छत्तीसगढ़ का भूगोल प्राकृतिक वनस्पति सामान्य ज्ञान cgpsc and vyapam gk

By Raj Markam

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छत्तीसगढ़ का सम्पूर्ण सामान्य ज्ञान Cg Mcq Question Answer in Hindi: Click Now

छत्तीसगढ़ अंचल वनों की दृष्टि से समृद्ध प्रदेश माना जाता है। इसका लगभग 45 प्रतिशत भाग वनों से आच्छादित है। बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, रायपुर और बिलासपुर जिले में वन सम्पदा भरपूर है। यहाँ के वनों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है
 
1. आरक्षित वन : इस प्रकार के वनों में मवेशियों को चराने की मनाही रहती है। छत्तीसगढ़ के कुल वन क्षेत्र का 43.13 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित किस्म का है।
 
2. संरक्षित वन : इस प्रकार के वनों में निकटवर्ती अथवा स्थानीय निवासियों को आवश्यकतानुसार लकड़ी काटने तथा मवेशी चराने की सुविधा नियंत्रित रूप से दी जाती है। राज्य के कुल वन क्षेत्र का 40.21 प्रतिशत भाग संरक्षित वनों का है।
 
3. अवर्गीकृत वन : आरक्षित एवं संरक्षित वनों के अतिरिक्त शेष वन अवर्गीकृत है। यहाँ मवेशी स्वतंत्रतापूर्वक चराए जा सकते हैं। राज्य के कुल वन क्षेत्र का 16.66 प्रतिशत भाग अवर्गीकृत वनों का है। वन स्थिति रिपोर्ट, 2011 के अनुसार छत्तीसगढ के 55,674 वर्ग किमी भूभाग पर वनों का विस्तार है। मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के पश्चात भारत में सर्वाधिक वन छत्तीसगढ़ में है। अर्थात् वन क्षेत्रफल की दृष्टि से भारतीय राज्यों में छत्तीसगढ़ का तीसरा स्थान है।
 
राज्य में साल के वृक्ष बहुत अधिक संख्या में पाये जाते हैं। साल के वृक्ष के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। साल यहाँ का राजकीय वृक्ष भी है। इसके अतिरिक्त यहाँ और भी कई प्रकार के मिश्रित वनों की प्रजातियाँ मिलती हैं। छत्तीसगढ़ में वन लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही प्रकार से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रमुख स्रोत है। यहाँ के वनों में मुख्यतः निम्न वृक्षों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं-
 
1. साल : साल के वन मुख्य रूप से बस्तर में पाये जाते हैं। साल की लकड़ी का उपयोग इमारतों में तथा रेलवे स्लीपर बनाने के लिए होता है। बस्तर सम्भाग को साल वनों का द्वीप कहा जाता है।
 
2. सागौन : राज्य में सागौन के वृक्ष भी अधिक संख्या में पाये जाते हैं। इसका उपयोग मुख्यतः इमारती लकड़ी के रूप में होता है।
 
3. बांस : छत्तीसगढ़ के वन बाँस उत्पादन के लिए सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध है । बाँस की लुग्दी से कागज बनाया जाता है। राज्य के कमार जनजाति के लोगों का जीवन बांस के वनों पर ही आश्रित है। ये लोग बाँस के बर्तन, टोकरी और कई प्रकार की सजावटी वस्तुएँ बनाकर अपना जीवन यापन करते हैं। छत्तीसगढ़ में मुख्यतः नर बांस पाया जाता है। सरगुजा वन मंडल में कटंग बांस पाया जाता है। राज्य में बांस वन का क्षेत्रफल 6556 वर्ग किमी० है।।
 
4. तेन्दू पत्ता : तेन्दू पत्ता छत्तीसगढ़ के वनों की प्रमुख उपज है। राज्य के बीड़ी उद्योग का यह प्रमुख आधार है। तेंदूपत्ता के प्रमुख उत्पादक सरगुजा एवं बस्तर है। छत्तीसगढ़ में देश का लगभग 17% तेंदूपत्ता का उत्पादन होता है। – इसके अतिरिक्त यहाँ साजा, हर्रा, कर्रा, सरई, अर्जुन, महुआ, बबूल, आँवला, शीशम, खैर आदि के वृक्ष भी मिलते हैं। यहाँ की गौण उपजों में साल बीज, हर्रा, आँवला, बहेड़ा, कोसम, आम, जामुन, सीताफल, बेर, शिलावा, सिंघाड़ा, कत्था, गोंद, शहद, मोम, रेशम आदि प्रमुख हैं। __ छत्तीसगढ़ में वर्षा तापमान एवं अन्य भौगोलिक कारकों के आधार पर वर्गीकृत निम्नलिखित श्रेणी के वन पाए जाते हैं
 
1. उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन : ये वन राज्य के उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 100 से 150 सेमी के बीच होती है। इनसे मुख्यतः वनोपज
 
एवं लकड़ी दोनों ही प्राप्त होते हैं। इनमें साल, सागौन, बाँस की बहुतायत सहित बीजा, जामुन, महुआ, जाजा, हर्रा आदि भी पाए जाते हैं। ये वन दक्षिण सरगुजा जिले एवं जशपुर जिले के तपकरा रेंज में है। बिलासपुर, रायपुर, बस्तर, एवं रायगढ़ जिलों में भी इस प्रकार के वन पाए जाते हैं।
 
2. उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन : ये वन राज्य के उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 25 से 75 सेमी के बीच होती है। दूसरे शब्दों में इस प्रकार के वन अपेक्षाकृत कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये वन मुख्यतः वनोपज से संबंधित होते हैं। ये वन आंशिक रूप से इमारती लकड़ी भी प्रदान करते हैं। इस प्रकार के वनों में पाए जाने वाले वृक्षों में बबूल, कीकर, हर्रा, पलाश, तेन्दु, शीशम, हलदू, सागौन, सिरीश आदि की बहुतायत होती है। ये वन रायगढ़ जशपुर, उत्तर-पूर्वी बिलासपुर रायपुर तथा धमतरी में पाए जाते हैं।
छत्तीसगढ़ वनों की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य माना जाता है। वन सम्पदा के कारण सम्पूर्ण भारत में छत्तीसगढ़ राज्य का महत्वपूर्ण स्थान है। विविध तथा सघन वनों, वन्य प्राणियों की बहुलता तथा वनोपजों की अधिकता के कारण राष्ट्रीय के साथ ही इसकी अन्तर्राष्ट्रीय पहचान भी है। प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 45% भाग वनाच्छादित है। राज्य के सम्पूर्ण क्षेत्र में वनों का घनत्व समान नहीं है। छत्तीसगढ़ में वन अनुसंधान एवं शोध संस्थान बिलासपुर में प्रस्तावित है। रायपुर एवं बिलासपुर में राजीव स्मृति वनों का विकास किया गया है।

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