CGPSC सहायक संचालक सिलेबस 2022 PDF | CGPSC Assistant Director Syllabus

CGPSC सहायक संचालक (योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) सिलेबस 2022 | CGPSC Assistant Director Syllabus PDF Download

दोस्तों आप यहाँ से CGPSC सहायक संचालक Syllabus 2022 Exam Pattern , Selection Process के  PDF Download कर सकते हो 

दोस्तों जैसा की आपको पता ही होगा की CGPSC ने सहायक संचालक का नोटिफिकेशन जारी किया गया है जिसके तैयारी में बहुत सारे छात्र महीनों से लगे हुए थे और उन्ही में से कुछ छात्र मुझसे CGPSC सहायक संचालक Syllabus 2022 & Question Paper की मांग कर रहे थे इसलिए ALLGK.IN के तरफ से सभी छात्रों के लिए बिलकुल Free में  CGPSC सहायक संचालक Syllabus PDF 2022 को  Hindi & English में उपलब्ध कराया गया है जिसे आप यहाँ से Download कर सकते है। 

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CGPSC Assistant Director Syllabus PDF Download

CGPSC सहायक संचालक Selection Process & Exam Pattern 

दोस्तों मैं आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूंगा कि CGPSC सहायक संचालक का Selection Process मुख्यतः 2 चरण में पूर्ण होता है जिसके बारे में नीचे मैंने पूरे विस्तार से समझाया है। 

CG Sahayak Sanchalak Syllabus 2022

विषय का नामप्रश्नअंक)
छत्तीसगढ़ का सामान्य ज्ञान50 100 
संबंधित विषय 100200

“परीक्षा योजना  Part 1 

(1) चयन दो चरणों में होगी, प्रथम चरण परीक्षा एवं द्वितीय चरण साक्षात्कार।

परीक्षा 300 अंक

साक्षात्कार – 30 अंक

कुल – 330 अंक

(2) परीक्षा  

परीक्षा: परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के एक प्रश्न पत्र निम्नानुसार होगाः

  • प्रश्न पत्र प्रश्नों की संख्या – 150
  • 3:00 घंटे
  • अंक 300

भाग 1 – छत्तीसगढ़ का सामान्य ज्ञान – 50 प्रश्न (100 अंक)

भाग 2 – संबंधित विषय – 100 प्रश्न (200 अंक)

कुल – 150 प्रश्न (300 अंक)

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(3) परीक्षा के प्रश्न पत्र वस्तुनिष्ठ (बहु विकल्प प्रश्न) प्रकार के होंगे, प्रत्येक प्रश्न के लिये चार संभाव्य उत्तर होंगे जिन्हें अ, ब, स, और द में समूहीकृत किया जाएगा जिनमें से केवल एक उत्तर सही/ निकटतम सही होगा, उम्मीदवार को उत्तर पुस्तिका में उसके द्वारा निर्णित सही/निकटतम सही माने गये अ, ब, स या द में से केवल एक विकल्प का चयन करना होगा।

(4) प्रश्न पत्र में ऋणात्मक मूल्यांकन का प्रावधान होगा। ऋणात्मक मूल्यांकन हेतु निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाएगाः – 

MO = MxR- ⅓ Mxw

जहां MO = अभ्यर्थी के प्राप्तांक, M = एक सही उत्तर के लिए निर्धारित प्राप्तांक अथवा प्रश्न विलोपित किए जाने की स्थिति में पुनः निर्धारित प्राप्तांक, R= अभ्यर्थी द्वारा दिए गए सही उत्तरों की संख्या तथा W= अभ्यर्थी द्वारा दिए गए गलत उत्तरों की संख्या है। उक्त सूत्र का प्रयोग कर प्राप्तांकों की गणना दशमलव के चार अंकों तक की जाएगी।

(5) पाठ्यक्रम की जानकारी परिशिष्ट-दो में दी गई है।

लिखित/कौशल/अनुवीक्षण परीक्षा में अनारक्षित तथा अनारक्षित उपवर्ग के अभ्यर्थियों हेतु प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा। आरक्षित वर्ग एवं आरक्षित उपवर्ग के अभ्यर्थियों हेतु प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम 23 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य होगा अन्यथा उसे अनर्ह घोषित किया जाएगा। 

(7) साक्षात्कार:– साक्षात्कार के लिए कोई अर्हकारी न्यूनतम अंक नहीं

(8) साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किये जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या, विज्ञापन में दिए गए रिक्त स्थानों की संख्या से लगभग तीन गुनी होगी। केवल वे उम्मीदवार, जिन्हें आयोग द्वारा परीक्षा में अर्ह घोषित किया जावेगा, वे साक्षात्कार के लिए पात्र होंगे।

(9) आयोग के प्रक्रिया नियम-2014 (यथा संशोधित) के अनुसार विज्ञापित पद हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या के आधार पर यदि आयोग द्वारा सीधे साक्षात्कार लिए जाने का निर्णय लिया जाता है तो, साक्षात्कार कुल 100 अंकों का होगा तथा साक्षात्कार में न्यूनतम 33 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के मामले में न्यूनतम 23 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

(10) चयन सूची:- उम्मीदवार का चयन परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर गुणानुक्रम एवं प्रवर्गवार किया जाएगा।

(11) चयन प्रक्रिया आयोग के प्रक्रिया नियम-2014 के अनुसार प्रावधानित होगी।

CGPSC Sahayak Sanchalak 2022 in Hindi pdf

सिलेबस  भाग- 2 

  1. छत्तीसगढ़ का सामान्य ज्ञान
  2. छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ का योगदान।
  3. छत्तीसगढ़ का भूगोल, जल, खनिज संसाधन, जलवायु एवं भौतिक दशाये।
  4. छत्तीसगढ़ की साहित्य, संगीत, नृत्य, कला एवं संस्कृति।
  5. छत्तीसगढ़ की जनजातियां, बोली, तीज एवं त्यौहार।
  6. छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था, वन एवं कृषि ।
  7. छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा, स्थानीय शासन एवं पंचायती राज ।
  8. छत्तीसगढ़ में मानव संसाधन एवं ऊर्जा संसाधन ।
  9. छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समसामयिक घटनाएं।

PART – General Knowledge of Chhattisgarh

  1. History of Chhattisgarh and contributions of Chhattisgarh in free dom struggle.
  2. Geography, water, mineral resources, clirnate and physical conditions
  3. Literature, music, dance, art and culture of Chhattisgarh.
  4. Tribals, dialects, teej and festivals ofChhattisgarh.
  5. Economy, forest and agriculture of Chhattisgarh.
  6. Administrative structure of Chhattisgarh, local government and Panchayati Raj.
  7. Human Resources and energy resources in Chhattisgarh.
  8. Education, health and contemporary events in Chhattisgarh

भाग-2 : संबंधित विषय :

मांग का सिद्धांत – मूलाधार उपयोगिता का सिद्धांतः सीमांत उपयोगिता और मांग, उपभोक्ता अधिशेष अनधिमान वक्र, विश्लेषण और उपयोगिता कार्य, मूल्य आय और स्थापना प्रभाव, स्लूटस्की प्रमेय और मांग चक्र, प्रकटित अधिमान उपागम, वयात्मक और प्रत्यक्ष उपयोगिता कार्य और व्यय फलन, जोखिम और अनिश्चयता के अंतर्गता विकल्प, पूर्ण सूचना के सरल क्रियाकलाप, नैश का संतुलन की अवधारणा। 

उत्पादन का सिद्धांत-उत्पादन के कारण और उत्पादन, फलन के रूप के. काय-डगलस, स्थिर लोथ स्थनापन्नता और नियत गुणांक प्ररूप, ट्रांसलोग उत्पादन फलन, प्रतिफल के नियम, प्रतिफल के अनमाप, उत्पादन के प्रतिफल संबंधी कारक, द्वयात्मक तथा लागत फलन, फर्मों की उत्पादक क्षमता का माप, तकनीकी एवं निर्धारण क्षमता, आंशिक संतुलन बनाम सामान्य संतुलन उपागम-फर्म तथा उद्योग का संतुलन 

वितरण एवं मूल्य का सिद्धांत – नव क्लासिकी वितरण के सिद्धांतः कारकों की कीमत निर्धारण के लिए सीमांत उत्पादकता सिद्धांत, कारकों का योगदान तथा उनके समूहन की समस्या-आयलर प्रमेय, अपूर्ण स्पर्धा के अंतर्गत कारकों का मूल्य निर्धारण, एकाधिकार और विपक्षीय एकाधिकार, रिकार्ड, मावर्स, काल्डोर, कैलेवी को समिष्ट वितरण सिद्धांत, विभिन्न बाजार व्यवस्थाओं के अंतर्गत कीमत निर्धारण, सार्वजनिक क्षेत्र कीमत निर्धारण, सीमांत लागत कीमत निर्धारण चरम भार निर्धारण प्रति आर्थिक सहायता मुक्त कीमत निर्धारण तथा औसत लागत कीमत निर्धारण, मार्शल तथा वालरसन की स्थिरता विश्लेषण, अपूर्ण सूचना तथा व्यावहारिक संकटग्रस्त समस्याओं सहित कीमत निर्धारण।

अर्थशास्त्र की गुणात्मक पद्घतियां – 1. विभेदीकरण और एकीकरण तथा अर्थशास्त्र में उनका अनुप्रयोग, इष्टतमीकरण तकनीक, सेट्स, आव्यूह | तथा अर्थशास्त्र में उनका अनुप्रयोग, रैखिक बीजगगित और अर्थशास्त्र में रैखिक प्रोग्रामन और लिओनटिफ का निविष्ट-उत्पादन प्रदर्श

2 सांख्यकी एवं अर्थमितीय विधिया : केन्द्रीय प्रवृत्ति और परिक्षेपण का मापन, सहसंबंध और समाश्रयण, काल श्रेणी, सूचकांक, प्रतिचयन एवं सर्वेक्षण विधियां, प्राक्कल्पना परीक्षण, सरल अप्राचलिक परीक्षण, विभिन्न रैखिक एवं अरैखिक फलनों पर आधारित वक्रोरेखन न्यूनतम विधियां और अन्य बहुचर विश्लेषण (केवल अवधारणा तथा परिणामों की व्यवस्था) प्रसरण का विश्लेषण, कारक विश्लेषण, मुख्य घटक विश्लेषण, विभेदी विश्लेषण, आय वितरण, पैरेटो का वितरण नियम, लघुगणक प्रसामान्य वितरण, आय असमानता का मापन, लौरेज वक्र तथा गिनी गुणांक, एकचर और बहुचर परावर्तन विश्लेषण अपारंपरिक स्वतः सह-संबंध और मल्टी कोलनियरिटी की समस्याएं और समाधान। 

आर्थिक विचारधारा – वाणिज्यवादी भू-अर्थशास्त्री, क्लासिकी, मार्क्सवादी, नव क्लासिकी. केंस और मौद्रिकवादी स्कूल विचारधारा

राष्ट्रीय आय तथा सामाजिक लेखाकरण की अवधारणा – राष्ट्रीय आय का मापन, सरकारी क्षेत्र तथा अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन पर आधारित राष्ट्रीय आय के रोजगार और उत्पादन के तीन प्रचलित मापों के अंतः संबंध, पर्यावरणीय प्रतिफल, ग्रीन राष्ट्रीय आय

राज्य सकल घरेलू उत्पाद – परिभाषा एवं अवधारणाएं, आर्थिक क्षेत्र का विवरण, जैसे-कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र। छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में राज्य सकल घरेलू उत्पाद

लोक वित्त – कराधान के सिद्धांतः इष्टतम कर और कर सुधार, कराधान के सूचक । सार्वजनिक व्यय के सिद्धांत : सार्वजनिक व्यय के उद्देश्य और प्रभाव, सार्वजनिक व्यय नीति और सामाजिक लागत लाभ विश्लेषण, सार्वजनिक निवेश निर्णयों के मानदंड, छूट की सामाजिक दर, निवेश के छाया मूल्य, अकुशल और विदेशी मुद्रा, बजटीय घाटा, सार्वजनिक ऋण पबंधन सिद्धांत । औद्योगिक अर्थशास्त्र – बाजार ढांचा, फर्मों का संचालन और कार्य निष्पादन, उत्पाद विभेदीकरण और संकेन्द्रण, एकाधिकारात्मक मूल्य सिद्धांत और अल्पाधिकारत्मक अंतरनिर्भरता और मूल्य निर्धारण प्रविष्टिनिवारक मूल्य निर्धारण, स्तर निवेश निर्णय और फर्मों का व्यवहार, अनुसंधान और विकास तथा नवीन प्रक्रिया, बाजार ढांचा और लाभकारिता, फर्मों की लोकनीति का विकास। 

राज्य बाजार एवं नियोजन– विकासशील अर्थव्यवस्थ में नियोजन, नियोजन विनियमन और बाजार, सूचक नियोजन, विकेन्द्रीकृत नियोजन 

पर्यावरण अर्थशास्त्र – पर्यावरणीय रूप से धारणीय विकास, रियो प्रक्रिया 1992 से 2012. ग्रीन सकल घरेलू उत्पाद, समेकित पर्यावरणीय और आर्थिक लेखाकरण की संयुक्त राष्ट्र संघ की पद्धति, पर्यावरणीय मूल्य उपयोगकर्ताओं और गैर-उपयोगकर्ताओं का मूल्य, मूल्यांकन अभिकल्प और प्रकटित अधिमानक पद्धतियां, पर्यावरणीय नीतिगत लेखों का प्रकल्पः प्रदूषण कर और प्रदूषण अनुशा, स्थानीय समुदायों द्वारा सामूहिक कार्रवाई और अनौपचारिक निवियमन निःशेषणीय और नवीकरणीय संसाधनों के सिद्धांत । अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण करार, जलवायु परिवर्तन की समस्याएं. क्वोटो प्रोटोकाल, 2017 तक के करार/समझौते. बाली कार्य योजना, व्यापार योग्य अनुज्ञा और कार्यन कर, कार्बन बाजार और बाजार तंत्र जलवायु परिवर्तन और ग्रीन जलवायु निधि ।

संघीय वित्त – राज्यों के राजकोषीय और वित्तीय अधिकारों के संबंध में संवैधनिक प्रावधान, वित्त आयोग और करों में भागीदारी के विषय में उनके सूत्र. सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का वित्तीय पक्षा, संविधान के 73 वें एवं 74 वें संशोधनों का वित्तीय पक्ष । बजट निर्माण एवं राजकोषीय नीति – कर, व्यय बजटीय घाटा, पेंशन एवं राजकोषीय सुधार, लोक ऋण प्रबंधन और सुधार, राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, भारत में काला धन तथा समानान्तर अर्थव्यवस्थ, अर्थव्यवस्था परिभाषा, आकलन, उत्पत्ति, परिणाम एवं उपचार।

श्रम अर्थशास्त्र – रोजगार, बेरोजगारी तथा आंशिक रोजगार, औद्योगिक संबंध तथा श्रम कल्याण-रोजगार सृजन के लिए रणनीति-नगरीय श्रम बाजार तथा अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार, राष्ट्रीय श्रम आयोग की रिपोर्ट, श्रम संबंधी सामाजिक मुददे जैसे बाल श्रम, बंधुआ मजदूर, अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानक और इस के प्रभाव ।

मुद्रा एवं बैंकिंग के मांग – वित्तीय क्षेत्र संबंधी सुधार, भारतीय मुद्रा बाजार की व्यवस्था, रिर्जव बैंक, वाणिज्यिक बैंकों, विकास वित्त पोषण संस्थाओं विदेशी बैंक तथा बैंकात्तर वित्तीय संस्थाओं की बदलती भूमिकाएं, भारतीय पूजी बाजार तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड सेवी वैश्विक वित्तीय बाजार का विकास तथा भारतीय वित्त से इसके संबंध, भारत में वस्तु बाजार, स्पोट और वायदा बाजार, एफएमसी की भूमिका ।

मुद्रास्फीति का सिद्धांत – परिभाषा, प्रवृत्तियां, आकंलन परिणाम और उपाय (नियंत्रण) थोक मूल्य सूचकांक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, अवयव और प्रवृत्तियां।

गरीबी और असमानता की समस्या – भारत में असमानता तथा निर्धनता उपायों का आकलन, सरकारी उपायों का मूल्यांकन, विश्व परिप्रेक्ष्य में भारत का मानव संसाधन विकास। भारत की जनसंख्या नीति तथा विकास।

भुगतान संतुलन – भुगतान संतुलन में विकृति, समायोजन तंत्र, विदेश व्यापार गुणक, विनियम दरें, आयात एवं विनियम नियंत्रण तथा बहुत विनियम दरें, भुगतान संतुलन के आईएस-एलएम तथा मंडेल फ्लेमिंग मॉडल। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार -भारत के विदेश व्यापार की प्रमुख विशेषताएं, व्यापार की संरचना, दिशा तथा व्यवस्था व्यापार नीति संबंधी अभिनव परिवर्तनभुगतान संतुलन, प्रशुल्क, टैरिफ नीति, विनिमय दर तथा भारत और विश्वव्यापार संगठन की अपेक्षाएं, द्विपक्षीय व्यापार करार और उनकेनिहितार्थ।

आर्थिक वृद्धि और विकास – आर्थिक वृद्धि एवं विकास की अवधारणा उनका मापनः अल्प विकसित देशों की विशेषताएं तथा उनके विकास के अवरोध-वृद्धि. गरीबी और आय वितरण, वृद्धि के सिद्धांतः क्लसिकी उपागमः एडमस्मिथ, मार्क्स एवं शुम्पिटर-नव क्लासिकी उपागम, रॉबिन्सन, सोलो, कॉल्डोर एवं हैरोड डोमर  आर्थिक विकास के सिद्धांत, रोस्टॉय, रोसेन्स्टीन रोडन, नर्क्स, हिर्शचमन, लीवेल्सटिन एवं आर्थर लेविरा, एमिन एवं फ्रैंक (आश्रित विचारधारा) राज्य तथा बाजार की अपनी-अपनी भूमिकाएं, सामाजिक विकास का उपयोगिवादी और कल्याणवादी उपागम तथा एके. सेन की समालोचना। आर्थिक विकास के लिए लेन की क्षमता उपागम । मानव विकास सूचकांक । जीवन सूचकांक की भौतिक गुणवत्ता और मानव गरीबी सूचकांक, अंर्तजात वृद्धि सिद्धांत की मूल बातें।

कृषि अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास – प्रौद्योगिकी एवं संस्थाएं : भूमि संबंध तथा भूमि सुधार, ग्रामीण ऋण, आधुनिक कृषि निविष्टियां तथा विपणन, मूल्यनीति तथा उत्पादान-वाणिज्यकरण तथा विशाखन। निट निता प्रशमन कार्यक्रम सहित सभी ग्रामीण विकास कार्यक्रम सामाजिक एवं आर्थिक आधारभूत संरचना का विकास तथा नवीन ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।

रोजगार का सिद्धांत – क्लासिकी सिद्धांत एवं नव-क्यासिकी उपागम। संतुलन क्लासिकी के अंतर्गत विश्लेषण और नव-क्लासिकी विश्लेषण। रोजगार और उत्पादन कीन्स का सिद्धांत। कीन्सोत्तर विकास। वित्तीय लेखा एवं प्रबंधन – लेखांकन का अर्थ और दायरा, लेखांकन के उद्देश्य, लेखांकन की शाखाएं, लेखांकन के सिद्धांत, लेखांकन लेनदेनः लेखांकन चक्र, डेबिट एवं क्रेडिट के जर्नल नियम, संयुक्त जर्नल प्रविष्टिी, प्रारंभिक प्रविष्टी, जर्नल एवं लेजर के बीच संबंध, पूंजी एवं

राजस्वः आय और व्यय का वर्गीकरण और रसीद । अंतिम लेखा, परीक्षण बैंलेस, विनिर्माण खाता, ट्रेडिंग खाता, लाभ और हानि खाता, बैलेंस शीट। समायोजन प्रविष्टि। 

मुद्रा एवं बैंकिंग – वित्तीय क्षेत्र संबंधी सुधार, भारतीय मुद्रा बाजार की व्यवस्था, रिर्जव बैंक, वाणिज्यिक बैंकों, विकास वित्त पोषण संस्थाओं विदेशी बैंक तथा बैंकत्तर वित्तीय संस्थाओं की बदलती भूमिकाएं. भारतीय पूजी बाजार तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड सेवी वैश्विक वित्तीय बाजार का विकास तथा भारतीय वित्त से इसके संबंध, भारत में वस्तु बाजार, स्पोट और वायदा बाजार, एफएमसी की भूमिका।

संगठनात्मक व्यवहार-संगठनात्मक व्यवहार-अवधारणा और महत्व, प्रबंधन और संगठनात्मक व्यवहार के बीच संबंध, उद्भव और नैतिक परिप्रेक्ष्य, दृष्टिकोण, धारणा, सीखनारू व्यक्तित्व, लेनदेन संबंधी विश्लेषण।

भारत में प्रत्यक्ष कर – भारत में एकत्र किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रत्यक्ष कर एवं उनकी विधियां ।

वित्तीय पूंजीगत बाजार – वित्त और आर्थिक विकास, वित्तीय शेयर बाजार, गिफ्ट बाजार, बैंकिंग और बीमा, इक्विटी बाजार, प्राथमिक और द्वितीयक बाजार की भूमिका और कौशलता, व्युत्पन्न बाजार, भविष्य और विकल्प।

प्रायिकता – प्रायिकता और पणिामों की प्रसिद्ध एवं अभिगृहीत परिभाषाएं। पूर्ण प्रायिकता के नियम, सप्रतिबंधित प्रायिकता, बेज-प्रमेय एवं अनुप्रयोग। सतत एवं असतत यादृच्छिक चर। बंटन फलन और उसकी विशेषताएं। मानक असतत और सतत प्रायिकता बंटनबर्नूली, एक समान विपद, प्यासों, ज्यामितिक, आयताकार, चरघातांकी, प्रसामान्य, कौशी, पराज्यामितिक, बहुपदी, लाप्लास, ऋणात्मक द्विपद, बीटा, गामा, लघुगणक । यादृच्दिक वेक्टर, संयुक्त एवं मार्जिनल बंटन, सप्रतिबंध बंटन, यादृच्दिक चर फलनों का बंटन। यादृच्दिक चरों के के अभिसरण के बहुलक-बंटन में प्रायिकता में एक प्रायिकता के साथ तथा वर्ग माध्य (मीन स्कवेयर) में। गणितीय प्रत्याशा एवं सप्रतिबंधन प्रत्याशा। अभिलक्षण-फलन एवं आघूर्ण तथा प्रायिकता जनक फलन, प्रतिलोमन, अद्वितीयता तथा सतत प्रमेय । बोरल 0-1 नियम, कोल्मोगोरोय 0-1 नियम। शेवीशेफ एवं कोल्मोगोरोव की असमिका । स्वतंत्र चर के लिए वृहत संख्याओं का नियम तथा केन्द्रीय सीमा प्रमेय।

सांख्यिकी विधि – आंकड़ो का संग्रह, संकलन एवं प्रस्तुतीकरण, सचित्र, आरेख एवं आयतचित्र, बारंवारता बंटन, अवस्थित प्रकीर्णन/परिक्षेपण वैषम्य एवं कुकदता की माप, दविचर एवं बहुचर आंकड़े, साहचर्य एवं आसंग, वक्रआसंजन एवं लंबकोणीय बहुपद, विचर प्रसामान्य बंटन समाश्रण रैखिक, बहुपद, सहसंबंध गुणांक, आंशिक एवं बहु सहसंबंध, अंतवर्ग सहसंबंध, सहसंबंधनुपात का बंटन। त्रुटि और वृहत प्रतिदर्श (सैम्पल) परीक्षण। प्रतिदर्श माध्य (मीन) का प्रतिदर्श वितरण, प्रतिदर्श प्रसरण काई वर्ग तथा इन पर आधारित सार्थकता परीक्षण, लघु प्रतिदर्श परीक्षण।

अप्राचलिक परीक्षण – समंजन सुष्टुता, साईन माध्यिका, रन, विल्कक्सन, मान-विटनी, वाल्ड वुल्फोक्टिस एवं काल्मोगोराव-स्मिरनोव, क्रम सांख्यिकी-न्यूनतम, अधिकतम्, परास एवं माध्यिका, उपगामी आपेक्षिक दक्षता की संकल्पना।

प्रतिदर्श ग्रहण तकनीक – जनगणना और प्रतिदर्श की संकल्पना, प्रतिदर्शग्रहण की आवश्यकता, सम्पूर्ण गणन बनाम प्रतिदर्शग्रहण, प्रतिदर्शग्रहण हेतु मूल संकल्पनाए, प्रतिदर्शग्रहण और गैर-प्रतिदर्शग्रहण त्रुटि, प्रतिदर्श सर्वेक्षण (क्षेत्र अन्वेषक में अपनायी गई प्रश्नावलियों, प्रतिदर्शग्रहण का डिजाइन और विधियों) में एनएसएसओ द्वारा अपनायी गई कार्य पद्धतियां। विषयपरक अथवा उद्देश्यपरक प्रतिदर्शग्रहण, प्रायिकता प्रतिदर्शग्रहण अथवा यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण, प्रतिस्थापन सहित और इसके बिना सरल यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण, जनगणना माध्य का आकलन, जनसंख्या समानुपात और उनकी गानक त्रुटियां, स्तरीय यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण, समानुपातिक एवं इष्टतम आवंटन, नियत प्रतिदर्श आकार के लिए सरल यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण से तुलना । राहप्रसरण और प्रसरण प्रकार्य। आकंलन की अनुपात, गुणनफल और समाश्रयण विधियां, जनंसख्या माध्य का आंकलन, प्रथम कोटिक सन्निकटन की अभिनति और प्रसरण का मूल्यांकन, सरल यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण के साथ तुलना । क्रमबद्ध प्रतिदर्शग्रहण (इसमें जनसंख्या आकार (N) एक पूर्णाक है जोकि प्रतिदर्शग्रहण आकार (n) का गुणांक है) जनसंख्या माध्य का आकलन और इस आकंलन की मानक त्रुटि, सरल यादृच्छिक प्रतिदर्शग्रहण के साथ तुलना । आकार के समानुपातिक प्रतिस्थापन विधि सहित तथा इसके बिना) प्रायिकता प्रतिदर्शग्रहण n-2 के लिए देशराज और दास आकलक, हार्वित्ज-थॉमसन आकलक। 

समान आकार वाले समूह का प्रतिदर्शग्रहण – जनगणना माध्य और जोड़ के आकलक तथा उनकी मानक त्रुटियां, अंतरा-वर्ग सहसंबंध

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