CTET Sanskrit MCQ GK Quiz 2022 : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा 2022

ctet संस्कृत शिक्षण शास्त्र प्रैक्टिस सेट 2022

CTET की परीक्षा में संस्कृत से पूछें गये महत्वपूर्ण प्रश्न, पढ़ें

CTET Exam 2022 Sanskrit Pedagogy Previous Year MCQ: विगत वर्षों में पूछे गए ‘संस्कृत पेडगॉजी’ के इन सवालों का निकाले हल, और जांचे अपनी तैयारी का स्तर कितना है

CTET Sanskrit Previous Years Question Papers (Hindi)

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नमस्कार दोस्तों आज में आप सभी के लिए संस्कृत के महत्वपूर्ण प्रश्नो का टेस्ट ले के आया हु ये सभी आने वाले सभी एक्साम्स जैसे ( CTET/TET/ KVS/UPTET/ 1st Grade/ 2nd Grade) टीचर भर्ती के लिए महत्वपूर्ण हे जैसा की सभी को पता है की संस्कृत में बोहत प्रश्न है तो हम आप सभी को 150 प्रश्न बना के संस्कृत Quiz In Hindi आप सभी को प्रोवाइड कर रहे हे

CTET Sanskrit Pedagogy MCQ GK in HINDI

CTET संस्कृत प्रैक्टिस सेट

1. संस्कृत के ‘ एकोन चत्वारिंशत्’ को कहते हैं

(a) 39

(b) 29

(c) 59

(d) 49

Ans : (a) संस्कृत के ‘एकोन चत्वारिंशत्’ को 39 कहते हैं। 

2. द्वि शब्द, स्त्रीलिंग, प्रथमा विभक्ति का रूप है

(a) द्वौ

(c) द्वि

(b) द्वयम्

(d) द्वे

Ans : (d) द्वि शब्द, स्त्रीलिंग, प्रथमा विभक्ति का रूप है-द्वे ।

3. ‘ददति’ रूप है

(a) लट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन

(b) लोट् लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन

(c) लोट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन

(d) लट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन

Ans : (a) लट् लकार प्रथम पुरूष बहुवचन का रूप है- ‘ददति’ ।

4. ‘गुरूपदेश: ‘ शब्द में प्रयुक्त संधि है

(a) दीर्घ संधि

(b) गुण संधि

(c) अयादि संधि

(d) यण् संधि

Ans : (a) ‘गुरुपदेशः’ शब्द में प्रयुक्त सन्धि है- दीर्घ सन्धि

5. उपसर्ग हैद्वाभ्याम्

(a) कुत्र

Ans (b) परा

121. अध्यापने ध्वनियन्त्रस्य प्रयोगविषये निम्नलिखितेषु किं सत्यम् नास्ति 

1. विषयवस्तोः समीचीनतरं बोधाय, एतत् सहायकः अस्ति ।

 2. एतत् वर्तनीज्ञानाय उच्चारणज्ञानाय च सहायकोऽस्ति ।

3. एतत् आङ्ग्लभाषामाध्यमस्य कक्षायां सुष्टु कार्यं करोति । –

 4. पठनकौशलप्रापणे एतत् आत्मविश्वासं प्रददाति ।

 उत्तर:- (1) अध्यापन में ध्वनियन्त्र का प्रयोग ‘विषयवस्तु को अच्छी प्रकार से समझने के लिए, यह सहायक है’ यह सत्य कथन नहीं है। ध्वनियन्त्र वर्तनी का ज्ञान और उच्चारण के लिए सहायक होता है। यह अंग्रेजी भाषा के माध्यम से कक्षा को संचालित करने में अच्छा कार्य करता है। पठन कौशल में यह आत्मविश्वास प्रदान करता है।

 122. काचिद् अध्यापिका स्वकक्षां चतुण्णां समूहेषु विभाजयति तथा छात्रैः पठिते पाठ्यविषये वाद-विवादं कारयति । भाषाशिक्षणस्य अयं कीदृशः क्रियाविधिः अस्ति।

1. परिणाम (निगमन) क्रियाविधिः (Output Activity)

 2. सम्पर्कात्मकक्रियाविधिः (Interactive)

 3. निवेश-प्रतिक्रिया (Input response)

4. परिणामप्रतिक्रिया (Output response)

 उत्तर:- (3) कोई अध्यापिका अपने कक्षा को चार समूहों में विभाजित करती है तथा छात्रों को पढ़ाये गये विषय पर वाद-विवाद करवाती है। भाषा शिक्षण की यह ‘निवेश-प्रतिक्रिया (Input response)’ विधि है।

123. निम्नलिखितेषु किं कथनं सत्यं नास्ति ?

 1. प्रथमाभाषायाः द्वितीयाभाषायां सहयोगात्मकः प्रभावः भवति ।

2. प्रथमाभाषा द्वितीयाभाषायाः शिक्षणं बाधते ।

3. पठनकौशलं एकस्याः भाषायाः द्वितीयां भाषां परिवर्तनीयम् अस्ति ।

4. दत्तावकाशाः दत्तावसराः च छात्राः बहव्यः भाषाः शिक्षितुम् समर्थाः सन्ति |

 उत्तर:- (2) प्रथम भाषा द्वितीय भाषा के शिक्षण में बाधा उत्पन्न करती है, यह कथन सत्य नहीं है।

124. मातृभाषा-आधारिता बहुभाषीयता अस्ति 

1. वस्तुनिष्ठविषयाणां मातृभाषामाध्यमेन अवगमनम् ।

2. छात्राः तेषां मातृभाषया प्रारभन्ते तथा बह्वीः भाषाः संयोजयन्ति |

 3. छात्राः प्रान्तीयभाषामाध्यमेन बह्वीः भाषाः शिक्षन्ति ।

4. वैदेशिकीभाषामाध्यमेन भाषाणां शिक्षणम् ।

 उत्तर:- (2) छात्र अपनी मातृभाषा से प्रारम्भ करके बहुत-सी भाषाओं को सीखते हैं, यही मातृभाषा पर आधारित बहुभाषीयता है।

 125. ‘बोधगम्यः निवेशः भाषासम्पर्कस्य प्राथमिक अवस्थायां कर्तव्यम्’ । अस्मिन् कथने निम्नलिखितस्य समावेशः नास्ति ?

 1. पाठ्यपुस्तकम् (पाठ्यक्रम पाठयितुं निर्धारितपुस्तकम्)

2. बृहत्पुस्तकम् (चित्राणि, कथा, कविताः)

3. कक्षापुस्तकालयाः (पुस्तकानि व्यंग्यकथाः आदयः)

 4. जनसम्पर्कसाधनानि (पत्रिकाः, समाचारपत्रम् लेखाः, श्रवणयन्त्रम्, सी.डी. आदयः।

उत्तर:- (1) बोधगम्य निवेश भाषा सम्पर्क की प्राथमिक अवस्था का कर्तव्य है। इस कथन में पाठ्यपुस्तक का समावेश नहीं है।

 126. लीसामहोदयायाः संस्कृतकक्षायां सटीकतां प्राधान्यं प्रदीयते यतस्यां सा श्रवणभाषणयोः तुलनया पठनं लेखनं च अवधानं ददाति। सा प्रचुर अभ्यासं ददाति यत्र लक्ष्यभाषामधिकृत्य अनुवादस्य कृते मातृभाषा प्रयुक्ता। लीसामहोदया कः प्रविधिः अङ्गीकरोति

1. मौन-प्रविधिः

2. संवादात्मक-भाषा-शिक्षणम्

 3. व्याकरण-अनुवादविधिः

 4. संरचनात्मक-मौखिक-स्थित्यात्मक-उपागमः

 उत्तर:- (3) व्याकरण-अनुवाद कक्षाएं आमतौर पर छात्रों की मूलभाषा में आयोजित की जाती हैं। व्याकरणिक नियमों को निगमनात्मक रूप से सीखा जाता है, व्याकरण के नियमों को जानने के दुहराव द्वारा और उसके बाद के लिए लक्ष्य भाषा से व्याकरण का अभ्यास किया जाता है। जब छात्र उपलब्धि से अधिक उन्नत स्तरों पर पहुंच जाते हैं, तो लक्ष्य भाषा से सम्पूर्ण पाठ का अनुवाद कर सकते हैं। AN

127. मौनपठनविषये अधोलिखितेषु किं सत्यम्?

 1. मौनपठने विद्यार्थिभिः अपेक्ष्यते यत् ते ओष्ठसंचलनं विना निस्वनं पठेयुः

 2. मौनपठने विद्यार्थिनः पठनक्रमे ओष्ठसंचलनं कर्तुं शक्नुयुः

3. मौनपठने कक्षायां कर्णेकथनं घटितं स्यात्

 4. मौनपठने शिक्षकोऽपि मौनं भवेत्

 उत्तर:- (1) मौन पठन में, छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे बिना होंठों को हिलाए अपने मन से पढ़ें।

128. का अधिगम-विकलता लेखनेन सम्बद्धा?

 1. डिस्ग्राफिया

2. डिस्लेक्सिया

 3. डिस्केकुलिया

 4. डिस्प्रेक्शिया

उत्तर:- (1) डिस्ग्राफिया लेखन से जुड़ी सीखने की अक्षमता है।

129. अधोलिखितेषु किं स्वतन्त्र-रचना-लेखन-गतिविधीनां उदाहरणं नास्ति?

 1. अनुच्छेद-लेखनम्

2. पत्र-लेखनम्

 3. सम्वाद-लेखनम्

 4. स्तरित-मार्गदर्शित-लेखनम् (Levelled guided writing)

 उत्तर:- (4) स्तरित मार्गदर्शन लेखन (Levelled guided writing) स्वतंत्र रचना और लेखन गतिविधियों का उदाहरण नहीं है स्वतंत्र रचना लेखन के अन्तर्गत – अनुच्छेद-लेखन, पत्र-लेखन, संवाद-लेखन, किसी पाठ का सारांश, यात्रा-वृतान्त आदि आते हैं।

130. सुधामहोदया कक्षायां शिशुं प्राथमिकतां ददाति। सा सुनिश्चितं करोति यत् सा प्रत्येक-प्रदत्त-अवसरे छात्रैः सह संवादः कुर्यात्, एवं सा छात्राणां आवश्यकतां प्रति सचेता। सुधामहोदया किं अनुसरति? 

 1. व्यक्ति-भेदस्य सिद्धान्तः

2. अभिप्रेरणा-सिद्धान्तः

 3. शिशु-केन्द्रित-अभिगम-सिद्धान्तः।

 4. अनुकरण-सिद्धान्तः

उत्तर:- (3) श्रीमती सुधा कक्षा में शिशु को प्राथमिकता देती हैं। वह यह सुनिश्चित करती है कि वह प्रत्येक अवसर पर छात्रों के साथ बातचीत करे, इस प्रकार वह छात्रों की जरूरतों के प्रति सतर्क रहती है। इस प्रकार श्रीमती सुधा शिशु केन्द्रित अधिगम सिद्धान्त का अनुसरण करती है ।

131. निशामहोदया सप्तमीकक्षायाः छात्रान् वाक्यप्रकारान् पाठयति। सा वाक्यसम्बद्धव्याकरणनियमानां व्याख्यया आरभते तदन्तरम् सा सामान्यतः श्रूयमाण वाक्यानां उदाहरणानि प्रस्तौति । सा किं शिक्षण-प्रविधि अनुसरति?

 1. निगमनतः आगमनम् प्रति

2. मूर्ततः मूर्त प्रति

 3. विश्लेषणतः संश्लेषणं प्रति

 4. आगमनतः निगमनं प्रति

 उत्तर:- (1) निशा महोदया ‘निगमन-आगमन’ शिक्षण विधि का प्रयोग कर रही हैं।

132. आयशामहोदया अवलोकयति यत् तस्याः विद्यार्थी रमेशः अपरिचितशब्दानामुपरि बहु अवधानं ददाति ये पठनकार्यप्रयोजनेन साक्षात् सम्बद्धाः न सन्ति, अतः रमेशः प्रदत्त-पठनकार्ये काठिन्यं अनुभवति। रमेशेन किं कर्तुम् न शक्यते?

 1. सन्दर्भागत-शब्दार्थस्य अवबोधः

2. सस्वरेण सुस्पष्टतया शब्दोच्चारणम्

 3. प्रदत्तकार्यस्य लेखनम्

 4. प्रदत्तकार्यस्य मूलविचार-कथनम्

उत्तर:- (1) श्रीमती आयशा ने देखा कि उनके छात्र रमेश अपरिचित शब्दों पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं जो सीधे पढ़ने के कार्य के उद्देश्य से संबंधित नहीं हैं, इसलिए रमेश को दिए गए पढ़ने के कार्य में कठिनाई का अनुभव होता है। रमेश को संदर्भ के अनुसार शब्द का अर्थ नहीं पता चल रहा है।

133. यदा स्वनिमः शब्दस्य उच्चारणम् अनुसृत्य स्वध्वनि परिवर्तते, तदा अयं कथ्यते

1. रुपिमः(Morpheme)

2. लेखिमः (Grapheme)

 3. अक्षरम्(Syllable)

 4. उपस्वनः(Allophone)

 उत्तर:- (1) जब स्वनिम शब्द उच्चारण का अनुसरण करके अपनी ध्वनि को परिवर्तित करती है, तब यह ‘रूपिम’ कहा जाता है। ‘स्वनिम’ से बड़ी इकाई रूपिम’ है ।

134. रविमहोदयः एक प्रश्नपत्रं रचयति यस्मिन् अधिकांशाः प्रश्नाः पाठ्यक्रमेण परीक्षायाः उद्देश्येन वा असंगताः वर्तन्ते। रविमहोदयस्य प्रश्नपत्रे का न्यूनता विद्यते?

 1. आमुख-मूल्यता(Face validity)

2. वस्तु-वैधता (Content validity)

3. विश्वसनीयता(Reliability)

4. विभेदक-अनुक्रमणी(Discriminatory index)

 उत्तर:- (2) रवि महोदय एक प्रश्न-पत्र का निर्माण करते हैं जिसमें अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम अथवा परीक्षा के उद्देश्य से असंगत है। रवि महोदय के प्रश्न पत्र में ‘वस्तु वैधता’ (Content validity) की न्यूनता प्राप्त होती है। 135.37€41146: 3şullora: ERRQ ufafe: (Estimate, Read, Respond and Question) छात्रा………कौशलविकासाय साहायं भवति।

1. पठनम् 2. लेखनम् 3. श्रवणम् 4. संभाषणम्

 उत्तर:- (1) अध्यापक द्वारा स्वीकार की गई ERRQ (Estimate, Read, Respond and Question) विधि छात्रों के पठन कौशल विकास के लिए सहायक होती है। ERRQ एक पठन रणनीति है जो छात्रों को पढ़ने, समझने और प्रश्न पूछने तथा उत्तर देने में सहायता प्रदान करती है।

136. अधोलिखितेषु किं त्रुटिपूर्ण-पठनवृतिः नास्ति?

1. उप-स्वरीकरणम् (Sub-vocalization)

 2. अंगुलि-निर्देशनम् (Finger-pointing)

 3. प्रतिगामि-नेत्रसञ्चालनम् (Regressive eye movement)

 4. द्रुत-पठनम् (Speed reading)

उत्तर:- (4) त्रुटिपूर्ण पठन द्रुत पठन’ (Speed reading) नहीं है। पठन कौशल मुख्य रूप से चार प्रकार के हैं-

(1) सस्वर पठन

(2) व्यक्तिगत पठन

 (3) सामूहिक पठन,

(4) मौन पठन-

1. सामान्य मौन पठन

2. गम्भीर मौन पठन,

 3. द्रुत पठन।

137. अधोलिखितेषु कारकेषु भाषानैपुण्यदृष्टेः किं सर्वाधिक महत्त्वपूर्णम्?

 1. सर्वथाशुद्ध-उच्चारेण सह पठनम्

 2. सुन्दरहस्तलेखनेन अभ्यासकरणम्

 3. शुद्धतायाः धाराप्रवाहितायाः विकासम्

 4. निम्नमूल्यशिक्षणसामग्र्याः प्रयोगः

उत्तर:- (3) भाषा निपुणता की दृष्टि से शुद्धता के साथ धाराप्रवाह विकास सबसे महत्त्वपूर्ण है।

 138. श्यामः संथाली’ इति स्वमातृभाषायाः एकः कुशलः पाठकः , तेन फ्रेन्च इति भाषा सम्यक् रीत्या अधिगता। अधुना सम्यक्-रुपेण ‘फ्रेन्च’ इति भाषया पठितुं शक्नोति। इदं किं कथ्यते?

 1. कौशल-स्थानान्तरणम् ( Skill transfer)

 2. पठन-स्थानान्तरणम् (transfer)

3. अधिगम-स्थानान्तरणम् (transfer)

4. पठनप्रविधिः (Reading strategy)

उत्तर:- (1) श्याम संथाली ‘अपनी मातृभाषा के एक कुशल पाठक हैं, उन्होंने फ्रेंच भाषा पूरी तरह से सीखी है। अब वह फ्रेंच में ठीक से पढ़ सकता है। इसे कौशल-स्थानान्तरण कहा जाता

139. भाषाविषये सहजातत्वेन (Innateness) किमाशयः?

 1. वाक्व्यवहारे मानवानां स्वैच्छिकस्वभावः 4

2. ताः समस्याः यान् बालाः वाक्व्यवहारक्रमे अनुभवन्ति

3. मानवानां वाक्व्यवहारस्य नैसर्गिक-योग्यता

4. वाक्व्यवहारस्य पूर्वं मानवकृतचिन्तनम्

उत्तर:- (3) भाषा विषय में सहजता (Innateness) का अर्थ है मनुष्यों की वाणी व्यवहार की नैसर्गिक योग्यता।

140. षष्ठकक्षायाः कश्चित् अध्यापकः स्वकक्षां पञ्चसमूहेषु विभज्य त्रिमासयावत् विविधविषयमधिकृत्य विभिन्नजनेभ्यः विचारान् समाहृत्य कार्यं कर्तुं निर्दिशति, तदन्तरं विद्यार्थिनः तान् आधृत्य प्रतिवेदनं लिखन्ति, कक्षां प्रति प्रस्तुवन्ति च। अयं गतिविधिः किं कथ्यते?

1. प्रदत्तकार्यम् (Assignment)

2. परियोजनाकार्यम् (Project work)

3. समूहकार्यम् (Team work)

4. सञ्चयिनी-आकलन (Portfolio assessment)

 उत्तर:- (2) यह गतिविधि परियोजना कार्य (Project work) कही जाती है।

 141. सामग्र्या प्रदताः निविष्टयः(input) कदा ‘अन्तर्ग्रहणम् (intake) भवन्ति?

 1. यदा छात्राः अभ्यासमाध्यमेन(drills) व्याकरणिकपक्षाणां अभ्यासः कुर्वन्ति

2. यदा छात्राः अवबोधपूर्वकं प्रसंगानुकूलः भाषाप्रयोगः कुर्वन्ति

 3. यदा छात्राः अर्थं अवगच्छन्ति, भाषया अभिव्यक्तिं च कुर्वन्ति

 4. यदा छात्राः पाठं कण्ठस्थं कुर्वन्ति तत्पश्चात् प्रयोगं च कुर्वन्ति

 उत्तर:- (2) किसी सामग्री द्वारा दी गयी निविष्टियाँ, तब ग्रहण की जाती है, जब छात्र समझ के साथ और प्रसंगानुकूल भाषा का प्रयोग करते हैं।

 142. अश्विनः पाठस्य, अन्यैः भाषितान् किंचिद् शब्दान् च अभिज्ञातुं समर्थः परं तु सः स्वस्य प्रयोगे समर्थः नास्ति। एतादृशाः शब्दाः कस्याम् श्रेण्याम आयन्ति?

 1. सक्रिय-शब्दावली

 2. दुर्बोध-पदम्

 3. निष्क्रिय-शब्दावली

 4. दुर्बल-पदम्

 उत्तर:- (3) अश्विन पाठ के कहे गये अन्य कुछ शब्दों को जानने और समझने में समर्थ है लेकिन वह अपनी भाषा में प्रयोग करने में समर्थ नहीं है। इस प्रकार के शब्द निष्क्रिय शब्दावली की श्रेणी में आते हैं।

143. एकस्यां कक्षायां कश्चित् गतिविधिः एवंविध् घटति छात्राः समाचारपत्रात् जलवायुसम्बन्धिसूचनम् अन्वेष्टं, मुख्यनगराणां दैनिकं साप्ताहिक च जलवायुस्थितिम् विश्लेषितुम् निर्दिष्टाः। छात्राः समूहबद्धः भूत्वा एतस्य विश्लेषणं

कुर्वन्ति सम्पूर्णकक्षायाः समक्ष प्रस्तुवन्ति च। एतेन गतिविधिना भाषाशिक्षणस्य कीदृशः गतिविधिः अङ्गीक्रियते?

 1. पठनम्-संलग्नकरणम्-विमर्शनम्-प्रयोगः(भाषा)/Study-Engage-Reflect-Use)

2. उपस्थापनं-अभ्यसनम्-प्रस्तुतिकरणम्(भाषा)(Present-Practice-Produce)

 3. कृत्यकाधारित भाषाधिगमः (Task based language learning)

 4. प्रयुज्यमाणा-भाषा-प्रविधिः (Language-in-use strategy)

 उत्तर:- (1) छात्रों को समाचार पत्र से जलवायु सम्बन्धी सूचना खोजने, मुख्य नगर के दैनिक और साप्ताहिक जलवायु की स्थिति का विश्लेषण करने का निर्देश दिया जाता है। छात्र समूहबद्ध होकर इसका विश्लेषण करते हैं और सम्पूर्ण कक्षा के सामने प्रस्तुत करते हैं। यह गतिविधि भाषा सीखने की ‘पठन-संलग्नकरण-विमर्श प्रयोग’ Study-Engage-Reflect-Use) गतिविधि कहलाती है।

144. भारतीमहोदया सप्तमीकक्षायाः छात्राणां त्रुटीनां संग्रहं करोति, सप्ताहे एकवारं एतदधिकृत्य चर्चा करोति, त्रुटीन् प्रति तेषां ध्यानाकर्षणं करोति। सा तान् छात्रान् त्रुटीन् विचारयितुम् कथयति। तया किं क्रियते?

 1. टि-विश्लेषणम्

2. प्रतिपुष्टि-प्रदानम्

3. व्याकरणनियमानां शिक्षणम्

4. व्याकरणे संलग्नकरणम्

 उत्तर:- (2) श्रीमती भारती सातवीं कक्षा के छात्रों की गलतियों को एकत्र करती हैं, सप्ताह में एक बार इस पर चर्चा करती हैं और गलतियों पर उनका ध्यान आकर्षित करती हैं। वह उन छात्रों से गलतियों पर विचार करने के लिए कहती है। शिक्षिका द्वारा यह क्रिया प्रतिपुष्टि के अन्तर्गत आती है।

 145. अधोलिखितवाक्यं लेखनस्य कः प्रकारः ? ‘कल्पयतु यत् भवान् कथामध्ये एकं पात्रं अस्ति, स्वमनोगतभावान् प्रकटयन् स्वमित्रं प्रति एक पत्रं लिखतु।’

 1. समन्वेषी-लेखनम्(Extrapolative writing)

 2. सृजनात्मक-लेखनम् (Creative writing)

3. तर्कप्रधान-लेखनम्(Argumentative writing)

4. विवरणात्मक-लेखनम्(Descriptive writing)

 उत्तर:- (1) ‘कल्पना कीजिए कि आप एक कहानी के पात्र हैं, अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखें।’ इस प्रकार का लेखन समन्वेषी-लेखन (Extrapolative writing) कहलाता है।

 146. राष्ट्रिय-शिक्षा-नीतिः2020 अनुशंसति

1. आंग्लभाषायाः, वैदेशिकभाषाणां, मातृभाषायाः संस्कृतभाषायाः च पठनपाठनम्

2. संस्कृतभाषायाः, तमिलभाषायाः, श्रेण्यभाषाणां , हिन्दीभाषायाः, आंग्लभाषायाः,उर्दूभाषायाः च पठनपाठनम्

 3. मातृभाषायाः, अन्यभारतीयाभाषाणां, संस्कृतभाषायाः, वैदेशिकभाषायाः, श्रेण्यभाषायाः च पठनपाठनम्

 4. गृहभाषा मातृभाषायाः, अन्यभारतीयभाषायाः , वैदेशिकभाषायाः, श्रेण्यभाषायाः च पठनपाठनम्

उत्तर:- (4) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश है कि बालकों को गृहभाषा/मातृभाषा, अन्य भारतीय भाषा, विदेशीभाषा और श्रेयस्कर भाषा (Classical) में पठन-पाठन कराया जाए।

147. ‘पाठ-प्रामाणिकता’ (Text-authenticity) इत्यनेन कोऽशयः?

1. पाठ्यपुस्तकलेखकैः विकसिताः सुविचारिताः पाठाः

2. नैसर्गिकभाषाप्रयोगं संदर्भ च अनुसृत्य पाठस्य उद्गमः

3. अधिकारि-विदवभि: एकं आधिकारिकं पाठम्

4. पाठ्यपुस्तकस्थाः समस्तपाठाः आख्यानि च

 उत्तर:- (2) पाठ-प्रामाणिकता (Text-authenticity) से यह आशय है कि नैसर्गिक भाषा का प्रयोग और सन्दर्भ का अनुसरण करके पाठ का उद्गम करना।

148. अधोलिखितेषु गतिविधिषु सञ्चयिनी-आकलेन (Portfolio assessment) कः सम्बद्धः 1. अध्यापकः छात्रैः अधिगमस्य सर्वदृष्टान्तान् पर्यवेक्षते तेषां अभिलेखनं च करोति। 2. अध्यापकः छात्राणां समस्तकार्याणां अभिलेखनं करोति यतस्मात् सः प्रतिकार्याय छात्रं अङ्क ददाति। 3. अध्यापकः प्रगतिपत्रे छात्राणाम् अभिभावकेभ्यः स्वप्रतिपुष्टिं लिखति। 4. अध्यापकः स्वकक्षायाः समस्तगतिविधीनां अभिलेखनं करोति।

उत्तर:- (1) गतिविधियों में से सञ्चयिनी आकलन (Portfolio assessment) में शामिल है शिक्षक छात्रों के द्वारा सीखने के सभी दृष्टान्तों का अवलोकन करता है और उन्हें रिकॉर्ड करता है।

149. एकः शिक्षकः अष्टमकक्षायां दशवाक्यानां अनुच्छेदं स्वछात्रान् प्रति सस्वरं पठति एवं तान् अवधानं दत्वा श्रोतुं निर्दिशति। छात्रैः तं अनुसृत्य अनुच्छेदं पुनर्लेखनीयम् यत्र यथावत् शब्दलेखनस्य आवश्यकता नास्ति, ते अनुमान-कल्पनाश्रयितुम् स्वतन्त्राः भवेयुः। अयं गतिविधिः किं कथ्यते?

 1. अनुच्छेद-श्रुतलेखनम्

2. परस्पर-श्रुतलेखनम्

 3. वाक्यशः श्रुतलेखनम्

 4. व्याकरण-अनुवाद श्रुतलेखनम्

 उत्तर:- (1) आठवीं कक्षा का एक शिक्षक अपने छात्रों के सामने दस वाक्यों का एक पैराग्राफ जोर से पढता है और उन्हें निर्देश देता है कि ध्यान से सुनो और अनुच्छेद को जैसा सुना है वैसा न लिखते हुए अपने अनुमान और कल्पना से लिखे। छात्रों की इस गतिविधि को अनुच्छेद श्रुतलेखन विधि कहा जाता है।

 150. यस्मिन् कार्ये षष्ठं सप्तमम् वा पदस्य स्वमत्यापूरणार्थं विलोपं क्रियते, तत् कथ्यते

1. रिक्तस्थानस्य पूरणम्

 2. व्याकरणिकपदपूर्तिः

3. ‘क्लोज’ इत्याख्यपूरणम्

4. अनुच्छेद-समापनम्

उत्तर:- (3) ऐसा कार्य जिसमे छ: या सात पदों को शिक्षक किसी अनुच्छेद में से हटा देता है ताकि बच्चे अपनी बुद्धि से उसे पूरा कर सके। इस प्रकार छात्रों द्वारा वाक्यों की पूर्ति की प्रक्रिया को क्लोज परीक्षण कहा जाता है।

 151. चेन्नई’ इत्यस्मिन् स्थाने भाषिता भाषा, ,कोइम्बेटोर’ इत्यस्मिन् स्थाने भाषिता भाषा स्तः 

 1. तमिलभाषायाः क्षेत्रीय उपभाषे |

2. तमिलभाषायाः सामाजिक उपभाषे ।

3. ‘कोइम्बेटोर तमिलभाषा’ तमिलभाषायाः मलयालम-भाषायाः च मिश्रणं अस्ति ।

 4. ‘चेन्नई-तमिलभाषा’ तेलगुभाषायाः तमिलभाषायाः च मिश्रणम् अस्ति ।

उत्तर:- (1) चेन्नई’, कोयंबटूर’ में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं – तमिल की एक क्षेत्रीय बोली । 152. उपागमस्य विषये विधेश्च विषये किं कथनं सत्यम् ?

1. इदं भाषा प्रकृतीनां भाषाशिक्षणेन सह सम्बन्धितम् अस्ति ।

2. इदं भाषाशिक्षणस्य विषये सिद्धान्तानां परिकल्पनानां च वास्ताविकं च अनुभवेन सम्बन्धितमस्ति । 1. a उपागमं परिभाषते b विधिं परिभाषते । 2. a तथा b उभौ भाषाशिक्षणस्य विषये उपागमं परिभाषेते ।

3.a तथा b उभौ भाषाशिक्षणस्य विधिं परिभाषेते |

 4.a तथा b उभौ उपागमं अथवा विधिं न परिभाषेते ।

उत्तर:- (1) उपागम के विषय में और विधि के विषय में 1. यह भाषा प्रकृतियों के भाषा शिक्षण के साथ सम्बन्धित है। 2. यह भाषा शिक्षण के विषय में सिद्धान्तों और परिकल्पनाओं के वास्तविक अनुभव के साथ सम्बन्धित है। उपागम से अभिप्राय शिक्षण करने के तरीके से है। जबकि विधि भाषा शिक्षण के विषय में सिद्धांतों और परिकल्पनाओं के वास्तविक अनुभव से सम्बन्धित होती है। अतः उपागम के विषय में a और विधि के विषय में b कथन सत्य है।

 153. के शब्दाः लेखने, भाषणे च प्रयुज्यन्ते ?

1. उत्पादकशब्दकोशः (productive vocabulary)

 2. ग्रहणशीलः (receptive) शब्दकोशः

3. निष्क्रियशब्दकोशः (passive vocabulary)

4. कार्यशब्दाः (action words)

 उत्तर:- (1) उत्पादक शब्दकोश (productive vocabulary) के शब्दों का लेखन में और भाषण में प्रयोग किया जाता है।

 154. ताः क्रियाः याः व्याकरणनियमान् वास्तविक व्यावहारिकसम्भाषणेन योजयन्ति कथ्यन्ते 

1. व्याकरणस्य विवरणात्मक ज्ञानम् |

2. शब्दरूपात् अर्थं प्रति गतिः ।

3. प्रकरणसम्बद्धव्याकरणम् |

4. शब्दरूपकेन्द्रितव्याकरणम् ।

 उत्तर:- (3) वे क्रियाएं जो व्याकरण नियमो को वास्तविक व्यावहारिक सम्भाषण में जोड़ती हैं ‘प्रकरण सम्बद्ध व्याकरण’ कहलाती हैं |

 155. काचिद् अध्यापिका षष्ठीकक्षायाः स्वछात्रान् लेखनकार्यं ददाति । एतादृशं लेखनं कस्यां श्रेण्यां गण्यते ? “चतुर्णां समूहे विचारोत्तेजनं कुरुत, विचारविन्यासं कुरुत, रूपरेखाः सज्जी कुरुत, तदा सुन्दरलेखस्य प्रलेखं सज्जी कुरुत, यत्र द्वौ तर्को पक्षे तथा द्वौ विपक्षे स्याताम् । विषयोऽस्ति विद्यालयीय छात्राणां कृते अन्तर्जालीया शिक्षा’

 1. वर्णात्मकलेखनम्

2. तर्कसंगतलेखनम्

 3. व्यक्तिगतलेखनम्

 4. आख्यानात्मकलेखनम्

 उत्तर:- (2) कोई अध्यापिका छठी कक्षा के अपने छात्रों को लेखन कार्य देती है। यह लेखन तर्कसंगत लेखन की श्रेणी में गिना जाता है।

 156. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्राचीन सांस्कृतिक भाषाणाम् अध्ययन केन प्रकारेण संस्तौति ?

1. त्रिभाषा सूत्रान्तर्गते

 2. प्रारम्भिकशिक्षणवर्षेषु भाषारूपेण

 3. अतिरिक्तविकल्परूपेण

 4. आधुनिकभाषारूपेण

 उत्तर:- (3) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्राचीन सांस्कृतिक भाषाओं के अध्ययन की सिफारिश एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में करती है।

157. कश्चित् पाठकः समाचारपत्रं पठति । स पूर्वदिने क्रिकेटप्रतियोगितासूचनां ज्ञातुमिच्छति। एतादृशं पठनं किं कथ्यते ?

 1. विहंगावलोकनम्

2. परिवीक्षणम्

3. मनोरञ्जनार्थ पठनम्

 4. सूचनार्थं पठनम्

 उत्तर:- (2) कोई पाठक समाचारपत्र पढ़ता है। वह एक दिन पहले की क्रिकेट प्रतियोगिता की सूचना को जानने की इच्छा करता है। इस प्रकार का पठन परिवीक्षण पठन कहा जाता है। परिवीक्षण में चीजों को भली-भाँति देखा और समझा जाता है। 158. काचिद अध्यापिका षष्ठीकक्षायाः स्वछात्रान् एका लघुकथां पठितुं तथा तस्यां वर्णिताः घटनाः विचारान् च क्रमेण लेखितुं कथयति। इयं क्रिया का कथ्यते ?

1. कथायाः सारलेखनम् ।

2. घटनानां सारलेखनम्।

 3. उपपाठस्य निर्माणम् ।

 4. कथायाः समीक्षा |

उत्तर:- (3) कोई अध्यापिका छठी कक्षा के अपने छात्रों को एक लघुकथा पढ़ने के लिए देती है तथा उसमें वर्णित घटनाओं और विचारों को क्रम से लिखने के लिए कहती है। यह क्रिया ‘उपपाठ का निर्माण’ कही जाती है।

 159. सामग्र्याः विकासे शिक्षाशास्त्रीय अनुभवस्य किं योगदानम् ?

 1. भाषाशिक्षाशास्त्रस्य विकासाय क्रियाः कार्याणि च ।

 2. सामग्र्यां शिक्षाशास्त्रस्य सन्निवेशः येन शिक्षकः शिक्षाशास्त्रं प्रयुज्यात् ।

 3. कक्षायां प्रयोगाय शिक्षाशास्त्रीय प्रविधीनां सङ्कलनं शिक्षणस्य च परिणामज्ञानम् |

4. कक्षायां अध्ययन-अध्यापनाय अतिरिक्तपठनसामग्र्याः प्रयोगः ।

उत्तर:- (2) समग्र विकास में शिक्षा शास्त्रियों के अनुभव का योगदान समग्र शिक्षा शास्त्र का सन्निवेश है जो शिक्षक को शिक्षा शास्त्र के प्रयोग में लाये जाने के योग्य बनाता है। 160. अध्ययन परिणामाः

 1. शिक्षण-उद्देश्यैः सम्यक् संगच्छेयुः ।

2. शिक्षण उद्देश्यैः न संगच्छेयुः।

 3. छात्रान् सम्पूर्णविषयं ज्ञातुं सामर्थ्यवतः कुर्यु ।

4. छात्रान् भाषास्वरूपं ज्ञातुं निष्णातान् कुर्युः ।

उत्तर:- (1) अध्ययन का परिणाम और शिक्षण का उद्देश्य सम्पूर्ण रूप से निश्चित होते हैं।

161. सप्तमीकक्षायाः अध्यापिका स्वछात्रान् मासपर्यन्तं दूरदर्शनप्रस्तुतिं धारावाहिकं वा यथारुचिं दृष्टुं कथयति। तत्पश्चात् सा कथाखण्डानां संक्षेपं लेखितुं कथयति । इयं क्रिया का कथ्यते ?

 1. दतकार्यम्

2. समूहकार्यम्

3. संचारमाध्यमस्य अध्ययनम्

4. परियोजना कार्यम् (Project work)

उत्तर:- (4) सातवीं कक्षा की अध्यापिका अपने छात्रों को महीने भर दूरदर्शन पर प्रस्तुत होने वाले धारावाहिक को अपनी रुचि के अनुसार देखने के लिए कहती है। उसके बाद उसी कथाखण्ड को संक्षेप में लिखने के लिए कहती है। यह क्रिया परियोजना कार्य (Project work) कहा जाता

162. बोधपरिच्छेदस्य (Comprehension) पठनं किम् अस्ति ?

 1. अक्षराणां शब्दानां च उद्वाचन-प्रक्रिया ।

2. निष्कर्षकयोग्यतायाः प्रयोगं कृत्वा अर्थबोधप्रक्रिया |

 3. शुद्धोच्चारणस्य तथा ध्वनिभिः शब्दनिर्माणार्थं उच्चस्वरेण पठनम् ।

4. शब्दानां वाक्यानां च उद्वाचनं तथा लेखकस्य दृष्टिकोणज्ञानम् ।

उत्तर:- (2) बोधपरिच्छेद का पठन निष्कर्ष योग्यता का प्रयोग करके अर्थ को जानने की प्रक्रिया है। 163. काचिद् अध्यापिका स्वकक्षायां निम्नलिखितां क्रियां करोति – कश्चिद् लघुपाठः द्वयोः पृथकखण्डयोः विभाज्यते अथवा प्रत्येकं एकान्तरितवाक्यं युगलाय दीयते तथा प्रत्येकं छात्रः अपरं छात्रम् लेखयति । तदा ते सर्वं पाठं संशोधयन्ति । इयं क्रिया का कथ्यते 

1. परस्परं श्रुतलेखनम्

 2. वाक्यैः श्रुतलेखनम्

 3. व्याकरण-अनुवाद-श्रुतलेखनम्

4. प्रतिरचनं तथा व्याख्या

उत्तर:- (1) कोई अध्यापिका अपनी कक्षा में किसी लघुपाठ को ही अलग-अलग खण्डों में विभाजित करती है अथवा प्रत्येक एकान्तरित वाक्य को जोड़े बनाने के लिए देती है और प्रत्येक छात्र दुसरे छात्र को लिखवाता है । तब वे सभी पाठ का संशोधन करते हैं। इस क्रिया को ‘परस्पर श्रुतलेख’ कहते हैं।

164. भाषाशिक्षणे अवबोध्य-निविष्टिना (Comprehensible input) किं सूच्यते ?

1. विद्यार्थिनां स्व-आयु-अनुसारेण भाषा-अवबोधनम् ।

2. आयु-अनुसृत्य अवबोध्यं शिक्षणं पठनं च |

 3. विद्यार्थिनां स्वभाविक-भाषास्तराद् किंचिद् उन्नतभाषायां संलग्नत |

4. विद्यार्थिनां नवभाषातः परिचयः तान् अवबोध्यकर्तुं प्रयासः |

उत्तर:- (3) भाषा शिक्षण में अवबोध्य-निविष्टि (Comprehensible input) विद्यार्थियों की स्वभाविक-भाषा स्तर से कुछ उन्नतभाषा में संलग्नता को कहा जाता है। 165. दूतपठनेन किम् आशयः?

 1. अवबोधनार्थं शीर्षकपठनम्

3. सूचनार्थं पठनम्

 2. उच्चस्वरेण पठनम्

 4. अर्थज्ञानस्य कृते पठनम्

उत्तर:- (4) द्रुतपठन से आशय अर्थ ज्ञान के लिए पढ़ने से है। ये शीघ्रता से किया जाने वाला पठन है।

166. भाषाशिक्षणे बहिर्वेश-परिकल्पनया (Output hypothesis) किम आशयः?

 1. प्रदर्शन (performance) प्रयोजनेन विद्यार्थिनः भाषा-अवबोधनम्

2. प्रयोगार्थं भाषायाः भाषावैज्ञानिक-अवबोधः

3. बालः कथं शिक्षते इति शिक्षकानां अवबोधः AV

 4. विविधप्रयोजनेन विद्यार्थिनां भाषाप्रयोगस्य सामर्थ्यः

उत्तर:- (4) भाषा सीखने में बहिर्वेश परिकल्पना (Output hypothesis) का अर्थ विभिन्न उद्देश्यों के लिए छात्रों की भाषा का उपयोग करने की क्षमता से है। बाहरी वातावरण से जुड़ने से बालक भाषा प्रयोग करने में समर्थ हो जाता है।

167. शिक्षकः वृत्तपत्रात् एकं अनुच्छेदं चिनोति, विद्यार्थिनां समक्षम् अस्य द्विबारम् वाचनं करोति, तदन्तर सः तान् श्रवणमाश्रित्य तं अनुच्छेदं पुनर्रचनार्थं निर्दिशति ।

 1. अधोगामि प्रक्रमणम् (Top-down processing)

2. उर्ध्वगामि प्रक्रमणम् (Bottom-up processing)

3. रुपाधारित प्रक्रमणम् (Form-based processing)

4. सूक्ष्मस्तरीयम् भाषाप्रक्रमणम् (Micro level language processing)

 उत्तर:- (1) शिक्षक बड़े पत्र से एक पैराग्राफ चुनता है, इसे छात्रों के सामने दो बार पढ़ता है, और फिर छात्रों के सुनने के आधार पर उनसे पैराग्राफ को फिर से लिखने के लिए कहता है। इस प्रक्रिया को अधोगामि प्रक्रिया (Top-down processing) कहा जाता है।

 168. भाषा-निविष्टयः ये सूचनाकेन्द्रिताः भवन्ति ते ….सन्ति 

1. विषयवस्तु-केन्द्रिताः भाषानिविष्टयः

2. विद्यार्थिना कथं भाषा प्रयुज्यते

3. विद्यार्थिना निविष्टीनां प्रक्रमणम्

 4. व्याकरणस्य आयामाः ,शब्दकोषानां प्रयोगः, उच्चारणम् इत्यादयः

 उत्तर:- (1) भाषा इनपुट जो सूचना केंद्रित होते हैं, वे विषयवस्तु केंद्रित भाषा निविष्टियाँ होती है। 169. अरविन्दः काञ्चिद् शब्दान् अभिजानाति यदा सः शृणोति पठति च । सः तान् वाचनक्रमे लेखनक्रमे च प्रयोक्तुम न शक्नोति । एताः शब्दाः किं कथ्यन्ते ?

 1. ग्राही शब्दावली

2. उत्पादिका शब्दावली

3. लेखने, संभाषणे च प्रयुज्यमानाः शब्दाः

 4. संज्ञानात्मक-शास्त्रीय-भाषादक्षता(Cognitive Academic Language Proficiency ) कृते शब्दावली

उत्तर:- (1) अरविंद कुछ शब्दों को तब पहचानता है जब वह उन्हें सुनता और पढ़ता है वह उन्हें पढ़ने और लिखने के क्रम में उपयोग नहीं कर सकता। इन शब्दों को ग्रहणशील शब्दावली कहा जाता है।

170. व्याकरणिकसंरचनाविषये अवबोधनम् तस्याः प्रयोगः च

1. व्याकरणस्य प्रक्रियात्मकं ज्ञानम्

 2. व्याकरणस्य ज्ञानम्

3. भाषा-ज्ञानम्

 4. व्याकरणनियमानां अवबोधनम् अग्रिमे पुनर्प्रस्तुतिः च |

 उत्तर:- (1) व्याकरणिक संरचना के विषय में अवबोधन और उसका प्रयोग व्याकरण का प्रक्रियात्मक ज्ञान कहलाता है।

 171. अधोलिखितेषु प्रभावकारिलेखनकार्यं किम् भवेत् ?

1. सर्वैः विद्यार्थिभिः एक वैयक्तिककार्यं यतः लेखनम् सर्वथा वैयक्तिकम् स्यात् ।

 2. विद्यार्थिना समकालेव विचारणीयः लेखनीयः च अन्तिमवस्तुरुपेण ।

3. उत्कृष्टलेखकस्य अनुकरणम् यथाआवश्यकता पुनर्सजनम् च |

 4. समूहकार्यरुपेण सहयोगात्मकगतिविधिः वैयक्तिककार्ये परिवर्त्य च |

उत्तर:- (4) सामूहिक कार्य रूप से सहयोगात्मक गतिविधि को व्यक्तिगत कार्य में परिवर्तित करना। यह प्रभावी लेखन कार्य होगा। क्योंकि कोई भी सामूहिक कार्य करते समय व्यक्तिगत विकास की वृद्धि भी होती है।

172. लेखनस्य प्रभावकारिआकलनम् ध्यानं दद्यात्

1. विषयवस्तु(Content), व्याकरणनियमनः(Grammatical control) , सुसंगतिः (Coherence )च। 2. व्याकरणनियमनः , भाषायाः धाराप्रवाहिता च ।

 3. परिशुद्धता वर्तनी च।

 4. लेखनविषयः(Theme), वैशिष्ट्य म् (Characterisation), विषयवस्तु च ।

उत्तर:- (1) लेखन कार्य का प्रभावकारी आकलन विषयवस्तु, व्याकरण नियमन और सुसंगति की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

173. कुमारः उच्चारिते सति, पाठमध्ये वा विवक्षा’ इति शब्दं अभिज्ञातुम् शक्नोति किन्तु स्वयम् प्रयोक्तुम न शक्नोति। एवंविध शब्दावली किं कथ्यते ?

 1. सक्रिय शब्दावली

3. निष्क्रिय शब्दावली

2. क्लिष्टपदम्

4. नवपदम्

उत्तर:- (3) कुमार उच्चारण करते हुए या पाठ के बीच मे ‘विवक्षा शब्द को पहचान सकता है, लेकिन स्वयं इसका उपयोग नहीं कर सकता। ऐसी शब्दावली को निष्क्रिय शब्दावली कहा जाता

174. आधारभूत-अन्तव्यैक्तिक-सम्प्रेषणात्मक-कौशलेन (Basic Interpersonal Communicative Skills, BICS) किं अभिप्रायः?

 1. दैनन्दिन-अद्यतनप्रयोजनेनयुक्ता भाषा

2. संप्रेषणात्मकप्रयोजनेनयुक्ता भाषा

3. अमूर्तधारणार्थं विचारार्थं भाषा

 4. तकनीकि-सम्प्रेषणात्मक-परिवेशस्य कृते भाषा CADEMY

 उत्तर:- (1) आधारभूत अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण कौशल (Basic Interpersonal Communication Skills – BICS) का अभिप्राय दैनिक वार्तालाप में प्रयोग होने वाली भाषा से है।

 175. एकस्याः लघुकथायाः शिक्षणक्रमे उपपाठस्य ( Sub-text) निर्माणं भवति 

1. लघुकथायाः संक्षिप्तीकरणम् ।।

2. कथायाः घटनानां विचाराणां च क्रमबद्धश्रवणम् |

3. लघुकथामनुसृत्य विद्यार्थिषु लेखनाय सामर्थ्य निर्माणम् ।

 4. क्रमम् अविचार्य कथायाः घटनानां श्रवणम् ।

उत्तर:- (2) एक लघु कथा के शिक्षण क्रम में, एक उप-पाठ का निर्माण होता है जब कहानी में घटनाओं और विचारों को क्रमिक रूप से सुना जाता है ।

176. सञ्चयिनी मूल्याङ्कने (Portfolio assessment) अधोलिखितेषु किम् सम्मिलिताः?

1. विविधप्रविधिभिः दत्तकायैः च आकलन-परिष्कारस्य तन्त्रबद्धविधयः |

2. भाषाशिक्षणाय रुपात्मक-आकलनम(Formative assessment)

3. सुनिश्चितकालावधिमन्तरे विद्यार्थिना भाषाशिक्षणस्य दृष्टान्तानां तन्त्रबद्ध सङ्ग्रहणम् । 4. भाषाशिक्षणस्य संकलनात्मकं (Summative) रुपात्मकं च आकलनम् ।

 उत्तर:- (3) एक निर्दिष्ट अवधि के अंदर छात्र द्वारा भाषा शिक्षण के दृष्टांतो का व्यवस्थित संग्रह। सञ्चयिनी मूल्यांकन (Portfolio assessment) में शामिल है। पोर्टफोलियो मूल्यांकन को मूल्यांकन का प्रमाणिक रूप माना जाता है।

 177. ग्रन्थपाठे नियमानुसारेण यदृच्छया वा अपनीतानां शब्दानां स्थाने छात्रैः पदपूरणं यस्यां प्रक्रियायां क्रियते सा परीक्षा ।

1. रिक्तस्थानपूरणम्

 2. कलोसू (Cloze) विधानम्

3. शब्दसमापत्तिः

4. अवधारणम्

 उत्तर:- (2) ग्रन्थ पाठ के नियम के अनुसार स्वेच्छा प्रयुक्त शब्दों के स्थान पर छात्रों द्वारा वाक्यों की पूर्ति की प्रक्रिया क्लोज विधान के अन्तर्गत आती है।

 178. छात्रकेन्द्रितशिक्षाकक्ष्यायाःस्वरूपं किम्?

1. कठोरानुशासनम्

2. स्थिरोपवेशनव्यवस्था

3. क्रियाकलापवैविध्यम्

 4. सिद्धिमापनाय नियतपरीक्षा

उत्तर:- (3) छात्र केन्द्रित शिक्षा कक्षा का स्वरूप क्रिया कलाप की विविधता है। प्रायः छात्रों में कार्य-कौशल की विविधता पाई जाती है।

179. साहित्य-शिक्षणे किं सर्वाधिक महत्वपूर्णम्?

 1. शब्दकोषः

2. छन्दः ज्ञानम्

 3. सम्यक् उच्चारणम्

 4. पाठस्य सन्दर्भः

उत्तर:- (4) साहित्य शिक्षण पाठ के संदर्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

 180. यदि कोऽपि छात्र शारीरिक-मानसिक-इत्यादि – कारणेभ्यः विभिन्न गतिविधिषु सक्रियः न भवति तर्हि आवश्यकता अस्ति

 1. उपचारात्मककार्यस्य

 2. नूतनप्रकारेण कक्ष्याव्यावस्थापनस्य

 3. मानवीय-मूल्य-शिक्षायाः

4. विशिष्ट-शिक्षा-सिद्धान्तानाम्

 उत्तर:- (4) ऐसे छात्र जो शारीरिक-मानसिक इत्यादि कारणों से गतिविधियों में सक्रिय नहीं हैं तो उन्हें विशिष्ट शिक्षा सिद्धान्त की आवश्यकता होती है।

 181. एका अध्यापिका रचनात्मकमल्याङ्कनकार्यार्थं छात्रेभ्यः लघुकथालेखनसम्बद्धकार्य प्रयच्छति। अस्य कार्यस्य मूल्याङ्कनार्थं किं सर्वाधिक महत्त्वपूर्णम्?

 1. मौलिकी रचनात्मिका च कथासामग्री, रुचिकराणि चरित्राणि, व्याकरणनिष्ठभाषा च

 2. सुन्दरं शीर्षकं, समृद्धशब्दावली, शुद्धभाषाप्रयोगः च

 3. सचित्रं प्रभावयुक्तं प्रस्तुतीकरणम् । 4. सुस्पष्ट-स्वच्छ-सुन्दरः हस्तलेखः चित्राणि च

 उत्तर:- (1) एक अध्यापक रचनात्मक मूल्याङ्कन हेतु छात्रों को एक लघुकथा लेखन सम्बन्धी कार्य प्रदान करता है। इसमें छात्रों की मौलिक रचनात्मक अभिवृत्ति, रुचिकर चरित्र एवं व्याकरण निष्ठ भाषा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इससे छात्रों के मौलिकता, रुचि, चरित्र इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है।

 182. व्याकरणं कथं पाठनीयम्?

1. सन्दर्भगत-अभ्यासेन

3. लिखितः-कार्येण

 2. स्पष्ट-व्याख्यानेन

 4. नियमैः

 उत्तर:- (1) सन्दर्भित अभ्यास द्वारा व्याकरण को पढ़ना चाहिए। क्योंकि निरन्तर अभ्यास से व्याकरण का ज्ञान बढ़ जाता है।

 183. ‘अस्माकं छात्राः तथ्यानां संग्रहणे, व्यवस्थापने, प्रारूपनिर्माणे, सम्पादने, पुनदर्शने च समर्थाः भवेयुः । इत्यर्थं ते प्रेरयितव्याः।’ अस्मिन् कथने किं भाषाकौशलं निर्दिष्टम्?

 1. श्रवणम्

2. लेखनम्

 3. भाषणम्

4. वाचनम्

 उत्तर:- (2) छात्र तथ्यों के संग्रहण में, व्यवस्थापन में, प्रारूप निर्माण में, सम्पादन में और पुनदर्शन में समर्थ होना चाहिए। इस प्रकार उन्हें प्रेरित किया जाना चाहिए। इस कथन में भाषा कौशल की लेखन वृत्ति निर्देशित होती है।

184. काचित् बाला यदि मातृभाषया सम्यक्तया पठति, तर्हि…..

1. सा अनेकासु भाषासु पठितुं लेखितुं च शक्नोति।

2. सा सम्यक्तया पठितुं शक्नोति परन्तु मातृभाषया लेखितुं न शक्नोति

 3. सा स्वपठनकौशलस्य प्रयोगं द्वितीयभाषाया अधिगमे कर्तुं शक्नोति

4. सा स्वपठनकौशलस्य उपयोगं द्वितीयभाषायाः अधिगमे कर्तुं न शक्नोति

 उत्तर:- (4) कोई बाला यदि मातृभाषा में ठीक से पढ़ती है तो वह स्वपठन कौशल का उपयोग द्वितीय भाषा में अधिगम में करने में समर्थ नहीं हो सकती।

 185. एकस्य शब्दस्य ज्ञानं नाम ……….. A V

 1. तस्य मूलस्य ज्ञानम्

 2. तस्य रूपस्य ज्ञानम्

 3. तस्य अर्थस्य ज्ञानम्

 4. तस्य वर्तनीज्ञानम्

उत्तर:- (3) एक शब्द के ज्ञान का नाम है उसके अर्थ को जानना। क्योंकि शब्द के अर्थज्ञान से ही उसकी समझ हो पाती है।

 186. यदा विद्यार्थिनः पुरकपठनसामग्रीषु एकां लघुकथा पठन्ति, तदा ते

 1. कठिनशब्दानां वर्तनीज्ञानार्थं पठेयुः

2. लेखनकौशलस्य विकासार्थं पठेयु;

3. पठितांशे प्रत्येकं शब्दस्य अर्थज्ञानं कुर्युः 4. आनन्दानुमूत्यर्थं पठेयुः

 उत्तर:- (4) जब छात्र पूरक पाठ सामग्री के साथ एक लघुकथा को पढ़ते हैं तब वे आनन्द की अनुभूति होगी- इस अर्थ में अध्ययन करते हैं।

 187. यात्रावृत्तम् एका विधा अस्ति

1. कवितायाः

2. समीक्षायाः

 3. असम्बद्धनिबन्धस्य

4. साहित्यस्य

उत्तर:- (4) ‘यात्रावृत्त’ साहित्य की एक विधा है। इसी तरह संस्मरण, स्मृति रेखायें भी इसी के अन्तर्गत आती हैं।

188. सर्वेषां बालानां भाषाधिग्रहणक्षमता जन्मजाता एव अस्ति इति केन विदुषा उक्तम्?

1. वायगोत्स्की (Vygotsky)

2. नोम चॉमस्की (Noam Chomsky)

3. स्टिफेन क्रशन (Stephen Krasben)

4. बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner)

उत्तर:- (2) ‘नोम चामस्की’ विद्वान के अनुसार भाषा अधिग्रहण के सम्बन्ध में यह विचार है “सभी बालकों की भषा अधिग्रहण की उनकी क्षमता जन्म से ही प्राप्त होती है अथवा जन्म जात ही है।”

189. भाषाशिक्षणे अधिगमसामग्रयाः (Learning material) अतिमुख्या समस्या अस्ति

 1. अधिगमसामग्र्याः कठिनबिन्दूनाम् उपरि उचितविवरणम्

 2. अध्यापने अध्यापकस्य न्यूनश्रमेण कार्यसिद्धिः

 3. अल्पसमये अधिकविषयस्य उपलब्धिः

4. पाठं प्रति विद्यार्थिनां श्रद्धावर्धनम्

उत्तर:- (1) भाषा शिक्षण में अधिगम सामग्रियों की मुख्य समस्या है – अधिगम सामग्री के कठिन बिन्दुओं पर उचित विवरण को उपलब्ध कराना।

190. कौशल-उद्देश्येषु (Skill objectives) किं निम्नलिखितं सम्बद्धं नास्ति?

 1. श्रवणम्

 2. भाषायाम् आसक्तिः

 3. पठनम्

4. लेखनम्

 उत्तर:- (2) कौशल उद्देश्यों में श्रवण (सुनना), पढ़ना तथा लिखना आदि का सम्बद्ध कौशल उद्देश्य के अन्तर्गत आते हैं, जबकि भाषाओं में आसक्ति का सम्बद्ध कौशल उद्देश्य में नहीं

 191. ‘अर्थज्ञानद्वारा सम्प्रेषणक्षमता-विकासः’ इत्यनेन अभिप्रायः अस्ति

 1. व्याकरणात्मकी संरचना

 2. शङ्का-निवारणार्थं शिक्षकैः सह वार्ता पाठ्यक्रमस्य च स्पष्टीकरणम्

3. शब्दार्थन् प्रयोगान् च ज्ञातुं शब्दकोशस्य उपयोगः 4. अवबोधनार्थं सूचनायाः आदान प्रदानञ्च, स्पष्टीकरणं पुनर्रचना च

उत्तर:- (4) अर्थज्ञान द्वारा सम्प्रेषण क्षमता का विकास होता है। इससे अवबोधन की सूचना के आदान-प्रदान स्पष्टीकरण एवं पुनर्रचना का विकास होता है।

 192. व्याकरणात्मकम् अनुदेशनं तदैव स्वाभाविकं मन्यते यदा।

1. लेखनात् भाषणात् वा पूर्वं व्याकरणाभ्यासार्थं प्रयत्नाः क्रियन्ते

2. अध्यापकैः अल्पकालिक-व्याकरणकक्ष्या स्वीक्रियते

 3. छात्राः स्वयमेव लेखन-भाषण-समये सजगाः भूत्वा त्रुटि संशोधनम् अपि कुर्वन्ति

 4. अध्यापकाः निरन्तरं सिद्धान्त-पाठने संलग्नाः भवन्ति

उत्तर:- (3) व्याकरणात्मक अनुदेशन तभी स्वाभाविक रूप से माना जाता है जब छात्र स्वयं ही लेखन भाषण के समय सजग होकर त्रुटियों का संशोधन भी करते हैं।

 193. मौल्याङ्कनं नाम

 1. लक्ष्यसिद्धिमापनम्

 3. वार्षिकी परीक्षा

2. रचनात्मिका संकलनात्मिका च परीक्षा

4. कक्ष्यापरीक्षया सह आकलनैकीकरणम्

उत्तर:- (1) मूल्याङ्कन का नाम लक्ष्य सिद्धि मापन होता है।

 194. विशिष्टच्छात्राणां बोधनाय

 1. मुख्यधारायामेव प्रवेश्य अन्यैः छात्रैस्सह बोधनं कर्तव्यम्

 2. तेभ्यो विशिष्टपाठचर्या कल्पनीया

 3. पृथक् तेषां परीक्षा भवेत्

 4. ते विशेषशालासु अध्यापनीयाः

उत्तर:- (1) विशिष्ट छात्रों की जानकारी हेतु मुख्य धारा में प्रवेश करके छात्रों के साथ जानकारी प्राप्त करना चाहिए।

195. छात्रस्वायत्तता अनेन प्रोत्साहिता भवति

 1. कक्ष्यायां सर्वे च्छात्राः पर्यायेण नायकाः क्रियन्ते इति विधानेन ।

 2. छात्रेषु अनुशासनस्य उपनिक्षेपणेन

3. स्वमौल्याङ्कने सहाध्याय्याकलने च छात्राणां समावेशनेन

4. असकृत् गृहाध्ययने नियोजनेन

 उत्तर:- (3) छात्र स्वायत्तता को अनेक प्रकार से प्रोत्साहित किया जा सकता है जिसमें स्वमूल्यांकन करने में छात्रों को समावेशित किया जा सकता है।

 196. व्याकरण-शिक्षणार्थं किं सर्वाधिक महत्वपूर्णम्?

1. नियमानां स्मरणम्

 2. विभिन्नसन्दर्भेषु पाठ्यबिन्दूनाम् अभ्यासः

 3. स्वच्छ-सुन्दर-लेखः

4. जीवन-कौशलानि

 उत्तर:- (2) व्याकरण शिक्षण के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है विभिन्न प्रकार के सन्दर्भो में पाठ्य बिन्दु का अभ्यास करना ।

197. पाठ्यवस्तु-निहित विभिन्नशब्दानां साहाय्येन नूतनानाम् अपरिचितानां शब्दानाम् अर्थज्ञानप्रक्रिया केन कौशलेन सम्बद्धा?

 1. श्रवणेन

 2. भाषणेन

3. पठनेन

4. लेखनेन

 उत्तर:- (3) जब विद्यार्थी पाठ्यवस्तु आधारित शब्दों के आधार पर नये, अपरिचित शब्दों के अर्थ ज्ञान को समझने का प्रयास करता है, तो वह पठन क्रिया द्वारा शब्दार्थ को समझता है, अतः पठन क्रिया नये व अपरिचित शब्दार्थ को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

198. भाषण-कौशल-मूल्याङ्कनार्थम् अनिवार्यम्

1. सम्भाषणम्

2. निरन्तरं श्रवणम्

3. संवाद-लेखनम्

 4. भावानुगुणं पाठ्यवस्तुनः विश्लेषणम्

उत्तर:- (1) भाषण कौशल मूल्याङ्कन के लिए सम्भाषण अत्यधिक आवश्यक है। सम्भाषण का अर्थ है समान रूप से भाषण करना।

 199. नटानां सूक्तसमूहवाचकपदम्?

 1. पात्रः (Characters)

2. अध्यापकवृन्दः

3. समूहः

 4. जनपदः

 उत्तर:- (1) टानां सूक्तसमूहवाचक पद पात्र को कहा जाता है। नाटकों में नट पात्र होते हैं जैसे सूत्रधार, यह नाटक का प्रारम्भकर्ता और रंगमंच का अध्यक्ष होता है तथा नटी स्त्री-पात्र है जो सूत्रधार की स्त्री होती है।

200. कः प्रकारात्मकः शब्दः (Functional word)?

1. किमपि न

2. रचनात्मक

 3. विक्षिप्त

 4. सर्वे

 उत्तर:- (2) रचनात्मक शब्दों को प्रकारात्मक शब्द कहते हैं। शब्दों को प्रकारात्मक शब्द नहीं कह सकते हैं और न ही विक्षिप्त को प्रकारात्मक शब्द कहा जाता है। अतः प्रकारात्मक शब्द रचनात्मक होते हैं।

 

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