितेषु किं संस्थागतलेखने आयाति ?

 1. शोध-पुनर्विवेचनम्

 2. व्यक्तिवृत्तम् (A Resume)

 3. कार्यालयीय पत्रम्

4. शोकसन्देशः

उत्तर:- (4) उपरिलिखितेषु शोकसन्देशः संस्थागतलेखने आयाति। अर्थात्- उपर्युक्त लिखे गए शोक सन्देश संस्थागत लेखन के अन्तर्गत आता है। जबकि व्यक्तिवृत्त एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसका उपयोग एक व्यक्ति द्वारा अपना बैकग्राउंड, कौशल तथा प्राप्तियों को दर्शाने के लिए बनाया जाता है। इसे कई कारणों से बनाया जाता है। सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि इसमें किसी व्यक्ति की उपलब्धियों का विवरण होता है। कार्यालयी पत्र वे पत्र होते हैं जो कार्यालय या व्यवसाय के कुशलकार्य संचालन हेतु लिखे जाते हैं। ये पत्र कार्यालय में सामान्यतः एक उच्चाधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थों को अथवा अधीनस्थों द्वारा उच्चाधिकारी को लिखे जाते

 9. प्रतीकभाषा (sign language) सन्दर्भ किं कथनं सत्यम् ?

1. प्रतीकभाषायाः व्याकरणं भवति ।

2. प्रतीकभाषायाः व्याकरणं न भवति ।

 3. प्रतीकभाषायां सङ्केतसमूहाः भवन्ति ।

 4. प्रतीकभाषा स्वाभाविकी न भवति ।

 उत्तर:- (1) प्रतीकभाषा के सन्दर्भ में यह कथन सत्य है कि प्रतीक भाषा का सम्बन्ध व्याकरण से होता है। भाषा में प्रतीक (चिह्न) का अर्थ है-ठहराव, विश्राम, रूकना।

 10. निम्नलिखितेषु किं काव्यपाठनस्य उद्देश्यं न भवति ?

1. काव्यसमीक्षा एवं मनोरञ्जनम् ।

 2. व्याकरणशिक्षणम् शब्दनिर्माणम् ।

 3. सामाजिक-सांस्कृतिकपक्षाणाम् ज्ञानम् ।

 4. काव्यसमीक्षातत्त्वानां ज्ञानम् ।

 उत्तर:- (2) काव्य को पढ़ने का उद्देश्य व्याकरण शिक्षण तथा शब्द निर्माण नहीं होता है। बल्कि काव्य पढ़ने का उद्देश्य काव्य में निहित (रस, छन्द और अलंकार) का ज्ञान, सामाजिक सांस्कृतिक पक्षों का ज्ञान तथा काव्य समीक्षा एवं मनोरंजन को प्राप्त करना काव्य का उद्देश्य रहता है।

11. निम्नलिखितेषु अध्ययन-योग्यता काऽस्ति ?

 1. टिप्पणीलेखनाय, पाठसारनिर्माणाय पठनम् |

 2. मनोरञ्जनाय अन्यैश्च सहभागाय पठनम् ।

3. अभिरुचये समाचारपत्रपठनम् |

 4. लघुकथापठनम् तदनु विमर्शश्च |

उत्तर:- (1) अध्ययन-योग्यता में टिप्पणी लेखन तथा पाठसार (पाठ का सारांश) का निर्माण व पठन अध्ययन की योग्यता माना गया है।

 12. निम्नलिखितेषु का सामाग्री प्रामाणिका नास्ति ?

1. समाचारपत्रस्य वायुमण्डलीय प्रतिवेदनम् ।

2. आगन्तुक वासगृह (Hotel) आहारसूची ।

 3. पत्रिकायां विज्ञापनम् ।

 4. पाठ्यपुस्तकलेखकस्य पाठ्यपुस्तकम् ।

उत्तर:- (4) पाठ्यपुस्तक लेखक की पाठ्यपुस्तक सामग्री प्रमाणिक नहीं मानी गयी है। बल्कि समाचारपत्र के वायुमण्डलीय प्रतिवेदन, आगन्तुक वासगृह की आहार सूची और पत्रिका में स्थित विज्ञापन प्रामाणिक सामाग्री है।

13. मूल्याङ्कन-उद्देश्यसन्दर्भे निम्नलिखितेषु किं कथनं सत्यम् ?

 a. विशिष्टकालावधौ छात्रैः उपलब्धाः योग्यताः सक्षमताश्च ।

 b. सहपाठिनां सापेक्षतया छात्राणां शिक्षण-सूचना ।

_c. स्वकक्षायां अन्यैः छात्रैः सह प्रतियोगितायै प्रेरणम् ।

 d. वर्षान्ते छात्राणाम् व्याकरणात्मकप्रवाहविषये अध्यापकाय सूचनम् ।

1.a तथा b सत्ये स्तः ।

2. C तथा d सत्ये स्तः।

 3. b तथा c सत्ये स्तः।

4. d तथा a सत्ये स्तः।

उत्तर:- (1) मूल्यांकन के उद्देश्य के सन्दर्भ में एक विशिष्ट अवधि में छात्रों द्वारा अर्जित योग्यता और दक्षता। तथा सहपाठियों के साथ छात्रों द्वारा शिक्षण की सूचना प्रदान करना। ये कथन सत्य है।

14. काचिद् अध्यापिका स्वकक्षायां एवं करोति । सा स्वछात्रान् स्वग्रामेषु नगरेषु वा जलप्राप्तेः साधनानि प्रयोगान् च विषये ज्ञातुं कथयति। तत्पश्चात् सा तान् प्रतिवेदनम् सज्जीकर्तुं कथयति । सा जलविषये कथाः अपि तेषामेव भाषायां पठितुं कथयति । छात्राः प्रतिवेदनानि प्रस्तुवन्ति तथा सहपाठिभिः सह विमर्श कुर्वन्ति । इयं क्रिया किं कथ्यते ?

1. दत्तकार्यम्

2. पर्यावरणीय-वैज्ञानिकक्रिया

3. प्रायोजना कार्यम्

 4. शिक्षणक्रिया

उत्तर:- (3) कोई अध्यापिका अपनी कक्षा में अपने छात्रों को ग्रामों और नगरों के जल प्राप्ति के साधनों तथा उसका प्रयोग के बारे में बताती हैं, तथा छात्रों को जल के विषय में और अधिक पढ़कर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर, आपस में विचार-विमर्श करने की क्रिया करना प्रयोजना कार्य कहलाता है। इस क्रिया का दूसरा नाम प्रोजेक्ट वर्क भी है।

 15. भाषाकक्षायां साहित्यस्य अतिरिक्तः उद्देश्यं किमस्ति ?

1. शब्दकोशस्य व्याकरणस्य च वृद्धिः ।

 2. शब्दानां वाचनस्य योग्यतायाः विकासः |

3. प्रक्रियारूपेण उच्चस्वरैः पठनस्य प्रोत्साहनम् । ।

 4. ज्ञानस्य, रचनात्मकतायाः तथा समीक्षात्मकचिन्तनस्य विकासः |

उत्तर:- (4) भाषा कक्षा में साहित्य के अलावा ज्ञान, रचनात्मकता और समीक्षात्मक चिन्तन का विकास करना भी भाषा शिक्षण के उद्देश्य है।

16. सामाजिक-उपभाषा अस्ति 

 1. कस्मिंश्चिद् राज्ये देशे वा मुख्यभाषायाः उपभाषा ।

2. कस्यचिद् क्षेत्रस्य अथवा समाजस्य भाषा यस्याः लिपिः वर्तते ।

 3. कस्यचित् क्षेत्रस्य लिखितभाषायाः साहित्यस्य वा विशेषता |

4. भाषान्तर्गते कस्यापि समुदायस्य अथवा समूहस्य भाषायाः विशेषताः।

उत्तर:- (4) सामाजिक उपभाषा भाषा के अन्तर्गत किसी समुदाय या समूह के भाषा की विशेषता है। उपभाषा (Dialect) किसी भाषा का ही एक विशेष रूप होता है। हिन्दी भाषा की कुछ उपभाषाएँ – राजस्थानी, हरियाणवी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, अवधी, ब्रजभाषा, भोजपुरी आदि।

17. प्रतीकभाषायाः सन्दर्भ निम्नलिखितेषु किं कथनं सत्यं नास्ति ?

 1. प्रतीकभाषा स्वाभाविकी भाषा अस्ति ।

2. प्रतीकभाषायाः व्याकरणं भवति ।

3. प्रतीकभाषायाः व्याकरणं नास्ति ।

 4. प्रतीकभाषायाः प्रकाराः भवन्ति ।

 उत्तर:- (3) प्रतीकभाषा के सन्दर्भ में, प्रतीक भाषा में व्याकरण नहीं होता है। यह कथन सत्य नहीं है। बाकी सभी कथन सत्य है।

18. निम्नलिखितेषु का प्राचीनसांस्कृतिक (classical) भाषा नास्ति 

 1. ओडिया

 2. तमिल

3. मलयालम

 4. हिंदी

उत्तर:- (4) हिन्दी प्राचीन सांस्कृतिक भाषा नहीं है। बल्कि ओडिया (उड़िया), तमिल और मलयालम प्राचीन सांस्कृतिक भाषा के अन्तर्गत आते हैं।

19. शैरली माध्यमिकस्तरस्य आङ्ग्लभाषायाः शिक्षिका अस्ति । सा स्वछात्रान् षड्वाक्यानां पाठं द्विवारं श्रोतुं कथयति । तदा सा तान् पाठस्य सारं पञ्च,षड् वाक्येषु लेखितुम् कथयति | वाक्यानि अक्षरशः मूलपाठवद् न स्युः। इदं किम् कथ्यते ?

 1. श्रुतलेखः

2. वाक्यश्रुतलेखः

3. अनुच्छेद-श्रुतलेख

 4. व्याकरण-श्रुतलेखः

उत्तर:- (3) शर्ली माध्यमिक स्तर पर अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। वह अपने छात्रों से छह-वाक्य वाले पाठ को दोबारा सुनने के लिए कहती है। फिर वह उन्हें पाठ का सार पाँच या छह वाक्यों में लिखने के लिए कहती है। इस क्रिया को अनुच्छेद-श्रुतलेख कहा जाता है। श्रुतलेख वह कौशल है, जिसमें किसी सामग्री को सुनकर उसका लेखन किया जाता है।

 20. निम्नलिखितेषु किं भाषाशिक्षायाः अवधारणा नास्ति 

 1. अवबोध्य-निवेशः

 2. भाषाशिक्षणस्य कार्यम्

 3. निवेश-उपकरणनानि

 4. प्रतिपुष्टिः

उत्तर:- (3) निवेश-उपकरण भाषा शिक्षा की अवधारणा नहीं है। बल्कि अवबोध्य-निवेश, भाषा शिक्षण के कार्य और प्रतिपुष्टि भाषा शिक्षण के अवधारणा माने गए हैं।

 21. भाषा – अधिग्रहणम् अस्ति

 1. सचेतनम् तथा सप्रयासम्

3. स्वाभाविकं तथा अवचेतनम्

 2. स्वाभाविकं तथा सप्रयासम्

 4. भाषा-प्रक्रिया

 उत्तर:- (3) भाषा अधिग्रहण स्वाभाविक तथा अवचेतन है।

22. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रतिपादयति यत् 

1. सर्वासां भाषाणां कृते विषयशिक्षणाय च मातृभाषा अनिवार्या अस्ति।

 2. आधारभूत-स्तरात् विद्यालयीयशिक्षार्थम् आङ्ग्लभाषामाध्यमम्

3. त्रिभाषासूत्रान्तर्गते वैदेशिकीभाषायाः अध्ययनम् ।।

 4. त्रिभाषासूत्रान्तर्गते प्राचीनसांस्कृतिक भाषायाः अध्यननम् ।

उत्तर:- (1) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यह प्रतिपादित करती है कि मातृभाषा सभी भाषाओं के विषय सिखने के लिए आवश्यक है। 0

23. लेखनस्य उत्पादनपद्धतिसन्दर्भे निम्नलिखितेषु किं कथनं सत्यम् अस्ति 

 1. एकवारं अभ्यासरूपे लेखनम्

2. प्रक्रियारूपे लेखनम्

3. प्रथमावस्थायाः द्वितीयावस्थां प्रतिगमनरूपे लेखनम्

 4. लेखने हस्तलेखविषयाः

 उत्तर:- (1) लेखन की उत्पादन पद्धति के संबंध में एक बार अभ्यास के रूप में लिखना ये कथन सत्य है बाकी सभी कथन असत्य है।

 24. व्याकरणस्य अध्ययन-अध्यापने चेतना-उत्तेजना (consciousness raising) किम् अस्ति ?

 1. पृथक् रूपेण व्याकरणविषयस्य अध्यापनं तथा छात्रैः अभ्यासः तथा सोद्देश्यः प्रयोगः।

 2. स्थानानन्तर अभ्यासरूपेण व्याकरणस्य अध्ययनम् ।

 3. पृथक्वाक्येषु व्याकरणस्य अध्ययन तथा नियमानां कण्ठस्थीकरणम्।

4. प्रकरणानुसारं व्याकरणस्य अध्यापनम् यत्र छात्राः विषयम् अवलोक्य व्याकरण-नियमानां अन्वेषणम् कुर्वन्ति ।

उत्तर:- (4) प्रकरण के अनुसार व्याकरण के अध्यापन में जब छात्र विषय को देखकर व्याकरण के नियमों का पता लगाते हैं। तो यह प्रक्रिया अध्ययन अध्यापन में चेतना -उत्तेजना (Consciousness raising) है।

25. निम्नलिखितेषु किं प्रामाणिकसामग्रीरूपेण न स्वीक्रियते 

1. समाचारपत्रात् व्यंग्यचित्रम्

2. पत्रिकायाम् समाचारपत्रम्

 3. प्रसिद्धलेखकस्य लघुकथा

4. पाठयपुस्तकलेखकेन जलवायुपरिवर्तने लिखितः लेख:

 उत्तर:- (4) जलवायु परिवर्तन पर पाठ्यपुस्तक के लेखक द्वारा लिखा गया एक लेख प्रामाणिक सामग्री के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है। बल्कि समाचार पत्र से व्यंग्यचित्र, पत्रिका में समाचार पत्र तथा प्रसिद्ध लेखक की लघु कथा के रूप में स्वीकार किया गया है।

 26. निम्नलिखितेषु का अध्ययनयोग्यता अस्ति ?

1. समाचारवार्तायाः श्रवणम् यत् पश्चात् मित्रैः सह विमृश्येत्।

2. वैज्ञानिक-अन्वेषणविषये पाठं पठन् टिप्पणीलेखनम् |

 3. परिपृच्छा-आधारितशिक्षणविषये प्रस्तुतेः सज्जीकरणम्

4. कक्षायां कान्यपि कार्याणि कुर्वन् चिन्तनम् ।

 उत्तर:- (2) वैज्ञानिक खोजों के बारे में पाठ पढ़ते समय टिप्पणी लिखना अध्ययन करने योग्य है।

27. व्याकरणशिक्षणस्य विषये किं कथनं सत्यम् ?

1. छात्रः शब्दरूपात् अर्थं प्रति गच्छति ।

 2. प्रथमं व्याकरणनियमाः शिक्षितव्याः |

3. छात्रः अर्थात् प्रयोगाच्च शब्दरूपं प्रति गच्छति ।

 4. व्याकरणशिक्षणम् वस्तुविषयस्य शिक्षणस्य समानं भवति ।

उत्तर:- (3) छात्र अर्थ से उपयोग की ओर शब्द रूप की ओर बढ़ता है। व्याकरण पढ़ाने के बारे में ये कथन सही है।

28. कश्चिद् अध्यापकः पाठ्यपुस्तकाधारितं निम्नलिखितं प्रश्नं पृच्छति । अस्य प्रश्नस्य कः प्रकारोऽस्ति ? मन्यताम् यत् त्वम् कथायां दर्शकः असि । तस्मिन् दिने स्वानुभावं स्मरन् संध्याकाले दैनिकी लिखत 

1. वर्णनात्मक-प्रश्नः

2. बहिर्वेशन-प्रश्नः

3. विवेचनात्मक-प्रश्नः (Discusive)

4. विश्लेषणात्मक-प्रश्नः

उत्तर:- (2) कोई शिक्षक पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्न पूछता है। यह प्रश्न किस प्रकार का मानो कि आप कहानी में एक दर्शक हैं। उस दिन की अपनी भावनाओं को याद करते हुए शाम को अपनी डायरी में लिखे। यह प्रश्न का स्वरूप बर्हिवेशन प्रश्न के अन्तर्गत आता है।

29. कश्चिद् अध्यापकः दैनिकव्यवहारस्य पञ्चशब्दान् ददाति । प्रत्येक शब्दस्य न्यूनतमं पञ्च शब्दमित्राणि भवितव्यानि | शब्दावलीशिक्षणस्य इयं का पद्धतिः ?

 1. शब्दजालम्

 2. विन्यासः

3. शब्दनिर्माणम्

4. शब्दकोशीय खण्डाः

उत्तर:- (2) कोई अध्यापक अपने छात्रों को दैनिक व्यवहार के पाँच शब्द देते हैं। प्रत्येक शब्द मित्रों से सम्बन्धित है। शब्दावली शिक्षण की यह पद्धति विन्यास के अन्तर्गत है।

30. काव्यस्य प्रयोजनमस्ति 

 1. व्याकरणशिक्षणम्

3. मनोरञ्जनं समीक्षा च

2. शब्दभाण्डारः

4. लेखनम् तथा तर्कपूर्णम्

उत्तर:- (3) काव्य का प्रमुख प्रयोजन मनोरंजन और समीक्षा होता है। काव्य के आधार पर हमें जो प्राप्त होता है, उसे ही साहित्य की भाषा में प्रयोजन कहा जाता है।

31. विद्यालयीयशिक्षणे बहुभाषावादः अस्ति

1. अनेक भाषाणाम् अधिगमः |

 2. अध्ययनध्यापनसमये शिक्षार्थिनां भाषाणाम् उपयोगः ।

3. शिक्षागतभाषानीतिः।

 4. सर्वेषां शिक्षार्थिनां भाषाणाम् अध्यापनम् ।

 उत्तर:- (2) सीखने और सिखाने के समय शिक्षार्थियों की भाषाओं का प्रयोग। स्कूली शिक्षा में बहुभाषावाद कहलाता है।

 32. लेखनस्य प्रक्रियोपागमः (Process approach to writing ) इत्यस्य कीदृशाः स्तराः भवेयुः ?

1- (i) रूपरेखालेखनम् (outlining), (ii) प्रथमप्रारूपलेखनम् (writing first draft), (iii) अन्तिमप्रारूप लेखनम् (writing the final draft)

 2- (i) विचाराणां सङ्ग्रहः (gathering ideas), (ii) सम्पादनम् (editing), (iii) प्रारूपनिर्माणम् (drafting), (iv) अन्तिमप्रारूपलेखनम् (writing the final drafts)

3- (i) रूपरेखालेखनम्(outlining), (ii) प्रारूपनिर्माणम् (drafting), (iii) सम्पादनम् (editing), (iv) अन्तिमप्रारूपलेखनम् (writing the final draft)

4- (i) योजना(planning), (ii) प्रारूपनिर्माणम् (drafting), (iii) पुनःप्रारूपनिर्माणम् (iii) सम्पादनम् (editing) अन्तिमलेखलेखनम् (writing the final write up)

 उत्तर:- (3) लेखन प्रक्रिया के उपागम के स्तर है – रूप रेखा लेखन, प्रारूप निर्माण सम्पादन और अन्तिम प्रारूप लेखन।

33. बोधगम्य प्रविष्टिः (comprensible input) इत्यस्य आशयः अस्ति 

1. शिक्षार्थिनां प्रभुत्वस्तरात् किञ्चित् ऊर्ध्वम् अर्थपूर्णरीत्या मौखिकभाषायाः लिखितभाषायाः च अवसरप्रदानम् ।

 2. शिक्षार्थिनां बोधस्तरानुसारं मौखिकलिखितभाषायाः अवसरप्रदानम् |

 3. शिक्षार्थिनां बोधस्तरात् निम्नस्तरीयमौखिकलिखितभाषायाः अवसरप्रदानम् ।

 4. शिक्षार्थिनां ज्ञानस्तरानुकूलम् भाषायाः अवसरप्रदानम् ।

 उत्तर:- (1) बोधगम्य प्रविष्टि का आशय है कि शिक्षार्थियों को उनकी क्षमता के स्तर के अनुसार अर्थपूर्ण दृष्टि से मौखिक और लिखित भाषा का समुचित अवसर प्रदान करना । इस प्रकार की क्रिया से छात्र अपने विचारों का आदान-प्रदान सुगमतापूर्वक करते हैं।

34. षष्ठकक्षायां शिक्षकः शब्दज्ञानं कारयितुं सम्भाषणगतिविधिकृते चर्चा च कारयितुं कक्षायां बहूनि वस्तूनि आनयति । भाषाध्यापनसन्दर्भ तानि वस्तूनि केन नाम्ना जायन्ते

 1. क्रीडकनानि (Toys)

3. अधिगमोपकरणानि

 2. अध्यापनवस्तूनि

4. रियलिया (Rialia)

उत्तर:- (4) छठी कक्षा में शिक्षक के द्वारा छात्रों को शब्दज्ञान करवाने और वार्तालाप में गति प्रदान करने के लिए अनेक प्रकार के वस्तुओं (उपकरणों) को कक्षा में लेकर आना, भाषा अध्यापन के सन्दर्भ में उन वस्तुओं को ‘रियलिया’ के नाम से जाना जाता है। सीखी गई सामग्री और पाठ के उद्देश्य के बीच स्पर्श और बहुआयामी सम्बन्ध की अनुमति देकर शिक्षार्थियों को पाठ के मुख्य केन्द्र बिन्दु से जोड़ने के लिए रियलिया (Rialia) का प्रयोग किया जाता है।

 35. ग्रहणकशब्दज्ञानम् ( Receptive vocabulary) कान् शब्दान् समावेशयति ?

 1. श्रवणमात्रेण, पाठमात्रेण वा अभिज्ञातान् शब्दान् ।

 2. सम्भाषणकाले, लेखनकाले वा प्रयुक्तान् शब्दान् ।

 3. पाठस्य पठनात् पूर्वम् अस्माभिः ज्ञातार्थान् शब्दान् ।

4. अस्पष्टार्थान् शब्दान् ।

उत्तर:- (1) ग्रहणशील शब्दज्ञान में सुनने तथा पाठ में आए हुए शब्दों के जानने से ही बालक में अधिक से अधिक शब्दों को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त होती है।

 36. श्रीनगरे काचित छात्रा मलयालयमभाषां तृतीयभाषारूपेण अधीते । कक्षायां परस्परं सम्पर्कमाध्यमेन सा एकस्मिन् वर्षे एनां भाषां भाषितुं पठितुं च शक्नोति । एतत् किं कथ्यते ?

 1. भाषा  अधिगमः

 2. भाषा  प्राप्तिः

 3. भाषा वृद्धिः (Addition)

 4. ऋणात्मिका द्विभाषीयता

 उत्तर:- (1) श्रीनगर में स्थित कोई छात्र तृतीयभाषा के रूप में मलयालम भाषा पढ़ता है। इस पढ़ने की क्रिया से कक्षा में छात्र परस्पर सम्पर्क माध्यम के द्वारा भाषा सीखने व पढ़ने में सक्षम हो जायेगा। इस क्रिया को भाषा अधिगम कहते हैं। हु

37. छात्राः लेखनस्य बहुभ्यः स्तरेभ्यः गच्छन्ति । लेखनं प्रति एषा अवधारणा किं कथ्यते ?

1. उत्पादन-अवधारणा (Product Approach)

2. प्रक्रिया-अवधारणा (Process Approach)

3. परिच्छेद-श्रुतलेख (Paragraph Dictation)

4. व्यक्तिपरक-अवधारणा (Personal Writing)

उत्तर:- (2) छात्र लेखन के कई स्तरों से गुजरते हैं। लेखन के प्रति इस अवधारणा को प्रक्रिया अवधारणा (Process Approach) कहा जाता है।

38. काव्यस्य अध्ययन-अध्यापनस्य मुख्यप्रयोजनम् अस्ति 

 1. रसास्वादन मूल्याङ्कनम् च

2. काव्यलेखनस्य प्रतिभाविकासः

 3. भाषा-शिक्षणम्

 4. शब्दसङ्ग्रहस्य व्याकरणस्य च ज्ञानम्

 उत्तर:- (1) काव्य को पढ़ने-पढ़ाने का मुख्य प्रयोजन कविता में निहित तत्वों (रस, छन्द और अलंकार) का रसास्वादन प्राप्त करना होता है।

 39. प्रामाणिकं पाठ्यं (Text) अस्ति 

 1. तत् पाठ्यं कथनं यत् पाठ्यपुस्तकलेखकैः लिखितम् ।

 2. संदर्भानुसारं मौलिकपाठ्यम् ।

3. मौलिकपाठात् पूर्णतया परिवर्तितं संशोधितं च |

4. दत्तकार्यरूपेण छात्रैः,कथाभिः,चित्रैश्च अलङ्कृतम् |

उत्तर:- (2) संदर्भ के अनुसार मूल पाठ प्रामाणिक पाठ है।

40. मूल – अन्तरवैयक्तिकसंप्रेषणकौशलम् अस्ति – (BICS)

 1. सूक्ष्म (Abstract) विचाराणां सम्प्रेषणार्थं भाषा

2. युवछात्रैः संवादार्थं भाषा।

3. अत्रैव – अधुनैव (तात्कालिक)

 4. संवादयोग्या भाषाशिक्षणम्

उत्तर:- (3) मूल – अन्तर वैयक्तिक संप्रेषण कौशल (BICS) तात्कालिक रूपों में है।

 41. भाषामूल्याङ्कनस्य प्रयोजनम् अस्ति 

1. छात्राणाम् उपलब्धेः मापनम् ।

2. छात्राणाम् स्वकक्षायां स्थाननिर्धारणम् ।

3. तेषां सम्पूर्णायाः सङ्कलितायाः च उपलब्धेः मापनम् ।

 4. छात्राणां भाषादक्षतायाः मापनम् ।

 उत्तर:- (4) भाषा मूल्यांकन का प्रयोजन छात्रों में भाषादक्षता का मापन है। भाषा की कक्षा में मूल्यांकन का प्रयोजन है कि भाषा की समझ, विभिन्न सन्दर्भो में भाषा को उपयोग करने की क्षमता एवं सौन्दर्यपरक पहलू परख सकने की क्षमता का मापन।

42. पठनक्रमे एकः छात्रः कानिचिद् अनुबोधनानि (Prompts) गृह्णाति यतः अर्थबोधनं सुकरं भवति एतत् किं कथ्यते ?

 1. द्रुतपठनम् (Skimming)

2. लयबद्धपठनम् (Scanning)

3. अर्थसङ्केतकानि (Semantic cues)

 4. सूत्र-सङ्केतकानि (Formulaic cues)

उत्तर:- (3) पढ़ने के दौरान, एक छात्र अर्थ को समझने की कोशिश करता है इस क्रिया को अर्थ संकेत क्रिया कहते हैं। पढ़ने की प्रक्रिया में इस क्रिया का उपयोग सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है।

43. सीमित-अवबोधबलेन विदयार्थी पाठं पठितुं शक्नोति, स्वभातः साहाय्येन सः पाठं सम्यक्-रीत्या पठितुं, तदाधारितं अवबोधकार्यं च कर्तुं शक्नोति, पठनशिक्षणयोः एषा पद्धतिः कथ्यते – 1. कोचिंग (Coaching)

 2. ट्युटरिंग (Tutoring)

 3. पृष्ठाश्रयम् (Scaffolding)

4. निवेश परिकल्पना (Input Hypothesis)

 उत्तर:- (3) सीमित समझ शक्ति के साथ, छात्र पाठ पढ़ सकता है, अपने भाई की मदद से वह पाठ को सही तरीके से पढ़ सकता है और उसके आधार पर समझ का कार्य कर सकता है, पठन पाठन में यह विधि पृष्ठाश्रय (Scaffolding) कहलाती है। इस क्रिया के प्रवर्तक वायगोत्सकी महोदय माने जाते

 44. रचनावाद (Constructivism) शिक्षण सिद्धान्तरूपेण मन्यते 

 1. बालाः नवज्ञानं अर्जनं कुर्वन्ति कक्षाशिक्षणमाध्यमेन |

 2. संरचितप्रविधिमाध्यमेन भाषा शिक्ष्यते ।

 3. एकेन एव विधिना सर्वे छात्राः शिक्ष्यन्ते ।

 4. बालाः पूर्वज्ञानसंयोगेन शिक्षयन्ति ।

उत्तर:- (4) रचनावाद शिक्षण सिद्धान्त बालकों के पूर्वज्ञान की क्रिया पर आधारित माना गया है। इस सिद्धान्त के जनक स्विस मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे को माना जाता है। 45. राष्ट्रीय-शिक्षा-नीति अधोलिखितेषु कासां भाषाणाम् अध्ययनं समर्थयति ?

 1. संस्कृत-हिंदी-आङ्ग्लभाषा-आधुनिकभारतीयभाषाःच।

2. मातृभाषा-आङ्ग्लभाषा-प्रान्तभाषा-संस्कृत-पाली-प्राकृत जनजातीय-लघुभाषा च।

 3. विद्यालयीयशिक्षापर्यन्तम् आङ्ग्लभाषां शिक्षणमाध्यमम् एव स्वीकरणम्

 4. मातृभाषा गृहभाषा,श्रेण्यभाषा,आधुनिकभारतीयभाषा वैदेशिकीभाषा च।

उत्तर:- (4) राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा/गृहभाषा, श्रेणीभाषा, आधुनिक भारतीय भाषा और विदेशी भाषा के अध्ययन का समर्थन करती है।

46. अष्टवर्षीयः एकः बालः स्वमातापितृभ्याम् सह बिहारराज्याद् आगत्य मुम्बईनगर्यां प्रतिवसति, सः विद्यालये हिंदी-संस्कृत-आङ्ग्लभाषा: शिक्षते, सः स्वप्रतिवेशकेभ्यः विद्यालयस्थमित्रेभ्यः च मराठी भाषां च सुष्टुप्रकारं शिक्षते। मराठीभाषायाः शिक्षणम् कस्य उदाहरणं अस्ति ?

1. भाषाग्रहणं (Language Acquisition)

2. भाषाशिक्षणम्

3. पृष्ठाश्रयम् (Scaffolding)

 4. निवेश-परिकल्पना(Input Hypothesis)

उत्तर:- (1) बिहार से अपने माता-पिता के साथ मुंबई आया आठ साल का लड़का स्कूल में हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी सीखता है और अपने पड़ोसियों और स्कूल के दोस्तों से धाराप्रवाह मराठी सीखता है। मराठी सीखना ‘भाषा अधिग्रहण’ है।

47. पठनक्रमे एकः छात्रः कानिचिद् अनुबोधनानि (Prompts) गृह्णाति यतः अर्थबोधनं सुकरं भवति एतत् किं कथ्यते ?

 1. द्रुतपठनम् (Skimming)

 2. लयबद्धपठनम् (Scanning)

3. अर्थसङ्केतकानि (Semantic cues)

 4. सूत्र-सङ्केतकानि (Formulaic cues) P

उत्तर:- (3) पढ़ने के दौरान, एक छात्र अर्थ को समझने में आसान बनाने के लिए कुछ संकेत ग्रहण करता है। इसे अर्थ संकेतक (Semantic cues) कहते हैं।

48. श्रवणस्य कस्यचिद् प्रक्रियायां मुख्यभावग्रहणं,पूर्वानुमान-करणं, तथ्य निगमनं, सारांशपादनं च समाविष्टाः ?

 1. उपरिगामिश्रवणप्रक्रिया (Bottom Up Listening Processes)

 2. सूचनार्थं श्रवणम् (Listening For Information)

 3. अधोगामिश्रवणप्रक्रिया (Top Down Listening Processes)

 4. सूचनात्मकम् श्रवणम् (Information Listening)

उत्तर:- (3) सुनने की अधिगम प्रक्रिया में (Top Down Listening Processes) में मुख्य विचार को समझना, पूर्वानुमान करना, तथ्यों का अनुमान लगाना और सारांश उत्पादन शामिल

49. सज्ञाक्रिया विशेषणं क्रिया विशेषणानि च कथं वर्गीकृतानि ?

 1. विषयवस्तुपरकाः शब्दाः (Content Word)

 2. प्रकार्यशब्दाः (Function Word)

3. निष्क्रिय-शब्दावली (Passive Vocabulary)

 4. सक्रिय-शब्दावली (Active Vocabulary) .

उत्तर:- (1) संज्ञा क्रिया विशेषण और क्रिया विशेषण को विषय वस्तु परक शब्द से वर्गीकृत किया जाता है।

 50. रूपविषयकज्ञानम् वर्णनं सीमित अभ्यासे तस्य प्रयोगः किम कथ्यते ?

1. प्रक्रियात्मकं ज्ञानम् (Procedural Knowledge)

2. घोषणात्मकं ज्ञानम् (Declarative Knowledge)

 3. व्याकरण-अनुवाद-प्रक्रिया (Grammar Translation Process)

 4. भाषा-प्रक्रमणम् (Language processing)

उत्तर:- (2) रूप विषयक ज्ञान के वर्णन के सीमित अभ्यास के प्रयोग को घोषणात्मक ज्ञान या वर्णनात्मक ज्ञान कहते है।

 51. प्रकृतभाषायाः सन्दर्भ पाठ-सृजनम् किं कथ्यते ?

1. यौक्तिकपाठं (Contrived text)

2. साहित्यिककृतिः

 3. पाठ्यपुस्तकलेखकैः विकसितः पाठः

4. प्रामाणिकपाठः

उत्तर:- (4) प्रकृतभाषा के सन्दर्भ में पाठ का सृजन प्रमाणिक पाठ कहलाता है।

 52. अधोलिखितेषु भाषा-आकलन विषये कः समीचीनः ?

 1. विद्यार्थिनां उपलब्धिः

 2. विद्यार्थिनां व्याकरणज्ञानस्य आकलनम्

 3. विदयार्थिनां भाषादक्षतायाः आकलनम्

4. विद्यार्थिनः किं न जानन्ति इति अन्वेषणम्

 उत्तर:- (3) भाषा आकलन के विषय में ‘विद्यार्थियों के भाषा-दक्षता का आकलन सही है।

53. भाषाकक्ष्यायां त्रुटीनां विषये अधोलिखितेषु किं समीचीनम् ?

 1. त्रुटयः विद्यार्थिनां शिक्षकानां च कृते अवधेयस्थल (knowledge areas), प्रतिपुष्टिः (feedback) च |

 2. त्रुटयः विद्यार्थिभ्यः भाषाप्रयोगकाले एव संशोधनीयाः |

3. त्रुटयः केवलं शिक्षकाय अवधेयस्थलम् ।

 4. त्रुटयः द्वितीयभाषायां प्रथमभाषायाः हस्तक्षेप-संकेतम्

उत्तर:- (1) त्रुटियाँ छात्रों और शिक्षकों के लिए ज्ञान का क्षेत्र और प्रतिपुष्टि (feedback) है। भाषा कक्षा में त्रुटियों के विषय में ये सही कथन है।

54. व्याकरणस्य कस्यचिद् अनाधीतरूपस्य शिक्षणक्रमे (भविष्यकालिकं कर्मवाच्यरूपम्) विद्यार्थी पूर्वाधीतं ज्ञानं (वर्तमानकालिकं कर्मवाच्यरूपम्) प्रयोक्तुं समर्थः अयं शिक्षण प्रविधिः किं कथ्यते ?

 1. संज्ञानात्मकं-प्रविधिः (Cognitive Strategies)

2. अधिसंज्ञानात्मक-प्रविधिः (Metacognitive Strategies)

 3. रूपाधारित-शिक्षणं (Form Based Learning)

 4. सहयोगात्मक-शिक्षणम् (collaborative Learning)

उत्तर:- (1) व्याकरण का किसी अनाधीत रूप के शिक्षण क्रम में (भविष्यकालिक कर्मवाच्य रूप को) विदयार्थी पूर्वाधीत ज्ञान (वर्तमानकालिक कर्मवाच्यरूप) में प्रयोग करने में समर्थ है, इस शिक्षण विधि को संज्ञानात्मक प्रविधि (Cognitive Strategies) कहते हैं। जहाँ छात्र को ये ज्ञान होता है कि वह किस विषय को कैसे प्रस्तुत करें। वह उस विषयवस्तु का विश्लेषण कर उसे दूसरे स्थान पर भी उपयोग कर सकता है।

55. कार्यं यत् साहाय्यम् करोति विद्यार्थिनं रूपयोजकाय,अर्थाय, प्रयोगाय च |

 1. व्याकरणशिक्षणक्रमे सम्प्रेषणात्मक कार्यम्

2. अर्थनिर्माणाय भाषाशिक्षणकार्यम्

3. व्याकरणशिक्षणय औपचारिकक्रिया

4. प्रक्रियात्मकव्याकरणशिक्षणम्

 उत्तर:- (1) जो कार्य विद्यार्थियों को रूपयोजना के लिए, अर्थ के लिए और प्रयोग करने के लिए सहायता करती है वह व्याकरण शिक्षण क्रम में सम्प्रेषणात्मक कार्य कहलाती है।

 56. रचनावाद (Constructivism) शिक्षण सिद्धान्तरूपेण मन्यते 

1. बालाः नवज्ञानं अर्जनं कुर्वन्ति कक्षाशिक्षणमाध्यमेन |

 2. संरचितप्रविधिमाध्यमेन भाषा शिक्ष्यते ।

 3. एकेन एव विधिना सर्वे छात्राः शिक्ष्यन्ते ।

4. बालाः पूर्वज्ञानसंयोगेन शिक्षयन्ति |

 उत्तर:- (4) रचनावाद शिक्षण सिद्धान्त के रूप से यह मानते हैं कि- बालक पूर्वज्ञान के संयोग द्वारा शिक्षित होता है या सीखता है।

57. प्रायः एतन्मन्यते यत् 

1. प्रथमा भाषा शिक्ष्यते, द्वितीया भाषा अधिगृह्यते।

2. प्रथमा भाषा स्वाभाविकरूपेणाधिगम्यते, द्वितीयाभाषा अधिगृह्यते (Acquired)

 3. प्रथमा भाषा अधिगृह्यते, द्वितीया भाषा च शिक्ष्यते (learnt)

4. प्रथमा च द्वतीया च उभे भाषे शिक्ष्यते (learnt)

उत्तर:- (3) अक्सर ऐसा माना जाता है कि पहली भाषा अधिग्रहण की जाती है और दूसरी भाषा सीखी जाती है।

 58. ‘LAD’ (एल.ए.डी.) इत्यस्य पूर्णरूपमस्ति 

1. लैंग्वेज एक्वायर्ड डायरेक्टली (Language Acquired Directly)

2. लैंग्वेज एक्वीजीशन डिवाइस (Language Acquistiton Device)

3. लैंग्वेज एक्वीजीशन डोमेन (Language Acquisition Domain)

4. लैंग्वेज एक्वीजीशन डॉमीनेन्स (Language Acquisition Dominance)

 उत्तर:- (2) ‘LAD’ (Language Acquistiton Device)

59. ‘बोधगम्यः निवेशः’ (Comprehensible Input) इत्यस्य सन्दर्भोऽस्ति 

1. छात्राणां भाषास्तराद् उच्चतरस्तरीयया भाषया सह सम्पर्कः

2. पाठ्यपुस्तकानि निवेशाश्च ये छात्रैः बोधगम्याः सन्ति ।

3. छात्राणां समस्तरीयया बोधगम्य-भाषया सह सम्पर्कः

 4. छात्राणां परिवेशात् गृहीताः निवेशाः (Input)

उत्तर:- (1) बोधगम्य निवेश में छात्रों के भाषा स्तर को उच्चतर स्तर भाषा द्वारा जोड़ा जाता है।

 60. विभिन्नदर्शनग्रहणस्य (Electiciasm) सन्दर्भोऽस्ति 

1. एकस्य विधेरनपालनम्

 2. सर्वेषां विधीनां सक्षमप्रयोजनानां (Strategy) ग्रहणम्

3. अध्यापकस्य स्वविधेः प्रयोगः

 4. सर्वविधिभिः निरपेक्षो भूत्वा यथेच्छं प्रयोगः

 उत्तर:- (2) विभिन्न दर्शनों के ग्रहण के सन्दर्भ का अर्थ है सभी विधियों के सक्षम प्रयोजनों/ उद्देश्यों को ग्रहण करना।

 61. कः उपागमः (Approach) एतद् मन्यते यद् ‘भाषा मुख्यरूपेण अर्थनिर्माणस्य साधनम् अस्ति ।’

 1. संरचनात्मक-उपागमः

 2. शब्दकोषीय-उपागमः

3. कृत्य-आधारित (Task based) भाषा- पाठनम्

 4. व्याकरण- अनुवादविधिः

उत्तर:- (3) कृत्य आधारित (Task based) भाषा को पढ़ाना ये उपागम (Approach) मानता है कि भाषा मुख्य रूप से अर्थ निर्माण का साधन है।

 62. पठन-प्रक्रियायां निम्नलिखितप्रक्रियायाः किं नाम – “पाठकः निर्णय कर्तु, तदनु स्वमति दातुं मुख्यप्रकरणानि गृह्णाति ।”

1. पर्यवलोकनम् (Scanning) MS

 2. अल्पावलोकनम् (Skimming)

 3. संक्षेपीकरणम् (Summarising)

4. बहिर्वेशनम् (Extrapolation)

 उत्तर:- (3) “पाठक निर्णय करते हुए, उसके बाद अपनी मति के अनुसार मुख्य प्रकरण को ग्रहण करता है।” पठन-प्रक्रिया में इस प्रक्रिया को संक्षेपीकरण (Summarising) कहा जाता है। जब पाठक द्वारा किसी विषयवस्तु के विषय में निर्णय करते हुए जब मुख्य प्रकरण को ग्रहण किया जाता है, तो इसे संक्षेपीकरण कहा जाता है।

 63. यदि कश्चित् अध्यापकः एतादृशान् जनान् यथा ग्रामपंचायतस्य अध्यक्ष, सदस्यान, अध्यापकं, गृहपत्नी, ग्रामस्य चिकित्सा-अधिकारिणं भाषानिवेशान गोष्ठ्यर्थ ददाति, प्रयोगोऽयं किं नाम्ना कथ्यते 

1. नाटकीकरणम् (Dramatisation)

 2. संवाद-प्रयोगः (Dialogue Activity)

3. वार्तालाप-क्रीडा (Conversational Game)

4. भागग्रहणम् (Role-Play)

उत्तर:- (4) यदि कोई अध्यापक ऐसे लोगों को जैसे ग्राम पंचायत के अध्यक्ष, सदस्यों, अध्यापक, गृहपत्नी, ग्राम की चिकित्सा अधिकारी को भाषा निवेश की गोष्ठी के लिए प्रदान करता है, तो यह प्रयोग भाषाग्रहण (Role-Play) कहलाता है।

 64. यदि काचिद् अध्यापिका विद्यालयस्य बाह्यतः सामान्य पथिकं आनयति, पञ्चमिनटपर्यन्तं तं अवलोकयितुं स्वछात्रान् कथयति, तदा सा युग्मेषु चर्चा कारयित्वा पथिकस्य वर्णनं प्रस्तोतुं कथयति, अत्र पथिकः कोऽस्ति?

1. भाषा-उपकरणम् (Instrument)

 2. पदार्थः (Object)

3. मानवः

4. सामग्री (Materials)

उत्तर:- (4) यदि कोई अध्यापिका विद्यालय के बाहर से सामान्य पथिक (राहगीर) को बुलाती है, पांच मिनट तक अपने छात्रों से उसे देखने के लिए कहती है उसके बाद वह जोड़ो में चर्चा कराकर पथिक के वर्णन को प्रस्तुत करने के लिए कहती है। यहाँ पथिक भाषा अधिगम में सामग्री के रूप में है।

 65. पठनम् अस्ति 

1. शब्दानां ध्वनीनां च उद्बाचनम् (Decoding)

 3. वर्णात् प्रारभ्य वाक्यपर्यन्तम् अर्थोद्धाटनम्

2. अर्थग्रहणम्

 4. अर्थबोधनम् (Comprehending)

उत्तर:- (2) पढ़ने का मतलब अर्थ को ग्रहण करने से है।

66. आङ्ग्लभाषा अस्ति 

1. भारतवर्षस्य राजभाषा (Official Language)

 2. भारतवर्षस्य सह-राजभाषा (Associate Official Language)

 3. भारतवर्षस्य स्वीकृता भाषा

4. भारतवर्षे विदेश-भाषा

 उत्तर:- (2) सन् 1949 में 14 सितम्बर के दिन ही संविधान सभा ने हिन्दी को ही भारत की राजभाषा घोषित किया था, हिन्दी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की नयी आधिकारिक भाषा के रुप में चुना गया। लेकिन 1976 में स्थायी राजभाषा आयोग को समाप्त कर दिया गया। अनुच्छेद 343(3) के प्रावधान व श्री जवाहर लाल नेहरू के आश्वासन को ध्यान में रखते हुए राजभाषा अधिनियम बनाया गया। इसके अनुसार हिन्दी संघ की राजभाषा व अंग्रेजी सह राजभाषा के रूप में प्रयोग में लायी गयी।

67. व्याकरणस्य अध्यापन-अधिगमसन्दर्भे किं कथनं सत्यम् प्रथमं कथनम् – व्याकरणस्य नियमानां अधिगमः भाषा-अधिगमः नास्ति । द्वितीयं कथनम् – व्याकरणस्य बहूनि प्रकरणानि न पाठनीयानि, यतः तानि छात्रस्य मस्तिष्के वर्तन्ते केवलं तेषां प्रेरणम् अपेक्ष्यते । तृतीयं कथनम् – प्रथमभाषायाः व्याकरणं द्वितीय-भाषायाः व्याकरणे व्यवधानं करोति

1. प्रथम, द्वितीयं, कथनं च सत्ये

3. तृतीयं कथनं सत्यम्

2. प्रथम, तृतीयं कथनं च सत्ये

4. द्वितीय तृतीयं कथनं च सत्ये

 उत्तर:- (1) व्याकरण के अध्यापन-अधिगम के सन्दर्भ में पहला कथन: व्याकरण के नियमों को सीखना भाषा अधिगम नहीं है । दूसरा कथन: व्याकरण के कई प्रकरण को नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि वे छात्र के मस्तिष्क में मौजूद होते हैं और केवल उन्हें प्रेरणा की आवश्यकता होती है। ये दोनों कथन सत्य है। तीसरा कथन यह है कि पहली भाषा का व्याकरण दूसरी भाषा के व्याकरण में हस्तक्षेप करता है। यह कथन असत्य है।

 68. अधिकाध्ययनस्य प्रयोजनमस्ति 

 1. तथ्यानां विस्तृतज्ञानार्थ गहनाध्ययनम्

 3. सामान्यज्ञानस्य विस्तारणम्

2. शब्दावली-ज्ञानम्

4. मनोरञ्जनं सर्वज्ञानं च

उत्तर:- (4) अधिकाध्ययन का प्रयोजन मुख्यतः मनोरंजन और पढ़ी जा रही विषयवस्तु का ज्ञान करना है।

 69. भाषासन्दर्भ सामूहिकपरियोजनाकार्यम् (Group Project Work) अस्ति 

 1. पाठ्यक्रमान्तर्गत: भाषा-अधिगमस्य विधिः अस्ति ।

2. शब्दावली ज्ञानाय विधिः अस्ति ।

3. सम्पूर्णकक्षाकार्यार्थ प्रविधिः अस्ति

 4. व्यक्तिशः कार्यार्थ प्रविधिः अस्ति ।

 उत्तर:- (1) भाषा के सन्दर्भ में सामूहिक परियोजना का कार्य पाठ्यक्रम के अन्तर्गत भाषा के अधिगम की विधि है।

 70. पत्राधानमूल्याङ्कनम् (Portfolio Assessment) अस्ति 

 1. अध्यापकेन अधिगमस्य उदाहरणानां कालान्तरालेषु सङ्ग्रहणम् छात्रस्य मूल्याकनार्थम् उपयोगश्च ।

 2. छात्राणां कार्यकलापानामभिलेख-निर्माणं तस्य पदक्रमनिर्धारणाय उपयोगः।

3. प्रत्येकं छात्रस्य पुस्तिकानिर्माणं तत्र परीक्षाकानाम लेखनम् ।

4. छात्रस्य प्रगतिविवरणाभिलेखः यत्र तस्य उपलब्धीनां पदक्रमस्य च वर्णनं वर्तते।

उत्तर:- (1) शिक्षक समय – समय पर सीखने के क्रम में सीखने के उदाहरण एकत्र करता है और छात्र मूल्यांकन के लिए उनका उपयोग करता है। इसे पत्राधानमूल्याङ्कनम् (Portfolio Assessment) कहते है।

71. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020’ इत्यस्मिन् कोरियाई -जापानी – थाई -फ्रैंच – जर्मन – स्पेनिश – पोर्तगीज -रूसी भाषाणां च अध्ययन संस्तुतमस्ति 

 1. त्रिभाषानियमान्तर्गतम्

2. अतिरिक्तभाषारूपेण 3. व्यावसायिकपाठ्यक्रमान्तर्गतम्

4. योग्यताविकासार्थम् उत्तर:-

(2) ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020’ कोरियाई-जापानी-थाई-फ्रेंच-जर्मन-स्पेनिश-पुर्तगाली रूसी भाषा को एक अतिरिक्त भाषा के रूप में अध्ययन की सिफारिश करती है।

 72. वर्तमान भाषा-अधिगमानुसारं के वे कथने समीचीने स्तः ?

a. त्रुटयोऽपि अधिगमस्य क्षेत्राणि सन्ति ।

 b. त्रुटयः भाषा-अधिगमे व्यवधानं कुर्वन्ति ।

c. त्रुटयः तत्कालं तत्रैव संशोध्याः ।

 d. त्रुटयः अध्यापकाय प्रतिनिवेशनम् (Feedback) सन्ति ।

1. b एवं c

 2. a एवं b

3. a एवं d0

4 . c एवं d

 उत्तर:- (3) वर्तमान भाषा अधिगम के अनुसार ये दो कथन सही हैं – a. त्रुटियां भी सीखने के क्षेत्र हैं। d. त्रुटियाँ शिक्षक के लिए प्रतिपुष्टि (Feedback) हैं।

 73. व्याकरणस्य अधिगमे प्रक्रियात्मकं ज्ञानम् कथ्यते 

1. भाषा -अधिगमे आत्मनः त्रुटीनां विश्लेषणम्

2. व्याकरणरूपस्य कार्य प्रयोगश्च ज्ञायते |

3. व्याकरणस्य नियमानां शिक्षणं, तेषां पश्चादपि प्रयोगः।

4. व्याकरणस्य पुस्तकात् व्याकरणरूपस्य कार्यविषयकं ज्ञानम् |

 उत्तर:- (2) व्याकरण के अधिगम प्रक्रियात्मक ज्ञान को व्याकरण रूप के कार्य एवं प्रयोग को जानना ज्ञान कहलाता है।

74. संक्षिप्तकथा अस्ति 

1. वर्णनात्मकं लेखनम् ।

 3. कथनात्मकं लेखनम् (Narrative writing)

 2. विश्लेषणात्मकं लेखनम्

4. तुलनात्मक लेखनम्

उत्तर:- (3) संक्षिप्त कथा कथनात्मक लेखन है।।

75. भाषाकक्षायां, विषयकक्षायां वा बहुभाषीयतायाः साधनरूपेण उपयोगः अस्ति 

1. भाषायाः विषयस्य वा अध्ययन-अध्यापने छात्रस्य भाषाणाम् उपयोगः |

 2. बह्वीनां भाषाणां अध्ययनम्-अध्यापनम् यत्र मातृभाषा आधुनिक भारतीयभाषाः, प्राचीनसाहित्यिकभाषाः (Classical _Languages) एका च वैदेशिकीभाषा वर्तन्ते |

3. यथासम्भवभाषाणाम् अध्ययनमध्यापनम् ।।

 4. मातृभाषां भाषारूपेण माध्यमरूपेण च शिक्षणम् |

 उत्तर:- (1) भाषा कक्षा में या विषय कक्षा में एक साधन के रूप में बहुभाषावाद का उपयोग भाषा विषय के अध्ययन व अध्यापन में छात्र द्वारा भाषाओं के प्रयोग से है।

76. छात्राः लेखनस्य बहुभ्यः स्तरेभ्यः गच्छन्ति । लेखन प्रति एषा अवधारणा किं कथ्यते ?

1. उत्पादन-अवधारणा (Product Approach) )

 2. प्रक्रिया-अवधारणा (Process Approach)

 3. परिच्छेद-श्रुतलेखः (Paragraph Dictation)

 4. व्यक्तिपरक-अवधारणा (Personal Writing)

उत्तर:- (2) छात्रों के लेखन के लिए बहुत से स्तर होते हैं। लेखन में इस प्रकार की प्रक्रिया अवधारणा (Process Approach) कहलाती है।

 77. काचित् अध्यापिका स्वकक्षां चतुर्णां समूहेषु विभाजयति । सा प्रत्येक समूहाय काञ्चिद् विषयान् ददाति । तेषामुपरि त्रिमासपर्यन्तं कार्यं कर्तुं तदनु सम्पूर्णा कक्षा विवरणं प्रस्तोतुं कथयति । एषः समूह-क्रियाकलापः किं कथ्यते ?

1. समूहकार्यम् (Group work)

3. भाषाकार्यम् (Language Tasks)

2. दत्तकार्यम् (Assignment)

 4. परियोजनाकार्यम् (Project work)

 उत्तर:- (4) एक शिक्षिका अपनी कक्षा को चार समूहों में विभाजित करती है। वह प्रत्येक समूह को कुछ विषय देती है। वह उन्हें तीन महीने तक उन पर काम करने के लिए कहती है और फिर पूरी कक्षा विवरण प्रस्तुत करती है। इस समूह गतिविधि को ‘प्रोजेक्ट वर्क’ कहा जाता है।

 78. प्रश्नस्य निम्नप्रकारः किं कथ्यते ? मन्यतां, यत् कथायां त्वं पुत्रः असि । दिनान्ते स्वभावनाः स्वपुस्तिकायां लिख ।

1. वर्णनात्मकं लेखनम् (discriptive)

 2. बहिर्वेशनात्मकं लेखनम् (extrapolative)

 3. आत्मकथात्मकं लेखनम् (auto biographical)

 4. रचनात्मकं लेखनम् (creative)

उत्तर:- (2) मान लीजिए आप कहानी में पुत्र हैं। दिन के अंत में, अपनी भावनाओं को अपनी नोटबुक में लिखो। इस प्रकार के लेखन को बहिर्वेशन लेखनम (extrapolative) कहा जाता है।

79. काव्यस्य अध्ययन-अध्यापनस्य मुख्यप्रयोजनम् अस्ति 

1. रसास्वादन मूल्याङ्कनम् च

 2. काव्यलेखनस्य प्रतिभाविकासः

3. भाषा-शिक्षणम्

 4. शब्दसङ्ग्रहस्य व्याकरणस्य च ज्ञानम्

उत्तर:- (1) काव्य के अध्ययन-अध्यायन का प्रमुख उद्देश्य रसास्वादन और उसका मूल्यांकन करना है।

80. भाषाकक्षायाम् एतद् अपेक्ष्यते यत् छात्राः भाषायां भाषया सह च कार्यं कुर्युः । एतत्कार्यं कथ्यते 

 1. भाषायाः शब्दरूपाणां शिक्षणम्

2. भाषायाः शुद्धरूपे प्रयोगः

3. भाषया सह नियुक्तिः (Engagement)

 4. भाषायाः अधिग्रहणम् (Acquisition)

उत्तर:- (3) एक भाषा कक्षा में, यह अपेक्षा की जाती है कि छात्र भाषा में और भाषा के साथ काम करें। इस कार्य को भाषा के साथ नियुक्ति (Engagement) कहा जाता है।

 81. प्रामाणिक पाठ्यं (Text) अस्ति 

 1. तत् पाठ्यं कथनं यत् पाठ्यपुस्तकलेखकैः लिखितम् ।

2. संदर्भानुसारं मौलिकपाठ्यम् ।

 3. मौलिकपाठात् पूर्णतया परिवर्तितं संशोधितं च ।

4. दत्तकार्यरूपेण छात्रैः,कथाभिः,चित्रैश्च अलङ्कृतम् |

उत्तर:- (2) संदर्भ के अनुसार मौलिक पाठ प्रामाणिक पाठ है। . 82. मूल – अन्तरवैयक्तिकसंप्रेषणकौशलम् अस्ति – (BICS)

1. सूक्ष्म (Abstract) विचाराणां सम्प्रेषणार्थं भाषा |

2. युवछात्रैः संवादार्थं भाषा।

 3. अत्रैव – अधुनैव (तात्कालिक)

 4. संवादयोग्या भाषाशिक्षणम्।

उत्तर:- (3) यहाँ ही-अभी ही ये वार्तालाप आधारभूत अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण कौशल (BICS) है। आधारभूत अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण कौशल (Basic Interpersonal Communication Skills – BICS) दैनिक वार्तालाप की भाषा को कहा जाता है। जिसमें दो व्यक्तियों के बीच या एक व्यक्ति तथा समूह के बीच संचार होता है।

 83. भाषामूल्याङ्कनस्य प्रयोजनम् अस्ति 

1. छात्राणाम् उपलब्धेः मापनम् ।

 2. छात्राणाम् स्वकक्षायां स्थाननिर्धारणम् ।

 3. तेषां सम्पूर्णायाः सङ्कलितायाः च उपलब्धेः मापनम् | 4. छात्राणां भाषादक्षतायाः मापनम् ।

उत्तर:- (4) छात्रों की भाषा दक्षता को मापना भाषा मूल्यांकन का उद्देश्य है।

 84. ‘विषयनिष्ठभाषानिवेशाः’ इति किम् अस्ति ?

 1. भाषाप्रयोगकेन्द्रिताः निवेशाः

 2. शब्द – संग्रह – उच्चारण – व्याकरणादयः

3. निवेशानां प्रस्तुतिः तस्याः प्रक्रियाश्च

4. सूचनाकेन्द्रिताः निवेशाः

उत्तर:- (4) विषयनिष्ठ भाषा निवेश सूचनाकेन्द्रित निवेश है।

85. भाषाशिक्षणसन्दर्भ राष्ट्रियपाठ्यचर्यारूपरेखा 2005 इत्यस्य किं कथनं सत्यम् ?

1. सर्वे बालकाः विद्यालयीयशिक्षा मातृभाषायां प्रारभन्ते। यावत् ते दशवर्षीयां शिक्षा पूर्णा कुर्वन्ति तावत् ते वे अथवा अधिकाः भाषाः योजयन्ति।

2. सर्वे छात्राः राज्यस्य भाषां, आङ्ग्लभाषां तथैकां विदेशीयां भाषां शिक्षन्ति |

3. सर्वे छात्राः राज्येन निर्धारितायां माध्यमस्य भाषायां विद्यालयीयां शिक्षा प्रारभन्ते तत्पश्चात् यथासम्भवं अनेकाः भाषाः शिक्षन्ति।

 4. सर्वे छात्राः आङ्ग्लभाषां उच्चोन्मुखगत्यर्थं शिक्षन्ति । ।

उत्तर:- (1) भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 में सभी बालकों की विद्यालयी शिक्षा मातृभाषा में प्रारम्भ होनी चाहिए। और जब वे 10 वर्ष की शिक्षा पूरी करले तब तक वे दो अथवा दो से अधिक भाषा को सीख सकने में समर्थ हो सकें।

 86. भाषाकक्षायां साहित्यशिक्षणस्य प्रयोजनमस्ति 

 1. भाषाधिगमः, चिन्तनं व्याकरणविकासश्च ।

2. भाषाधिगमः, संस्कृतिज्ञानवृद्धिः, सामाजिकज्ञानवृद्धिः।

3. नैतिकमूल्यानां विकासः, लेखकविषये तस्य कालस्य कृतीनाम च ज्ञानम्।

4. पश्चात्काले स्वयं लेखकरूपेण कार्यम् ।

उत्तर:- (2) भाषा कक्षा में साहित्य शिक्षण के उद्देश्य है- भाषा अधिगम, सांस्कृतिक ज्ञान वृद्धि, सामाजिक ज्ञान वृद्धि।

87. किम् साधनं मुद्रणभाषासम्पन्नपर्यावरणनिर्माणे सहायकं भवति?

1. कक्षायां पदार्थानां नामलेखनं तेषाञ्च पदार्थेषु संलेपनम्(affixing)

 2. कक्षायां छात्रैः पदार्थानां नामानि तेषामेव भाषायामुच्चारणम्।

3. चलचित्रस्य प्रदर्शनं यस्य अधस्तात् लेखाः स्युः।

 4. प्रत्येकं कक्षायां मुद्रणयंत्रस्य (printer) व्यवस्था ।

उत्तर:- (1) कक्षा में पदार्थों का नामलेखन कर और उन पदार्थों में सलेपन रूपी साधन मुद्रण भाषा सम्पन्न पर्यावरण निर्माण में सहायक होता है।

88. पाठयचर्यान्तर्गतं भाषाशिक्षणमस्ति?

 1. वस्तुविषय (content) कक्षायां भाषाशिक्षणम् ।

 2. भाषाकक्षायां वस्तुविषयशिक्षणम्।

3. पाठ्यक्रमे भाषानियोजनम्

4. शिक्षणस्य भाषा संस्कृतिश्च

उत्तर:- (1) पाठ्यचर्या के अन्तर्गत कक्षा में वस्तु विषय का शिक्षण भाषा शिक्षण है। पढ़ने पढ़ाने की प्रक्रिया में विषय वस्तु का क्षेत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

 89. भाषाधिगमस्य विषये निम्नलिखितेषु किं सत्यं नास्ति ?

1. यदि भाषया सह प्रचुरः सम्पर्कः स्यात् तदा सर्वे छात्राः सुगमतया भाषां शिक्षितुम् अर्हन्ति।

 2. भाषाशिक्षणे कालस्य आवश्यकता वर्तते ।

 3. भाषाधिगमस्य अर्थोस्ति अर्थाधिगमः।

 4. भाषायाः शिक्षणनार्थं व्याकरणशिक्षणम् आवश्यकमस्ति।

उत्तर:- (4) भाषा अधिगम के विषय में भाषा शिक्षण के लिए व्याकरण शिक्षण आवश्यक है,यह कथन सत्य नहीं है। भाषा अधिगम में बालकों के लिए भाषा शिक्षण आवश्यक है क्योंकि छात्रों में शुद्ध बोलने, लिखने तथा पढ़ने की प्रेरणा देने के साथ-साथ शुद्ध भाषा का प्रयोग सीखने की समझ विकसित हो जाती है।

 90. यदि भारतीयपरिवेशे कश्चित् छात्रः द्वादशवर्षस्य आयुषि जर्मनभाषां फ्रैंचभाषां वा शिक्ष्यते, तदा एतद् ज्ञायते 

1. भाषाधिगमः

2. भाषाधिग्रहणम्

 3. भाषाशिक्षणेन अधिगमः

 4. भाषायोजनम् (Language Addition)

उत्तर:- (1) यदि भारतीय परिवेश में कोई छात्र बारह वर्ष की आयु में जर्मन भाषा अथवा फ्रैंचभाषा में शिक्षा ग्रहण करता है, तो यह भाषा अधिगम कहा जायेगा।

 91. यदि कश्चिद् अध्यापकः अष्टमी-कक्षायां यात्राविवरणस्य विवेचनं कृत्वा यात्राविवरणाधारितविचारेषु विचारविमर्श कारयति यत छात्राः यात्राविवरणेन सहमताः सन्ति न वा। अयं प्रयोगः कः कथ्यते ?

 1. कार्याधारित-प्रयोगः

2. बहिर्वेशीय-प्रयोगः

 3. समीक्षात्मक-प्रवृद्धिः

 4. भाषणप्रवृद्धिः -प्रयोगः

उत्तर:- (2) यदि कोई अध्यापक आठवीं कक्षा में यात्रा विवरण का विवेचन करके यात्रा विवरण पर आधारित विचारों में विचार-विमर्श करते हैं। इस क्रिया पर छात्र सहमत है या नहीं, तो यह प्रयोग बहिर्वेशीय प्रयोग कहा जाता है। 92. भाषावैज्ञानिकम् अध्ययनं कथ्यते 

 1. भाषाविज्ञानम् (Linguistics)

3. व्याकरणम्

2. भाषायाः विज्ञानम्

 4. भाषा-अध्ययनम्

उत्तर:- (1) भाषा के वैज्ञानिक अध्ययन को भाषा विज्ञान कहा जाता है। भाषा विज्ञान, भाषा के स्वरूप, अर्थ और सन्दर्भ का विश्लेषण करता है।

93. भाषाधिग्रहणस्य कः सिद्धान्तः एवं मन्यते यत् सर्वे मानवाः सामान्यान् सिद्धान्तान् मानदण्डान् च उत्तराधिकारे अनुगृह्णन्ति या भाषास्वरूपं नियन्त्रयन्ति । तथा सर्वाः मानवभाषाः परस्परं समानाः सन्ति ।

 1. वैश्विक-व्याकरण-सिद्धान्तः।

 2. व्याकरण-अनुवादविधिः।

3. कार्याधारित-भाषाशिक्षणम्।

4. अनुविधिः सिद्धान्तः

उत्तर:- (1) भाषा अधिग्रहण का वैश्विक व्याकरण सिद्धांत ये मानता है कि सभी मानव सामान्य सिद्धान्तों और मानदण्डों को उत्तराधिकार में अनुग्रहण करते हैं जो भाषा के स्वरूप को नियन्त्रित करते हैं तथा सभी मानव भाषाएं परस्पर समान होती हैं। सार्वभौमिक व्याकरण का सिद्धांत नोम चाम्स्की ने दिया था।

94. भाषाधिगमसन्दर्भे अधोलिखितेषु कतमं कथनं सत्यमस्ति ?

1. यदि कश्चिद् जनः एकास्यां भाषायां वरीयान् अध्येता अस्ति, सः द्वितीयायां भाषायामपि वरीयान् अध्येता भवितुम् अर्हति ।

2. द्वितीयभाषाधिगमः प्रथमभाषायाः अनुगृह्यते।

3. बहुभाषाशिक्षणं छात्रेषु भारोऽस्ति।

4. मूलवक्तुः उच्चारणं सर्वाधिक उपयुक्तं भवति।

 उत्तर:- (1) भाषा अधिगम के सन्दर्भ में यह कथन सत्य है कि कोई व्यक्ति एक भाषा में उत्कृष्ट शिक्षार्थी है, तो वह दूसरी भाषा में भी उत्कृष्ट शिक्षार्थी हो सकता है।

95. सम्पूर्ण-शारीरिकप्रतिक्रिया (Total Physical Response) यस्मिन् अध्यापकः आदेशं ददाति, छात्राः तं शारीरिकरूपेण अनुकुर्वन्ति कस्यां प्रयोजनायां (strategy) आगच्छति।

1. मध्यसंज्ञान-प्रयोजना (metacognitive strategy)

2. संज्ञानात्मक-प्रयोजना (cognitive strategy)

 3. प्रभावकारिणी-प्रयोजना (affective strategy)

4. स्मृतिसहायक-प्रयोजना (mnemonic strategy)

उत्तर:- (4) सम्पूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया करने के लिए अध्यापक छात्रों को आदेश देता है और छात्र उस क्रिया का अनुकरण करते हैं। यह क्रिया स्मृति सहायक प्रयोजन के अन्तर्गत आती है।

96. काचित् षष्ठ्या कक्षायाः अध्यापिका शब्दावली-कार्यार्थं स्वगृहात् पदार्थान् सामग्रीः च आनयति। पूर्व सा चतुर्णा छात्राणां समूहे प्रयोगं करोति । तत्पश्चात् सम्पूर्णा कक्षा तत्प्रयोगस्य अनुकरणं करोति । भाषाशिक्षणाधिगमे एते पदार्थाः सामग्री च किं कथ्यते

 1. अधिगमार्थं गृहवस्तूनि

 3. बाल-भाषाशिक्षणसामग्री

2. सामान्य-उपकरणानि

4. अनुकरणात्मकता

उत्तर:- (2) कोई छठवीं कक्षा की अध्यापिका शब्दावली कार्य करवाने के लिए अपने घर से पदार्थ और सामग्री को ले आती है तथा वह पहले चार छात्रों के समूह में प्रयोग करती है। तदुपरान्त सम्पूर्ण कक्षा उस प्रयोग का अनुकरण करता है। भाषा शिक्षण-अधिगम में ये पदार्थ और सामग्री सामान्य उपकरण कहलाते हैं।

 97. पाठ्यपुस्तकेषु कथाः, कविताः, लेखकानाम्, अन्यलेखाः भवन्ति। एतादृश्यः सामग्रयाः चयनं वयं अनेन कारणेन कुर्मः यतः एषा सामग्री 

 1. प्रामाणिकी तथा स्वाभाविकी-भाषायां भवति।

 2. पाठ्यपुस्तकेषु प्रयोगार्थं लिख्यते।।

3. प्रसिद्धलेखकैः लिख्यते।

 4. सरलभाषायां भवति।

उत्तर:- (1) पाठ्यपुस्तकों में कथा, कविता तथा लेखकों के द्वारा लिखे गए अन्य लेख होते हैं। इस प्रकार की सामग्री का चयन हम लोगों के द्वारा अनेक कारणों से किया जाता है। जिससे यह सामग्री प्रामाणिक तथा स्वाभाविक भाषा में होती है।

98. कश्चिद् अध्यापकः छात्राणां मूल्याङ्कनार्थं एकस्मिन् मासे त्रिवार मौखिकपरीक्षां करोति तथा चा एकवारं पुस्तकसहायां परीक्षां करोति । एताः मौखिक्यः पुस्तकसहायाश्च परीक्षाः किं कथ्यन्ते ?

 1. समेकितं मूल्याङ्कनम् (Summative Assessment)

2. निर्माणात्मकं मूल्याङ्कनम् (Formative Assessment)

3. मौखिकीनां लिखितानां च योग्यतानां मूल्याङ्कनम्

 4. पत्राधान मूल्याङ्कनम् (Portfolio Assessment)

उत्तर:- (2) कोई अध्यापक अपने छात्रों का मूल्याङ्कन करने के लिए एक माह में तीन बार मौखिक परीक्षा तथा एक बार पुस्तक की सहायता से परीक्षा लेते हैं तो इसे पुस्तकाधारित तथा मौखिक परीक्षा निर्माण मूल्यांकन कहा जाता है।

99. अधोलिखितेषु कतमं कथनं सत्यमस्ति ?

1. चिह्न-भाषा (Sign Language) केवलं चिह्नानां समूहोऽस्ति अस्ति ।

 2. चिह्नभाषायाः व्याकरणं भवति ।

3. संसारे केवलम् एका एव चिह्नभाषा अस्ति ।

 4. चिह्नभाषायाः अधिगमः सर्वेभ्यः सम्भवो नास्ति ।।

उत्तर:- (2) चिह्न भाषा व्याकरण में होता है। यह कथन सत्य है जबकि अन्य कथन असत्य हैं।

 100. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ निर्धारयति 

 1. दशमीकक्षापर्यन्तम् शिक्षणस्य माध्यमं मातृभाषा स्यात् |

2. विद्यालये प्रारम्भिकवर्षेभ्यः दशमीकक्षापर्यन्तं शिक्षणस्य माध्यमं आङ्ग्लभाषा स्यात् ।

 3. शिक्षणमाध्यमस्य निर्धारणं राज्यस्य पित्रोश्च इच्छानुसारं भवितव्यम् |

 4. न्यूनतमं अष्टमीकक्षापर्यन्तं शिक्षणमाध्यमं मातृभाषा गृहभाषा वा भवेत् ।

उत्तर:- (4) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यह निर्धारित करती है कि कक्षा आठ तक के शिक्षण का माध्यम मातृभाषा में होना चाहिए।

 101. भाषा शिक्षणम् 

1. छात्रेण विचारितः प्रयासः न भवति ।

3. स्वाभाविकी क्रिया भवति ।

2. छात्रेण विचारितः प्रयासः भवति ।

4. अध्यापकेन विचारितः प्रयासः भवति ।

उत्तर:- (2) भाषा शिक्षण में छात्र के द्वारा अपने विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए प्रयास होता है।

102. सर्वे बालकाः शिक्षणस्य गम्भीरप्रयत्नेन विनैव मातृभाषां शिक्षन्ति। एतत् कथ्यते 

1. अन्तः प्रेरणात्मकभाषा-योग्यता

2. भाषा-अधिगमः 3. सहजातभाषायोग्यता

4. स्वाभाविकभाषायोग्यता

 उत्तर:- (3) सभी बच्चे सीखने के गंभीर प्रयास के बिना अपनी मातृभाषा सीखते हैं। इसे सहजातभाषायोग्यता कहा जाता है।

 103. भाषायाः पठन-पाठनस्य कः पक्षः निवेश-सह-सम्पर्क-निर्गम’ (input interaction out put) इत्येतानि तत्त्वानि शिक्षणप्रक्रियायाः अनिवार्य तत्त्वानि मन्यते ?

 1. प्राकृतिक-पक्षः (Natural Approach)

2. व्यवहार-पक्षः (Behaviorism)

 3. सम्प्रेषणात्मक-भाषा-पठनम्

 4. समग्र-भौतिक-प्रतिक्रिया (Total Physical Response)

 उत्तर:- (1) भाषा के पठन-पाठन में प्राकृतिक-पक्ष (Natural Approach) निवेश-सह-सम्पर्क निर्गम तत्त्वों को शिक्षण प्रक्रिया के अनिवार्य तत्व माने गये हैं। शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें बहुत से तत्व शामिल होते हैं।

 104. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ इत्यनया निम्नलिखितेषु किम् एकं न संस्तुतम्?

1. प्राचीनसाहित्यिक (classical) भाषाणाम् अध्ययनं वैकल्पिकं भवेत्।

 2. वैदेशिकीभाषायाः अध्ययनं वैकल्पिकं भवेत् ।

3. त्रिभाषानियमः सुनम्यः (Flexible) भवेत् |

4. विद्यालयस्य प्रत्येकं स्तरे शिक्षणमाध्यमं आङ्ग्लभाषा भवेत् ।

 उत्तर:- (4) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यालय के प्रत्येक स्तर का शिक्षण माध्यम अंग्रेजी भाषा होना चाहिए यह अनुमोदन नहीं किया गया है।

105. काचिद् अध्यापिका स्वछात्रान् पाठ्यस्य अर्धभागस्यान्ते पठनात् विरामयति। सा तान् अनुमातुं कथयति यत शेषकथायां किं भविष्यति। सा तान् समस्या समाधातुं अपि कथयति। सा किं वर्धयितुं प्रयतते ?

1. अनुभव-आश्रितयोग्यता (Heuristic skills)

 2. अनुमान-योग्यता (Prediction Skills)

3. विश्लेषणात्मक योग्यता (Analytical Skills)

4. पठन-क्षमता (Reading Competency)

उत्तर:- (1) अनुभव आश्रित योग्यता (Heuristic skills) इस विधि (कौशल) को ज्ञान विधि के नाम से जाना जाता है। इसमें छात्र को स्वयं तथ्यों का अध्ययन, अवलोकन और निरीक्षण करने का अवसर दिया जाता है और छात्र से ऐसी उम्मीद की जाती है कि वह अपने प्रयास से सत्य की जाँच करें। यह विधि आगमन विधि को आधार मानकर विकसित की गयी।

106. रोमिला देवी स्वसख्युः शर्करास्तरं ज्ञातुम् स्वसखीनाम् समक्षम् तस्याः चिकित्सकीय विवरणम् पठति । सा स्वपठने किं करोति?

1. पर्यवलोकनम् (scanning)

2. विहङ्गावलोकनम् (skimmimg)

 3. समग्रज्ञानार्थं पठनम्

 4. विश्लेषणम्

उत्तर:- (1) रोमिला देवी अपनी सहेली से चीनी के ज्ञान के बारे में एक चिकित्सक के द्वारा दिये गये विवरण को पढ़ती है, वह अपने पठन के कार्य में पर्यवलोकन करती है। इस विधि में छात्रों में तर्क शक्ति का विकास होता है।

 107. कस्याम् श्रवणपद्धत्यां एतानि तत्वानि गृह्यन्ते- मुख्यविचारस्य श्रवणम्, अनुमानम्, परिणामनिर्णयः, सङ्कलनम् ।

1. अधः-ऊर्ध्वं श्रवण-प्रक्रिया (bottom up)

 2. तथ्य-ग्रहणार्थं श्रवणम्

 3. तथ्यावबोधाय (decode) श्रवणम्

 4. ऊर्ध्व-अधः श्रवण-प्रक्रिया (Top Down Listening Process)

उत्तर:- (4) ऊपर से नीचे सुनने का अर्थ है कि अपने ज्ञान और स्थिति का अधिक से अधिक उपयोग करना/स्थितियों, सन्दर्भो, ग्रन्थों, वार्तालापों, वाक्यांशों और वाक्यों के अपने ज्ञान से, छात्र जो सुनते हैं उसे समझ सकते हैं।

108. उत्पादकशब्दसंग्रहः (productive vocabulary) किमस्ति ?

 1. श्रवणे ये शब्दाः अभिज्ञायन्ते ।

 2. ये शब्दाः पाठ्याद् बहिः श्रूयन्ते ।

 3. ये शब्दाः लेखने, भाषणे च प्रयुज्यन्ते ।।

4. ये शब्दाः पाठकाय नवीनाः सन्ति ।

उत्तर:- (3) छात्रों के द्वारा जो शब्द लिखने और भाषण देने के रूप में प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें उत्पादक शब्द संग्रह (productive vocabulary) कहते हैं।

109. वैयाकरणिकरूपस्य ज्ञानम् तस्य प्रयोगश्च कथ्यते 

 1. घोषणात्मकम् (Declarative) ज्ञानम्

 2. भाषाविषयकं ज्ञानम्

3. भाषावैज्ञानिक-व्याकरणम्

 4. प्रक्रियात्मकम्-ज्ञानम्

 उत्तर:- (4) व्याकरण का ज्ञान और उसके प्रयोग को ही प्रक्रियात्मक ज्ञान कहते हैं।

110. लेखनस्स्य प्रक्रियापक्षे काः अवस्थाः अन्तर्निहिता सन्ति ?

1. प्रारूपनिर्माणं (drafting), विचारोत्तेजनम् (brain storming), रूपरेखानिर्माणम् , त्रुटिशोधनम् (proof reading), परिवर्तनम्, अंतिमप्रारूपलेखनम्।

2. रूपरेखानिर्माणम् , विचारोत्तेजनम् , संशोधनम् , प्रारूपनिर्माणम् , त्रुटिसंशोधनम् , अंतिमप्रारूपलेखनम्।

 3. विचारोत्तेजनम्, रूपरेखानिर्माणम्, प्रारूपनिर्माणम्, संशोधनम्, त्रुटिसंशोधनम्, अंतिमप्रारूपनिर्माणम्

 4. बिन्दुलेखनम् (Joting Down of Points), प्रथमप्रारूपलेखनम् , त्रुटि-शोधनम् ,लेखनम् ।

उत्तर:- (3) लेखन प्रक्रिया पक्ष में विचारों में उत्तेजना, रूपरेखा निर्माण, प्रारूप निर्माण, संशोधन, त्रुटि संशोधन और अन्तिम प्रारूप लेखन की अवस्था अन्तर्निहित होती है।

 111. विद्यालयाश्रितं मूल्याङ्कनं काम् उपलब्धिं ददाति ?

1. एतद् अध्यापकस्य छात्रस्य च स्वायत्ततां वर्धयति।

 2. एतद् अध्यापकानां, विद्यालयस्य च कार्यभारं वर्धयति । 3. एतद् परीक्षामण्डलस्य प्रभुताम् अधिगृह्णाति ।

4. एतद् छात्रं विचारे न गृह्णाति । 20

उत्तर:- (1) स्कूल-आधारित मूल्यांकन शिक्षक और छात्र स्वायत्तता (autonomy) को बढ़ाता

112. शिक्षकेण काव्यम् अत्यन्तं सावधानतया पाठयितव्यम् । निम्नलिखितानां कथनानाम् आधारे, समुचितं विकल्पं चिनुत ।

 a. शिक्षकेण उचितलयेन सह उच्चैः पठितव्यम् ।

 b. शिक्षकेण कठिनशब्दानां प्रतिशब्दं अर्थः प्रकाश्यताम् । __

_c. शिक्षकस्य स्वरे तथा मुखे भावानाम् अभिव्यक्तिः भवेत्।

 d. छात्राणां बोधार्थम् शिक्षकेण प्रश्नाः प्रष्टव्याः | 1. केवलं a, c तथा d सत्यानि सन्ति ।

 2. केवलं a, b तथा d सत्यानि सन्ति ।

 3. केवलं b तथा c सत्ये स्तः ।

 4. केवलं c तथा d सत्ये स्तः

उत्तर:- (1) शिक्षक को कविता को बहुत सावधानी से पढ़ाना चाहिए। शिक्षक को उचित लय के साथ जोर से पढ़ना चाहिए। शिक्षक की स्वर में और चेहरे से भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए। छात्रों को बोध हुआ है या नहीं यह जानने के लिए शिक्षक को प्रश्न पूछने चाहिए। ये तीनो कथन a, c और d सही है।

113. निम्नलिखितेषु किम् काव्यस्य अनिवार्यः अवयवः नास्ति ?

1. सुन्दरभावाः तथा कल्पना

 2. लयात्मकभाषा अथवा छन्दः

3. अलङ्काराणां प्रयोगः

4. व्याकरणात्मक संरचना

उत्तर:- (4) व्याकरणात्मक संरचना, काव्य का अनिवार्य अवयव नहीं है। काव्य के अनिवार्य अवयव इस प्रकार हैं-लय, तुक, छन्द, शब्द योजना, अलंकार, अनुभूति की व्यापकता और तीव्रता, कल्पनाशीलता, रसात्मकता और सौन्दर्यबोध तथा भावों का उदात्तीकरण आदि।

 114. निम्नलिखितेषु किं कथनम् असत्यम् अस्ति ?

 1. ध्वनिविज्ञानस्य सम्बन्धः भाषायाः ध्वनिप्रतिमानैः अस्ति।

 2. अशुद्धस्वराः संयुक्तस्वराः (Dipthongs) कथ्यन्ते ।

3. पञ्चस्वराः सन्ति याः विंशतिध्वनीन् उत्पादयन्ति ।

4. आङ्ग्लभाषायां चत्वारः नासिक्याः सन्ति ।।

 उत्तर:- (4) अंग्रेजी भाषा में कोई भी नासिक्य वर्ण नहीं है बल्कि 5 स्वर (Vowels) और 21 (Consonants) व्य ञ्जन हैं।

 115. संस्कृतभाषां पाठयन् शिक्षकः अपेक्षां न करोति यत् छात्रः 

 1. विद्यालये कक्षायां, गृहे, समाजे वा स्वविचारान् संस्कृतभाषायां प्रकटयेत् ।

 2. संस्कृतभाषामाध्यमेन सरलकथनानि कुर्यात् ।

3. समुचितविरामचिह्नानां शुद्धाक्षराणां प्रयोगं कृत्वा संस्कृतभाषां पठनीयां सङ्गतिपूर्णां च लिखेत् ।।

4. सम्बोधनानां, प्रार्थनानां, अभिवादनादीनां च उत्तरं संस्कृतभाषया दद्यात् ।

 उत्तर:- (1) संस्कृत भाषा पढ़ाने वाले शिक्षक की अपने छात्रों से यह अपेक्षा नहीं रहती है कि उसके छात्र विद्यालय में, कक्षा में, घर में अथवा समाज में अपने विचारों को संस्कृत भाषा में प्रकट करे। प्राथमिक अथवा माध्यमिक स्तर के छात्रों को संस्कृत भाषा में अपने विचार प्रस्तुत करने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए क्योंकि अभी वो प्राथमिक स्तर पर हैं। अपने भावों संस्कृत भाषा में प्रकट करना, उच्च शिक्षा में ही सफल हो सकता है।

 116. भारतवर्षे भाषारूपे आङ्ग्लभाषायाः सन्दर्भे किम् कथनं निम्नलिखितेषु असत्यम् अस्ति ?

 1. 1963 वर्षे संसदः अधिनियमेन आंग्लभाषा भारतवर्षस्य सह-राजभाषा (Associate Official Language) घोषिता।

2. प्रारम्भे भारतीयसंविधाने 343 इत्यनुच्छेदे आङ्ग्लभाषा राजभाषा (Official Language) घोषिता आसीत् ।

 3. 15 वर्षाणि यावत् आङ्ग्लभाषायाः भारतवर्षस्य सर्वेषां कार्यालयीयप्रयोजनानां कृते प्रयोगः स्यात् इति भारतीयसंविधानेन स्वीकृतम्।।

 4. ‘राजभाषा (Official Language) संशोधन-अधिनियम 1967 ‘इत्यस्य माध्यमेन आङ्ग्लभाषा संविधानस्य अष्टम्याम् सूच्यां सम्मिलिता कृता।

 उत्तर:- (4) भारतवर्ष में अंग्रेजी भाषा के सन्दर्भ में विकल्प (4) गलत है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएं-असमिया, उड़िया, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलुगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोडो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथाली, संस्कृत, सिंधी तथा हिन्दी सहित कुल 22 भाषाएँ हैं। अतः आठवीं अनुसूची में अंग्रेजी भाषा शामिल नहीं है।

117. निम्नलिखितानि कथनानि पठत 

1. आङ्ग्लभाषा कौशलवर्धकः विषयः अस्ति आङ्ग्लभाषायाः अध्ययनं भाषणस्य लेखनस्य च सरलतमः मार्गः अस्ति ।

2. अस्मिन् विधौ व्याकरणं पथ्यं (Diet) न भवति अपितु औषधम् (Drug) भवति ।

3. अध्यापकैः मौनपठन-कौशलम् पाठयितव्यम्।

 4. भाषाशिक्षणे कण्ठस्थीकरणं च अनुकरणं च अनुकरणम् च सामान्ये स्तः |

 उत्तर:- (1) अंग्रेजी भाषा कौशल वर्धक विषय है। अंग्रेजी भाषा का अध्ययन भाषण और लेखन के लिए सरलतम मार्ग है।

 118. कश्चित् शिक्षकः श्यामपटले लिखति – “स पत्रं लिखति, बालकाः फुटबालं क्रीडन्ति, रामः स्वपिति” | तदा शिक्षकः व्याख्या करोति यत् क्रियायाः प्रयोगः कर्तृणा अन्वितः भवति, यथा दत्त-उदाहरणेषु दृश्यते। शिक्षकेण व्याकरण-अध्यापनस्य कः विधिः प्रयुक्तः ?

1. अधिष्ठापनविधिः (Inductive Method)

 2. निगमनविधिः (Deductive Method)

 3. प्रत्यक्षविधिः (Direct Method)

 4. निर्माणात्मकविधिः (Constructive Method)

उत्तर:- (1) शिक्षक के द्वारा व्याकरण अध्यापन के लिए अधिष्ठापन विधि का प्रयोग किया गया। अधिष्ठापन विधि को ही आगमन विधि के नाम से भी जाना जाता है।

119. निम्नलिखिते कथने पठित्वा समीचीनं विकल्पं चिनुत – कथनम् 1.: ये छात्राः शोधनं अर्हन्ति तेषां लिखितकार्ये विशेष ध्यानं दातव्यम् । कारणम् (R): योग्यछात्राणां लिखितकार्यं दर्शयित्वा, शोधनार्हाः छात्राः निर्दिष्टव्याः, लिखितं कार्यम् च सम्यक् प्रकारेण कर्तुं प्रोत्साहितव्याः ।

 1. A सत्यम् अस्ति, परं R सत्यं नास्ति।

 2. A तथा R उभे सत्ये स्तः तथा R, A इत्यस्य शुद्धव्याख्या अस्ति ।

 3. A तथा R सत्ये स्तः, परं R, A इत्यस्य शुद्धव्याख्या नास्ति ।

 4. A सत्यं नास्ति, परं R सत्यम् अस्ति ।

उत्तर:- (1) कथन- जो छात्र शोध कार्य करते हैं उनके लिखित कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह कथन बिल्कुल सत्य है। कारण- योग्य छात्रों के लिखित कार्यों को देखकर उन्हें शोध छात्र समझना यह असत्य है क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि जो अच्छा लिखता हो वह शोध कार्य के लिए योग्य हो। इसीलिए, A सत्य है, लेकिन R सत्य नहीं है।

 120. “हास्येन विना कक्षा अतिनीरसं स्थानम् अस्ति । मन्दं मन्दं हास्यं पाठने सहायकम् अस्ति । अनेन कथनेन किं संकेतितम् अस्ति ?

 1. अध्यापकस्य छात्रान् विनियोजनगुणः

 2. अध्यापनविधिः

3. कक्षापरिवेशः

4. बालकस्य प्रकृतेर्जानम्

 उत्तर:- (1) हास्य के बिना कक्षा अति नीरस स्थान है। मन्द मन्द हास्य पठन में सहायक है। इस कथन से अध्यापक और छात्रों में विनियोजन गुण का संकेत हो रहा है।

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