CG Vyakaran ke Objective Question [CGPSC (PRE & MAINS) तथा व्यापम में पूछे जाने वाले प्रश्न के साथ]
वाच्य क्रिया का वह रूपान्तरण है, जिससे यह पता चलता है कि वाच्य में कर्ता, कर्म अथवा भाव में से किसकी प्रधानता है। [CG PSC(Pre)2015]
वाच्य के प्रकार (03 प्रकार)हिन्दी की भाँति छत्तीसगढ़ी में भी कर्ता, कर्म अथवा भाव की प्रधानता के आधार पर वाच्य तीन प्रकार के होते हैं
कर्तृ वाच्य
कर्म वाच्य एवं
भाव वाच्य
कर्तृ वाच्य – वाक्य में क्रिया का वह रूप, जिसमें कर्ता के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन निर्धारित हों, “कर्तृ वाच्य’ कहलाता है। कर्तृ वाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है। यह सकर्मक और अकर्मक दोनों प्रकार का हो सकता है। ऐसे वाक्यों के प्रयोग को कर्तृ प्रयोग कहा जाता है।
समारू गिल्ली-डंडा खेलत हे। (समारू गिल्ली डंडा खेल रहा है)
मनटोरी मेला घूमत हे। (मनटोरी मेला घूम रही है).
सीता ह चिट्ठी लिखत हे। (सीता चिट्ठी लिख रही है) – मैं पढ़े गय रहेंव।
(मैं पढ़ने गया था)
इन वाक्यों में कर्ता प्रमुख होने के कारण कर्त्ता के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन प्रयोग में आए हैं। अतः ये कर्तृवाच्य हैं।
कर्म वाच्य – वाक्य में क्रिया का वह रूप, जिसमें कर्म के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन निर्धारित हो, उसे ‘कर्मवाच्य’ कहते हैं। इस प्रकार का प्रयोग कर्मणि प्रयोग कहलाता है। कर्मणि प्रयोग में कर्म की प्रधानता होती है।
गिल्ली-डंडा समारू ले खेले जाथे। (गिल्ली-डंडा समारू से खेला जाता है)
चिट्ठी सीता ले लिखे जाथे । (चिट्टी सीता से लिखा जाता है)
छत्तीसगढ़ी में कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में और कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में रूपांतरित करने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान देने योग्य हैं
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में रूपांतर करने पर मुख्य क्रिया का रूप प्रायः भूतकालीन हो जाता है। जैसे- मारे गिस (मारा गया), पढ़े गिस (पढ़ा गया), खाए गिस (खाया गया), रेंगे जाथे (चला जाता है)
कर्ता अगर सर्वनाम है तो उसका परिवर्तित रूप निम्नानुसार मिलता है
CG Vyakaran ke Objective Question [CGPSC (PRE & MAINS) तथा व्यापम में पूछे जाने वाले प्रश्न के साथ]
वाच्य क्रिया का वह रूपान्तरण है, जिससे यह पता चलता है कि वाच्य में कर्ता, कर्म अथवा भाव में से किसकी प्रधानता है। [CG PSC(Pre)2015]
वाच्य के प्रकार (03 प्रकार)हिन्दी की भाँति छत्तीसगढ़ी में भी कर्ता, कर्म अथवा भाव की प्रधानता के आधार पर वाच्य तीन प्रकार के होते हैं
कर्तृ वाच्य
कर्म वाच्य एवं
भाव वाच्य
कर्तृ वाच्य – वाक्य में क्रिया का वह रूप, जिसमें कर्ता के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन निर्धारित हों, “कर्तृ वाच्य’ कहलाता है। कर्तृ वाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है। यह सकर्मक और अकर्मक दोनों प्रकार का हो सकता है। ऐसे वाक्यों के प्रयोग को कर्तृ प्रयोग कहा जाता है।
समारू गिल्ली-डंडा खेलत हे। (समारू गिल्ली डंडा खेल रहा है)
मनटोरी मेला घूमत हे। (मनटोरी मेला घूम रही है).
सीता ह चिट्ठी लिखत हे। (सीता चिट्ठी लिख रही है) – मैं पढ़े गय रहेंव।
(मैं पढ़ने गया था)
इन वाक्यों में कर्ता प्रमुख होने के कारण कर्त्ता के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन प्रयोग में आए हैं। अतः ये कर्तृवाच्य हैं।
कर्म वाच्य – वाक्य में क्रिया का वह रूप, जिसमें कर्म के अनुसार क्रिया के पुरूष एवं वचन निर्धारित हो, उसे ‘कर्मवाच्य’ कहते हैं। इस प्रकार का प्रयोग कर्मणि प्रयोग कहलाता है। कर्मणि प्रयोग में कर्म की प्रधानता होती है।
गिल्ली-डंडा समारू ले खेले जाथे। (गिल्ली-डंडा समारू से खेला जाता है)
चिट्ठी सीता ले लिखे जाथे । (चिट्टी सीता से लिखा जाता है)
छत्तीसगढ़ी में कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में और कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में रूपांतरित करने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान देने योग्य हैं
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में रूपांतर करने पर मुख्य क्रिया का रूप प्रायः भूतकालीन हो जाता है। जैसे- मारे गिस (मारा गया), पढ़े गिस (पढ़ा गया), खाए गिस (खाया गया), रेंगे जाथे (चला जाता है)
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मेरा नाम गौतम है मै कवर्धा का निवासी हु ALLGK.IN में सभी नवीनतम न्यूज़ और जॉब्स, रिजल्ट, एडमिट कार्ड, ऑफलाइन जॉब्स, ऑनलाइन फॉर्म, कॉलेज और यूनिवर्सिटी अपडेट को कवर करता हु।
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