head वृद्धि निगरानी क्या है? वृद्धि निगरानी योजना GK 2024| Mahila Supervisor एग्जाम GK

वृद्धि निगरानी क्या है? वृद्धि निगरानी योजना GK 2024| Mahila Supervisor एग्जाम GK

महिला सुपरवाइजर भर्ती 2023 में वृद्धि निगरानी योजना से 2 नंबर का प्रश्न पूछा जायगा आपको वृद्धि निगरानी का सम्पूर्ण जानकरी इस में मिल जायगा इसलिए पूरा पढ़े मिस न करे

वृद्धि क्या है? वृद्धि का मतलब है, किसी भी जीव, जैसे-पौधे, पशु, मनुष्य आदि के आकार या वजन में नियमित बढ़ोत्तरी होना। बच्चे की वृद्धि के लिए जरूरी है:

  • भरपूर एवं संतुलित भोजन ।
  • अरोग्य (बीमार न होना) ।
  • अच्छा पालन-पोषण ।

बच्चे की वृद्धि माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाती है। जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है वह धीरे-धीरे बढ़कर पैदा होने तक लगभग 2.5 से 3.5 किलोग्राम का हो जाता है। यदि माँ गर्भावस्था में संतुलित आहार लेती है एवं ग है तो वह एक स्वस्थ एंव पोषित शिशु को जन्म दे सकती है।

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वृद्धि पर निगरानी क्या है?

एक बच्चे की वृद्धि को नियमित अंतराल से मापना और उसका विश्लेषण करना, वृद्धि निगरानी है । वृद्धि निगरानी से ही पता चल सकता है कि बच्चा उम्र के हिसाब से बढ़ रहा है या नहीं । वृद्धि निगरानी का मुख्य उद्देश्य बच्चे की कम वृद्धि होने के पहले संकेत पर, बच्चे की माता से बातचीत करके उसकी वृद्धि को बढ़ाने का प्रयास किया जाए। बच्चे के जन्म से ही वृद्धि पर निगरानी रखना शुरू कर देना चाहिए निम्नलिखित बच्चों की वृद्धि पर निगरानी रखना आवश्यक है:-

  • * जन्म से 3 वर्ष के सभी बच्चों का प्रत्येक माह ।
  • 3-5 वर्ष के अत्यंत कुपोषित बच्चों का प्रत्येक माह ।
  • 3-5 वर्ष के वे बच्चे जो सम्भावित खतरे की सीमा में हो. का प्रत्येक माह ।
  • 3-5 वर्ष के सामान्य श्रेणी के बच्चों का यदि प्रतिमाह सम्भव न हो तो प्रत्येक तीन माह में ।

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वृद्धि निगरानी क्यों आवश्यक है?

प्रदेश में कुपोषण की दर बहुत अधिक है। तीन वर्ष से कम आयु वर्ग में कुपोषित बच्चों की संख्या का प्रतिशत अधिकतम होता जा रहा है । यदि वृद्धि निगरानी न किया जावे तो इनकी पहचान सम्भव नहीं होगी। फलस्वरूप निदान के बारे में कार्ययोजना बनाना मुश्किल होगा। वृद्धि निगरानी की आवश्यकता के मुख्य कारण निम्नलिखित है:-

  • कम वजन वाले बच्चे एवं गम्भीर कम वजन वाले बच्चा की पहचान करने के लिए। कम वजन वाले बच्चे एवं गम्भीर कम वजन वाले बच्चों को सामान्य वर्ग में लाने के लिए।
  • कुपोषण से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए। कुपोषण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने एवं पालकों को कुपोषण के दुष्परिणाम से अवगत कराने के लिए।
  • शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए।
  • कुपोषण से निपटने के लिए रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार करने के लिए ।

यदि किसी महीने में वजन वृद्धि नहीं होती, तो परिवार के सदस्यों को उसके पोषण की तरफ तुरन्त ध्यान देने के लिए सलाह देने हेतु ।

बच्चों में वृद्धि का आंकलन

बच्चे की वृद्धि हो रही है अथवा नहीं, यह जानने के लिए माप जरूरी है। शिशु के वृद्धि का माप निम्नलिखित विधियों से हो सकता है:-

कमर में बंधे हुए सूत के कस जाने से । ऊंचाई में वृद्धि होने से कपड़े के तंग होने से । वजन में वृद्धि होने से । बच्चे का हर महीना वजन बढ़ना, बच्चे की वृद्धि का सही माप है। बच्चे का वजन वृद्धि के आधार पर ही आंकलन किया जा सकता है कि बच्चा कुपोषित है अथवा स्वस्थ । यदि कपोषित है तो किस वर्ग में है। जिस बच्चे का वजन हर महीना मापदण्ड के अनुरूप बढ़ रहा है, उसकी वृद्धि सही है और वह स्वस्थ है, अन्यथा की स्थिति में नहीं। जन्म से 05 वर्ष तक बच्चे के वजन के निम्नानुसार मासिक बढ़ोत्तरी होना चाहिए:-

  • बच्चे का वजन जन्म से 6 माह तक लगभग 600-800 ग्राम प्रतिमाह ।
  • बच्चे का वजन 07 माह से 12 माह तक लगभग 300- 400 ग्राम प्रतिमाह ।
  • बच्चे का वजन 01 वर्ष से 3 वर्ष तक लगभग 150-200 ग्राम प्रतिमाह ।
  • बच्चे का वजन 3 वर्ष से 5 वर्ष तक लगभग 125 ग्राम प्रतिमाह ।

वृद्धि पर निगरानी रखने के कदम

(1) सहीं जन्म तिथि या सही उम्र का पता लगाना:- गाँवों में अधिकांश लोग अपने बच्चों का जन्म तिथि याद नहीं रखते, ऐसी स्थिति में बच्चे की उम्र का जानना एक कठिन कार्य है। यदि किसी बच्चे की सही जन्म तिथि की जानकारी परिवार के सदस्यों को ज्ञात न हो तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बच्चे की उम्र को जानने के लिए हिन्दी महीना, त्यौहार, पास-पड़ोस के किसी बच्चे के उम्र अथवा मोहल्ले में हुई किसी घटना से जोड़कर ज्ञात करना चाहिए । यदि ग्राम पंचायत में जन्म पंजीकरण, पंजी संधारित है तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वहाँ से भी सही उम्र ज्ञात कर सकती है। बिना उम्र की जानकारी के कुपोषण का आंकलन संभव नहीं है ।

( 2 ) सही वजन करना:– प्रदेश में वजन लेने के लिए दो प्रकार के मशीन उपयोग में लाया जा रहा है:-

1. साल्टर मशीन:- यह घड़ी के डायलनुमा होती है। वजन लेने के पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वजन मशीन सही वजन दर्शा रहा है अर्थात् मशीन तकनीकी रूप से सही एवं उपयुक्त है । यदि मशीन गड़बड़ / खराब हो तो सबसे पहले उसे ठीक करा लेना चाहिए ।

साल्टर मशीन को मजबूत रस्सी से बांधकर इस तरह लटकायें कि मशीन आँख की सीध में हो । जिस थैलेनुमा में बैठाकर बच्चे का वजन लिया जाता है उसे लगा कर मशीन की सुई को 0 पर कर लें । बच्चे का वजन लेते समय बच्चे को थैलानुमा में बैठा दें, बच्चा न तो दीवाल को पकड़े और न ही फर्श को स्पर्श कर रहा हो, और न ही बच्चे को कोई पकड़े। इसके बाद जो वजन आये उसको अंकित करें।

2. बच्चों का मशीन (जमीन पर रखकर तौलने वाला ):- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यह सुनिश्चित कर लें कि वजन मशीन सही है । इस मशीन पर बच्चे को बैठाने अथवा लेटाने के पूर्व नाब की सहायता से सुई को 0 पर कर लें । वजन लेते समय बच्चे को पकड़े नहीं, इसे स्वतंत्र रूप से बैठने दें। अपनी आँख मशीन की सुई के समानान्तर रखते हुए वजन लें। जो बच्चे खड़े हो सकते हैं उन्हें मशीन पर खड़ा कर वजन लें। )

3. वृद्धि चार्ट में वजन सही दर्शाना:- बालक एवं बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक वृद्धि चार्ट निर्धारित है । अत: बालिका के लिए बालिका वृद्धि चार्ट का एवं बालक के लिए बालक वृद्धि चार्ट का उपयोग करें।

  • वृद्धि चार्ट के रजिस्टर की सूची में एवं वृद्धि चार्ट के सूचना बाक्स में बच्चे का नाम और अन्य जानकारी दर्ज करें।
  • यदि जन्म के तुरंत बाद पहली बार वजन लेकर अंकित कर रहे हैं तो नीचे जन्म के माह से लेकर क्रम से सब कॉलम में माह व वर्ष अंकित कर लें ।
  • वजन का अंकन करने के लिए खड़ी एवं आढ़ी लाईन के मिलान बिन्दू (क्रॉस) पर लगायें और दो 0 को एक रेखा खीचकर (0 – 0 ) मिला दें ।
  • एक वृद्धि चार्ट में एक ही बच्चे का वजन भरा जावेगा तथा वृद्धि चार्ट नुकीले शीश – पेंसिल से साफ-सुथरा भरा जावेगा ।

4 ) वृद्धि की दिशा को समझना अथवा निष्कर्ष निकालना:- वृद्धि रेखा बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण की स्थिति का सूचक है। वृद्धि चार्ट के खड़ी रेखा में वजन को और आड़ी रेखा में उम्र को प्रदर्शित किया जाता है । वृद्धि चार्ट में खड़ी और आड़ी रेखा के मध्य में अलग-अलग रंगों की तीन तिरछी पट्टियाँ होती है। सबसे ऊपर की पट्टी हरे रंग की की होती है मध्य की पट्टी पीले रंग की होती है और नीचे की पट्टी लाल रंग की होती है जिन बच्चों का वजन हरे रंग की पट्टी में होता है वे सामान्य वजन के बच्चे होते है, जिन बच्चों का वजन पीले रंग की पट्टी पर होता है वे कम वजन वाले बच्चे होते है तथा जिन बच्चों का वजन लाल रंग की पट्टी पर होता है वे गंभीर कम वजन वाले होते है, अर्थात हरे रंग की पट्टी में आने वाले बच्चे पोषित, पीले रंग की पट्टी में आने वाले बच्चे कुपोषित एवं लाल रंग की पट्टी में आने वाले बच्चे गंभीर रुप से कुपोषित होते हैं।

  • यदि वृद्धि रेखा लगातार ऊपर की ओर बढ़ रही है तो यह स्थिति में सुधार का सूचक है । यहाँ माँ को प्रोत्साहित करने और इसी तरह अच्छी देखभाल करने की जरूरत पर बल देना है ।
  • यदि वृद्धि रेखा सीधी हो रही है, यानि दो माह या अधिक समय में वजन नहीं बढ़ रहा है तो चिंता का विषय है । माँ से कारण ज्ञात करने एवं पौष्टिक और अधिक पोषण आहार देने के लिए परामर्श देने की जरूरत है ।
  • यदि वृद्धि रेखा का झुकाव नीचे की तरफ है तो स्थिति और भी अधिक शोचनीय है । क्योंकि उम्र बढ़ने पर भी वजन घट रहा है, जो कि गंभीर खतरे की निशानी है ।

(5) निष्कर्ष के आधार पर माँ को परामर्श:- बच्चे के वजन को वृद्धि चार्ट में अंकन के बाद बच्चे के कुपोषण का स्तर का ज्ञान हो जाता है। बच्चे को कुपोषण से बाहर लाने के लिए बच्चे के माँ अथवा परिवार के सदस्यों से चर्चा कर निम्नानुसार परामर्श दिया जा सकता है:-

1. यदि बच्चा कम वजन का है ( कुपोषित है ):- यदि बच्चे का वजन पीले रंग की पट्टी के भीतर है अर्थात् कुपोषित है तो बच्चे की माँ को कुपोषण के दुष्परिणाम से अवगत कराते हुए बच्चे को विशेष देखरेख करने एवं पोषण आहार में वृद्धि करने तथा पोषक तत्वों में वृद्धि करने की सलाह दी जावेगी ।

2. यदि बच्चा गम्भीर कम वजन का है ( गम्भीर कुपोषित है ):– यदि बच्चे का वजन लाल रंग की पट्टी के भीतर है तो बच्चा गम्भीर रूप से कुपोषित है । ऐसे बच्चे को आंगनबाड़ी केन्द्र में दुगुना पूरक पोषण आहार प्रदान किया जावेगा। इसके अतिरिक्त बच्चे की माता को गम्भीर कुपोषण के दुष्परिणाम एवं कारणों से अवगत कराया जावेगा तथा

बच्चे को अधिक पौष्टिक आहार प्रदान करने एवं पोषण आहार की मात्रा एवं आपूर्ति बढ़ाने, भोजन में दूध, अण्डा, फल, हरी सब्जी आदि की मात्रा बढ़ाने तथा बच्चे को विशेष देखरेख करने की सलाह दी जावे। यदि बच्चा बीमार है तो उसे तत्काल डॉक्टर को दिखाने का परामर्श प्रदान किया जावेगा । गम्भीर कुपोषित बच्चे के घर में नियमित गृह भेंट दिया जावेगा तथा तीन वर्ष से अधिक आयु के होने पर भी प्रतिमाह वजन लिया जावेगा। इसके अतिरिक्त बच्चे की माँ को स्वच्छ पानी, बच्चे की साफ- सफाई, घर की साफ-सफाई भोजन बनाने एवं खिलाने के बर्तन की साफ-सफाई के साथ-साथ भोजन पकाने की तकनीकी के बारे में जानकरी दी जावे ।

3. यदि वृद्धि रेखा का झुकाव नीचे की ओर अथवा सीधी हो रही हो तो यह स्थिति गम्भीर खतरे की निशानी है और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वस्तुस्थिति से बच्चे की माँ को गृह-भेंट कर तत्काल अवगत करावें एवं बच्चे के बीमार होने के संबंध में पूछताछ करें तथा बच्चे को अधिक देखभाल करने, अधिक बार, अधिक पौष्टिक आहार प्रदान करने की सलाह दें। गृह भेंट की आवृत्ति ऐसे घर में बढ़ा दें। आवश्यकता हो तो बच्चे को डॉक्टर को दिखाकर ईलाज भी करावें ।

4. बच्चे की वृद्धि की रेखा को माता-पिता को दिखावें तथा बच्चे की वृद्धि रेखा की दिशा के कारणों के बारे में बातचीत करें। वृद्धि रेखा के आधार पर जोखिम वाले बच्चों की पहचान:- निम्नलिखित लक्षण वाले बच्चों की स्थिति गम्भीर मानी जाएगी, इसलिए इन्हें तत्काल शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाकर परामर्श अनुसार उपचार करावें :-

यदि जन्म के समय शिशु का वजन 2 कि. ग्रा. से कम है।

यदि शिशु का वजन लगातार तीन माह तक नहीं बढ़ रहा है।

यदि दो माह से शिशु के वजन में कमी हो रही है।

यदि शिशु गम्भीर कम वजन (लाल रंग की पट्टी) से ऊपर नहीं आ रहा है।

यदि शिशु कुपोषण के साथ-साथ संक्रमित अथवा बीमार है तो वह और भी अधिक चिन्तनीय है । राष्ट्रीय स्वास्थ्य सांख्यिकीय केन्द्र (एनसीएचएस) के अनुसार बच्चों तथा किशोरों का वजन एवं लम्बाई की संदर्भ सारिणी

वृद्धि निगरानी में संशोधन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित नवीन वृद्धि निगरानी चार्ट दिनांक 01.04.2009 से प्रदेश में लागू है । इस पठन सामग्री में नवीन वृद्धि निगरानी के बारे में जानकारी दी गई है। अर्थात् वर्तमान में वृद्धि निगरानी की जो पद्धति प्रचलन में है एवं जिसे पठन सामग्री में शामिल नहीं किया गया है, वर्तमान में वृद्धि निगरानी की मुख्य बातें निम्नानुसार है-

01. . आंगनबाड़ी स्तर पर तैयार किये जाने वाले वृद्धि निगरानी चार्ट को आईसीडीएस ग्रोथ चार्ट के नाम से जाना जाता है

02. वर्तमान में प्रचलित वृद्धि निगरानी चार्ट में खड़ी रेखा मे बच्चे के वजन एवं आड़ी रेखा में बच्चे की आयु को प्रदर्शित करता है ।

03. वर्तमान में जो प्रचलित वृद्धि चार्ट में चार रेखायें होती है, सबसे ऊपर की रेखा के ऊपर वजन दर्शाने वाले बच्चे सामान्य श्रेणी के बच्चे, ऊपर की रेखा एवं ऊपर से द्वितीय रेखा के मध्य वजन दर्शाने वाले बच्चे प्रथम श्रेणी (ग्रेड-I) के बच्चें ऊपर से द्वितीय रेखा एवं ऊपर से तृतीय रेखा के मध्य वजन दर्शाने वाले बच्चे में द्वितीय श्रेणी (ग्रेड-II ) एवं नीचे से प्रथम रेखा एवं द्वितीय रेखा के मध्य वजन दर्शाने वाले बच्चे तृतीय श्रेणी (ग्रेड-III) के एवं नीचे से प्रथम रेखा के नीचे वजन दर्शाने वाले बच्चे चतुर्थ श्रेणी (ग्रेड-IV ) ग्रेड के कुपोषित बच्चे होते हैं ।

04 वर्तमान में लागू वृद्धि निगरानी चार्ट के अनुसार बच्चों को वजन के आधार पर दो वर्ग में रखा गया है-

  • सामान्य बच्चे
  • कुपोषित बच्चे

कुपोषित बच्चों को वजन के आधार पर चार श्रेणियों में रखा गया है।

l ग्रेड ॥ ग्रेड || ग्रेड IV ग्रेड | एवं || ग्रेड के बच्चे साधारण कुपोषण की श्रेणी में तथा 111 एवं IV ग्रेड के बच्चे गंभीर कुपोषण के श्रेणी में आते हैं।

5. वर्तमान में लागू वृद्धि निगरानी चार्ट के अनुसार बालक एवं बालिका के लिए एक ही मापदण्ड का वृद्धि निगरानी चार्ट लागू है। अर्थात् बालक एवं बालिका के लिए एक ही मापदण्ड का ग्रोथ चार्ट उपयोग किया जाता है।

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