‘जोधपुर का साफा’ पूरे भारत में क्यों प्रसिद्ध है- बंधेज के लिए
साधारणतया राजस्थान के लोगों की पगकडयां होती थी- शिखराकार व आगे की ओर उठी हुई
परम्परागत राजस्थानी पहचान की वस्त्रशिस्ट वेश भूषा है- अंगरखी
अलटी, अमरशाही, कशवशाही, उदेशाही, शहजहानी, खरजशाही का संबंध है- पगड़ियो के प्रकार से
मुसलमानों में शिरोवस्त्र के लिए प्रयोग किया जाता है- टोपी
मुगलकाल में वस्त्रवाह के अवसर पर पहनी जाने वाली पगडी थी- मोठडे की पगडी
मेवाड व मारवाड में पहनी जाने वाली पगडी में मुख्य अन्तर क्या है- मारवाड पगडी मेवाड की अपेक्षा आकार में बडी व ऊं ची होती है
राजस्थानी महिलाये मुख्य रूप से पहनती है- लूगडी व ओढनी
अंगरखी को ‘ग्रामीण भाषा में कहते हैं- बुगतरी
आदिवासियों में ‘कटकी’ वस्त्र पहना जाता है- अवस्त्रवाहित युवतियों द्वारा
महिलायेओं द्वारा शरीर के उपरी भाग पर प्रयोग किया जाने वाला वस्त्र है- कांचली
राजस्थान में मुस्लिम महिलाये यें चूडीदार पजामें के ऊपर क्या पहन कर ऊपर चुंदडी ओढती है- तिलगा
राजस्थान में अंग्रेजों के काल में चूडीदार पजामे के साथ पहनते थे- ब्रीचेस (बिरजस)
जो संबंध स्त्रियों के झुमके का कान से है, वही पुरुष में- मुरकियों कानों से
‘पुर्चिया’ आभूषण को राजस्थानी महिलाओं द्वारा किस अंग पर धारण किया जाता है- कलाई पर
भीलवाडा जिले की ग्रामीण स्त्रियों का वह वस्त्र जो कपडों के दो टुकडों के बीच में जोड कर बनाया जाता है तथा जो पीठ पर तानियों से बांधा जाता है- कापडी
राजस्थान में ‘सुरलिया’ आभूषण पहना जाता है- गले में
‘कणकती‘ नामक आभूषण को राजस्थानी महिलाओं द्वारा धारण किया जाता है- कमर में
‘मेमन्द‘ किसे कहते हैं- सिर पर पहने जाने वाले आभूषण को
‘गोखरू‘ किसे कहते हैं- कलाई में पहना जाने वाला कडा
अंगुकलयों व अँगूठे के छल्रों को चैन से जोड़कर पायल की तरह पैरों के ऊपर हुक से जोडा जाता है, उसमें जडाई का काम भी किया जाता है तथा हथफूल की तरह होता है। इस आभूषण का नाम राजस्थान में है- पगपान
चंपाकली, कंठग्री, चंदनहार, उवासी, पोत आदि नाम राजस्थान में किस गहने के पर्याय हैं- हार
‘टड्डा‘ किस आभूषण का नाम है- कडा
वारी, चुनी व चाप आदि किस अंग की शोभा बढाने के अलंकार है- नाक
‘बुलाक‘ आभूषण नाक में पहना जाता है जबकी ‘रूसी‘ नामक आभूषण पहनते हैं- गले में
राजस्थान की स्त्रियाँ अपने सुहाग के लिए ‘हाथी-दांत के चूडे’ को धारण करती है, अन्यथा इसके स्थान पर कौनसा चूडा पहनती है- लाख का चूडा
दामनी, तावित, मेमन्द, फीणी, सांकली आदि आभूषण सम्बंधित है- कसर व मतिष्क से
हुस्सी, बडा, मोहस, मंडली, हालरो आदि आभूष्ण सम्बंधित है- बाजू
सीकर जिले की ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रियों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सुरलिया, भूचरीया और पाटी सूलिया नामक आभूषण शरीर के किस अंग में पहने जाते हैं- कान में
आदिवासी महिलाओं का चांदी का हार- हालरो
रेशमी धागों मे लटकता सोने का सिक्का- मोहरन
अंगूठे की अंगूठी- अरसी
कमर का आभूषण- कंडोर
गरनियां व बाहिवो है- ग्रामीण स्त्रियों के आभूषण
‘गुरडे’ ग्रामीण पुरूषों के किस अंग का आभूषण है- कान
‘जोधपुर का साफा’ पूरे भारत में क्यों प्रसिद्ध है- बंधेज के लिए
साधारणतया राजस्थान के लोगों की पगकडयां होती थी- शिखराकार व आगे की ओर उठी हुई
परम्परागत राजस्थानी पहचान की वस्त्रशिस्ट वेश भूषा है- अंगरखी
अलटी, अमरशाही, कशवशाही, उदेशाही, शहजहानी, खरजशाही का संबंध है- पगड़ियो के प्रकार से
मुसलमानों में शिरोवस्त्र के लिए प्रयोग किया जाता है- टोपी
मुगलकाल में वस्त्रवाह के अवसर पर पहनी जाने वाली पगडी थी- मोठडे की पगडी
मेवाड व मारवाड में पहनी जाने वाली पगडी में मुख्य अन्तर क्या है- मारवाड पगडी मेवाड की अपेक्षा आकार में बडी व ऊं ची होती है
राजस्थानी महिलाये मुख्य रूप से पहनती है- लूगडी व ओढनी
अंगरखी को ‘ग्रामीण भाषा में कहते हैं- बुगतरी
आदिवासियों में ‘कटकी’ वस्त्र पहना जाता है- अवस्त्रवाहित युवतियों द्वारा
महिलायेओं द्वारा शरीर के उपरी भाग पर प्रयोग किया जाने वाला वस्त्र है- कांचली
राजस्थान में मुस्लिम महिलाये यें चूडीदार पजामें के ऊपर क्या पहन कर ऊपर चुंदडी ओढती है- तिलगा
राजस्थान में अंग्रेजों के काल में चूडीदार पजामे के साथ पहनते थे- ब्रीचेस (बिरजस)
जो संबंध स्त्रियों के झुमके का कान से है, वही पुरुष में- मुरकियों कानों से
‘पुर्चिया’ आभूषण को राजस्थानी महिलाओं द्वारा किस अंग पर धारण किया जाता है- कलाई पर
भीलवाडा जिले की ग्रामीण स्त्रियों का वह वस्त्र जो कपडों के दो टुकडों के बीच में जोड कर बनाया जाता है तथा जो पीठ पर तानियों से बांधा जाता है- कापडी
राजस्थान में ‘सुरलिया’ आभूषण पहना जाता है- गले में
‘कणकती‘ नामक आभूषण को राजस्थानी महिलाओं द्वारा धारण किया जाता है- कमर में
‘मेमन्द‘ किसे कहते हैं- सिर पर पहने जाने वाले आभूषण को
‘गोखरू‘ किसे कहते हैं- कलाई में पहना जाने वाला कडा
अंगुकलयों व अँगूठे के छल्रों को चैन से जोड़कर पायल की तरह पैरों के ऊपर हुक से जोडा जाता है, उसमें जडाई का काम भी किया जाता है तथा हथफूल की तरह होता है। इस आभूषण का नाम राजस्थान में है- पगपान
चंपाकली, कंठग्री, चंदनहार, उवासी, पोत आदि नाम राजस्थान में किस गहने के पर्याय हैं- हार
‘टड्डा‘ किस आभूषण का नाम है- कडा
वारी, चुनी व चाप आदि किस अंग की शोभा बढाने के अलंकार है- नाक
‘बुलाक‘ आभूषण नाक में पहना जाता है जबकी ‘रूसी‘ नामक आभूषण पहनते हैं- गले में
राजस्थान की स्त्रियाँ अपने सुहाग के लिए ‘हाथी-दांत के चूडे’ को धारण करती है, अन्यथा इसके स्थान पर कौनसा चूडा पहनती है- लाख का चूडा
दामनी, तावित, मेमन्द, फीणी, सांकली आदि आभूषण सम्बंधित है- कसर व मतिष्क से
हुस्सी, बडा, मोहस, मंडली, हालरो आदि आभूष्ण सम्बंधित है- बाजू
सीकर जिले की ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रियों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सुरलिया, भूचरीया और पाटी सूलिया नामक आभूषण शरीर के किस अंग में पहने जाते हैं- कान में
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कमर का आभूषण- कंडोर
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मेरा नाम गौतम है मै कवर्धा का निवासी हु ALLGK.IN में सभी नवीनतम न्यूज़ और जॉब्स, रिजल्ट, एडमिट कार्ड, ऑफलाइन जॉब्स, ऑनलाइन फॉर्म, कॉलेज और यूनिवर्सिटी अपडेट को कवर करता हु।
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