मध्यप्रदेश के भौगोलिक संकेतक सामान्य ज्ञान MP Bhogolik Sanket

By: Gautam Markam

On: December 19, 2020

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मध्यप्रदेश के भौगोलिक संकेतक (भौगोलिक उपदर्शन)

  •  भौगोलिक संकेतक ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिनका एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र होता है।
  • भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण 10 वर्ष के लिये मान्य होता है।
  • यह भारत में सितंबर 2003 से लागू हुआ।
  • सर्वप्रथम वर्ष 2004 में ‘दार्जिलिंग टी’ जीआई टैग प्राप्त हुआ।
  • जीआई टैग Paris Convention for the Protection of Industrial Property के तहत बौद्धिक संपदा अधिकारों में शामिल है।
  • Globally GI का विनियमन WTO के Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS  के जरिए किया जाता है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर यह Geographical Indications of goods ‘Registration and Protection’ act, 1999 के जरिए मिलता है,

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मध्यप्रदेश के भौगोलिक संकेतक

  • इंदौर के चमड़े के खिलौने
  • रतलामी सेव
  • धार का बाघ प्रिंट, उजैन के भरमगढ़ का प्रिंट
  • झाबुआ का कड़कनाथ मुर्गा
  • महेश्वर(खरगौन), चंदेरी(अशोकनगर) की साड़ियां
  • दतिया,टीकमगढ़ के धातु शिल्प
  • मुरैना की गजक

 

Gautam Markam

मेरा नाम गौतम है मै कवर्धा से हु मेरा ALLGK कोचिंग क्लास है और मैं एग्जाम की तैयारी ऑनलाइन फ्री में करवाता हु, साथ सरकारी नौकरी और प्राइवेट नौकरी की जानकारी लोगो को देता हु अपने वेबसाइट और टेलीग्राम के माध्यम से

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