छत्तीसगढ़राज्य की शासन व्यवस्था CGPSC AND VYAPAM gk

By Raj Markam

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राज्य की शासन व्यवस्था (छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान)

छत्तिसगढ़ में 28 जिले हैं। यहाँ से लोकसभा के लिए 11 तथा राज्यसभा के लिए 5 सदस्य चुने जाते हैं। राज्य में लोकसभा की 11 सीटों में से 1 अनुसूचित जाति हेतु तथा 4 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में एकसदनीय विधायिका है। राज्य में विधानसभा सीटों की संख्या 90 है जिनमें से 10 सीटें अनुसूचित जाति हेतु तथा 29 सीटें अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित है। विधानसभा में एंग्लो इण्डियन समुदाय का प्रतिनिधित्व न होने की स्थिति में राज्यपाल इस समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत कर सकता है। राज्य की विधानसभा भवन का नाम ‘मिनीमाता’ के नाम पर रखा गया है। राज्य विधानसभा अध्यक्ष के आवास का नाम ‘संवेदना’ एवं राज्य के मुख्यमंत्री के आवास का नाम ‘करूणा’ रखा गया है।
संविधान के अनुच्छेद 163 (A) में यह प्रावधान है कि राज्यपाल को अपनी शक्तियों के प्रयोग करने में सहायता प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा। राज्य की मंत्रिपरिषद् के प्रधान को मुख्यमंत्री कहा जाता है। राज्य में विधानसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चुनाव करती है।
विधानसभा के अध्यक्ष का कार्यकाल सामान्य परिस्थितियों में 5 वर्ष का होता है किन्तु कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद भी नई विधान सभा के गठन के बाद नए पदाधिकारियों की नियुक्ति होने तक अध्यक्ष अपने पद पर बना रहता है।
कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व अध्यक्ष उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अध्यक्ष को स्वहस्ताक्षरित त्यागपत्र भेज सकता है। विधानसभा सदस्य अपने बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को उनके पद से पदमुक्त कर सकते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए 14 दिन पूर्व सूचना देना आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान

राज्य की स्थापना के साथ ही राज्य में एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई। इस उच्च न्यायालय का मुख्यालय बिलासपुर में स्थित है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) देश का 19वां उच्च न्यायालय है।
इस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशें की स्वीकृत पदों की संख्या 12 (मुख्य न्यायाधीश सहित) है। राज्य में राजस्व मामलों के निपटारे के लिए छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल का गठन किया गया है, जिसका मुख्यालय भी बिलासपुर में ही स्थित है।
पुलिस प्रशासन : राज्य में शांति व्यवस्था बनाये रखने का दायित्व पुलिस प्रशासन पर है। राज्य का पुलिस मुख्यालय रायपुर में है। राज्य में शीर्ष पुलिस अधिकारी का पद पुलिस महानिदेशक (DGP) का है। राज्य की पुलिस का आदर्श वाक्य ‘परित्राणाय साधुनाम्’ है। पुलिस प्रशासन को सुविधा की दृष्टि से 4 रेंजों में बांटा गया है। प्रत्येक रेंज का शीर्ष अधिकारी आई० जी० (I.G.) होता है।
राज्य के 4 पुलिस रेंज है—बिलासपुर, रायपुर, बस्तर एवं सरगुजा। जिले में जिला पुलिस अधीक्षक (S.P.) शीर्ष पुलिस अधिकारी होता है। राज्य में थानों की कुल संख्या 263 है। राज्य में पुलिस प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना रायपुर जिले के चन्द्रखुरी नामक स्थान पर की गई है।
राज्य का दंतेवाड़ा, बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, सरगुजा, कोरिया, जशपुर एवं राजनांदगांव जिला नक्सलवाद से प्रभावित हैं। नक्सलवाद से निपटने के लिए इन क्षेत्रों में ऑपरेशन ग्रीन हंट चलाया जा रहा है एवं जनसुरक्षा कानून को प्रभावी दंग से लागू किया जा रहा है।
राज्य नक्सलवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। राज्य में 5 केन्द्रीय जेल है। ये जेल रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग एवं अम्बिकापुर में स्थित हैं। राज्य की एकमात्र खुली जेल बस्तर जिले के मसगांव में स्थित है।

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