प्रमुख फसले,उत्पादन, योजनाएँ, प्रक्षेत्र, कृषि जलवायु, संस्थाएँ, पशु-पालन, मत्स्य विकास एवं कृषि क्षेत्र, शिक्षा
भारत में धान का कटोरा छत्तीसगढ़ को कहा जाता है।
धान छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल हैं।
देश की सर्वाधिक धान की किस्में छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं।
छ.ग. में चावल का औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 1725 कि.ग्रा. है।
छत्तीसगढ़ राज्य में फसल सघनता का प्रतिशत लगभग 117 प्रतिशत है।
छ.ग. के लगभग 47 प्रतिशत भूमि पर कृषि की जाती है।
छ.ग. को 03 कृषि जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है।
छ.ग. में सर्वप्रथम कृषि बजट फरवरी 2012 (चंद्रशेखर साहू) को प्रस्तुत किया गया है।
छ.ग. में कृषि जोतों का औसत आकार 1.60 हेक्टेयर है।
छ.ग. में सबसे अधिक द्विफसली क्षेत्र धमतरी जिले में है।
छ.ग. में सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि बिलासपुर जिले की है।
छ.ग. में सबसे कम कृषि योग्य भूमि जशपुर जिले में है।
छ.ग. के कुल कृषक परिवारों की संख्या लगभग 32 लाख 55 हजार है।
राज्य में सीमांत कृषकों की संख्या 17 लाख है।
प्रति हेक्टेयर औसत उर्वरक खपत छ.ग. में 88 किलो है।
छत्तीसगढ़ में कोदो-कुटकी फसल सर्वाधिक बस्तर जिले में होती है।
छ.ग. में बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र पकरिया (बिलासपुर) में स्थित है।
छ.ग. में बत्तख प्रजनन प्रक्षेत्र सकोला (अंबिकापुर) में स्थित है।
छ.ग. में सुअर प्रजनन प्रक्षेत्र असील (जगदलपुर) में स्थित है।
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक पैदावार देनेवाली दलहन फसल तिवरा (लाखड़ी) हैं।
छ.ग. केप्रथम ‘भक्तिनमाताराजिम कृषकगुरूकुल की स्थापना पोखरा (रायपुर) में की जा रही है।
छत्तीसगढ़ में 3 हार्स पॉवर तक के पम्पधारी किसानों को वर्ष में 6 हजार यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है।
उसे 5 हार्स पॉवर पम्पधारी किसानों को 7500 यूनिट बिजली वर्ष भर में निःशुल्क दी जायेगी।
छत्तीसगढ़ राज्य में सोयाबीन फसल का प्रमुख उत्पादक जिला राजनांदगाँव है।
छत्तीसगढ़ में बाजरा सबसे अधिक बस्तर जिले में होता है।
छ.ग. के जनजातियों में प्रचलित स्थानांतरित कृषि को पेन्दा कृषि कहते हैं।
छ.ग. राज्य लैण्ड-यूज बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं।
छत्तीसगढ़ की ‘टमाटर राजधानी’ लुडेग को कहते हैं।
पकरिया पेण्ड्रा, अंजोरा-दुर्ग और सरकंडा- बिलासपुर पशु प्रजनन प्रक्षेत्र है।
छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में केन्द्रीय पशु वीर्य संग्रहालय स्थापित हैं।
छत्तीसगढ़ में सूकर की नस्ल में सुधार हेतु दो सूकर प्रक्षेत्र राज्य में सकालो (अम्बिकापुर), व जगदलपुर स्थापित है।
छत्तीसगढ़ की मुख्य तिलहन फसल अलसी है।
छ.ग. राज्य का प्रथम कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केन्द्र महासमुन्द में खोला जा रहा है।
छ.ग. राज्य में प्रथम बार जशपुर व सरगुजा जिलों में ईरी रेशम का उत्पादन प्रारम्भ किया गया है।
छ.ग. राज्य में प्रथम महिला कृषि वैज्ञानिक होने का गौरव डॉ. जयालक्ष्मी गांगुली को प्राप्त है।
सॉची दुग्ध उत्पाद अब देवभोग के नाम से जाना जाता है।
मछली उत्पादन में छ.ग. का देश में 8 वाँ स्थान है।
छ.ग. शासन द्वारा लघु धान्य फसलों का विपणन संजीवनी के माध्यम से करा रही है जिसमें कोदो-कुटकी, रागी व सांवा सम्मिलित है।
देश का 17वाँ एवं छ.ग. का प्रथम मात्स्यकी महाविद्यालय कवर्धा में प्रारम्भ किया गया हैबलराम कृषियांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजनान्तर्गत किसानों को कृषि यंत्र अनुदान में दिये जाते है।
छ.ग. में लघु धान्य फसल अनुसंधान केन्द्र बस्तर में स्थापित किया जा रहा है।
इंदिरा गाँधी कृषि वि.वि. की स्थापना सन् 1987 में हुई थी।
दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर में स्थित है।
दंतेवाड़ा जिले में कपास प्रौद्योगिकी मिशन’ की स्थापना की जा रही है।
छ.ग. का राज्य भण्डार गृह निगम रायपुर में है।
छ.ग. राज्य द्वारा ‘बिलासा बाई केंवटीन पुरस्कार’ मत्स्य पालन के क्षेत्र में दिया जाता है।
उत्तरी कृषि जलवायु क्षेत्र का मुख्यालय अंबिकापुर में है।
धान उत्तरी जलवायु कृषि क्षेत्र की मुख्य फसल है।
दक्षिणी कृषि जलवायु क्षेत्र का मुख्यालय जगदलपुर है। कृषक समग्र योजना’ बीज से संबंधित है। ‘
रामतिल प्रोत्साहन योजना’ छ.ग. के आदिवासी क्षेत्रों के लिए चलाया जा रहा है।
छ.ग. में कृषि विपणन के लिए वर्तमान में 73 मंडियाँ है।
कृषि महाविद्यालय रायपुर की स्थापना सन् 1961 में हुई थी।
ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय बिलासपुर में स्थापित है।
छ.ग. में गेहूं का औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 1335 कि.ग्रा. है।
छ.ग. राज्य का सर्वोच्च कृषि क्षेत्र का पुरस्कार डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान है।
छ.ग. में सबसे बड़ा पशु बाजार रायपुर है।
छ.ग. में सर्वाधिकधान-प्रजाति विकसित करनेवाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. एच. आर. रिछारिया हैं।
प्रमुख फसले,उत्पादन, योजनाएँ, प्रक्षेत्र, कृषि जलवायु, संस्थाएँ, पशु-पालन, मत्स्य विकास एवं कृषि क्षेत्र, शिक्षा
भारत में धान का कटोरा छत्तीसगढ़ को कहा जाता है।
धान छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल हैं।
देश की सर्वाधिक धान की किस्में छत्तीसगढ़ में पाई जाती हैं।
छ.ग. में चावल का औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 1725 कि.ग्रा. है।
छत्तीसगढ़ राज्य में फसल सघनता का प्रतिशत लगभग 117 प्रतिशत है।
छ.ग. के लगभग 47 प्रतिशत भूमि पर कृषि की जाती है।
छ.ग. को 03 कृषि जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है।
छ.ग. में सर्वप्रथम कृषि बजट फरवरी 2012 (चंद्रशेखर साहू) को प्रस्तुत किया गया है।
छ.ग. में कृषि जोतों का औसत आकार 1.60 हेक्टेयर है।
छ.ग. में सबसे अधिक द्विफसली क्षेत्र धमतरी जिले में है।
छ.ग. में सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि बिलासपुर जिले की है।
छ.ग. में सबसे कम कृषि योग्य भूमि जशपुर जिले में है।
छ.ग. के कुल कृषक परिवारों की संख्या लगभग 32 लाख 55 हजार है।
राज्य में सीमांत कृषकों की संख्या 17 लाख है।
प्रति हेक्टेयर औसत उर्वरक खपत छ.ग. में 88 किलो है।
छत्तीसगढ़ में कोदो-कुटकी फसल सर्वाधिक बस्तर जिले में होती है।
छ.ग. में बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र पकरिया (बिलासपुर) में स्थित है।
छ.ग. में बत्तख प्रजनन प्रक्षेत्र सकोला (अंबिकापुर) में स्थित है।
छ.ग. में सुअर प्रजनन प्रक्षेत्र असील (जगदलपुर) में स्थित है।
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक पैदावार देनेवाली दलहन फसल तिवरा (लाखड़ी) हैं।
छ.ग. केप्रथम ‘भक्तिनमाताराजिम कृषकगुरूकुल की स्थापना पोखरा (रायपुर) में की जा रही है।
छत्तीसगढ़ में 3 हार्स पॉवर तक के पम्पधारी किसानों को वर्ष में 6 हजार यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है।
उसे 5 हार्स पॉवर पम्पधारी किसानों को 7500 यूनिट बिजली वर्ष भर में निःशुल्क दी जायेगी।
छत्तीसगढ़ राज्य में सोयाबीन फसल का प्रमुख उत्पादक जिला राजनांदगाँव है।
छत्तीसगढ़ में बाजरा सबसे अधिक बस्तर जिले में होता है।
छ.ग. के जनजातियों में प्रचलित स्थानांतरित कृषि को पेन्दा कृषि कहते हैं।
छ.ग. राज्य लैण्ड-यूज बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं।
छत्तीसगढ़ की ‘टमाटर राजधानी’ लुडेग को कहते हैं।
पकरिया पेण्ड्रा, अंजोरा-दुर्ग और सरकंडा- बिलासपुर पशु प्रजनन प्रक्षेत्र है।
छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में केन्द्रीय पशु वीर्य संग्रहालय स्थापित हैं।
छत्तीसगढ़ में सूकर की नस्ल में सुधार हेतु दो सूकर प्रक्षेत्र राज्य में सकालो (अम्बिकापुर), व जगदलपुर स्थापित है।
छत्तीसगढ़ की मुख्य तिलहन फसल अलसी है।
छ.ग. राज्य का प्रथम कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केन्द्र महासमुन्द में खोला जा रहा है।
छ.ग. राज्य में प्रथम बार जशपुर व सरगुजा जिलों में ईरी रेशम का उत्पादन प्रारम्भ किया गया है।
छ.ग. राज्य में प्रथम महिला कृषि वैज्ञानिक होने का गौरव डॉ. जयालक्ष्मी गांगुली को प्राप्त है।
सॉची दुग्ध उत्पाद अब देवभोग के नाम से जाना जाता है।
मछली उत्पादन में छ.ग. का देश में 8 वाँ स्थान है।
छ.ग. शासन द्वारा लघु धान्य फसलों का विपणन संजीवनी के माध्यम से करा रही है जिसमें कोदो-कुटकी, रागी व सांवा सम्मिलित है।
देश का 17वाँ एवं छ.ग. का प्रथम मात्स्यकी महाविद्यालय कवर्धा में प्रारम्भ किया गया हैबलराम कृषियांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजनान्तर्गत किसानों को कृषि यंत्र अनुदान में दिये जाते है।
छ.ग. में लघु धान्य फसल अनुसंधान केन्द्र बस्तर में स्थापित किया जा रहा है।
इंदिरा गाँधी कृषि वि.वि. की स्थापना सन् 1987 में हुई थी।
दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर में स्थित है।
दंतेवाड़ा जिले में कपास प्रौद्योगिकी मिशन’ की स्थापना की जा रही है।
छ.ग. का राज्य भण्डार गृह निगम रायपुर में है।
छ.ग. राज्य द्वारा ‘बिलासा बाई केंवटीन पुरस्कार’ मत्स्य पालन के क्षेत्र में दिया जाता है।
उत्तरी कृषि जलवायु क्षेत्र का मुख्यालय अंबिकापुर में है।
धान उत्तरी जलवायु कृषि क्षेत्र की मुख्य फसल है।
दक्षिणी कृषि जलवायु क्षेत्र का मुख्यालय जगदलपुर है। कृषक समग्र योजना’ बीज से संबंधित है। ‘
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छ.ग. में कृषि विपणन के लिए वर्तमान में 73 मंडियाँ है।
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मेरा नाम गौतम है मै कवर्धा का निवासी हु ALLGK.IN में सभी नवीनतम न्यूज़ और जॉब्स, रिजल्ट, एडमिट कार्ड, ऑफलाइन जॉब्स, ऑनलाइन फॉर्म, कॉलेज और यूनिवर्सिटी अपडेट को कवर करता हु।
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